ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 'मॉक पार्लियामेंट': विपक्ष बोला — महाभियोग चलाने का पूरा अधिकार
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर शुक्रवार, 31 अक्टूबर 2026 को एक 'मॉक पार्लियामेंट' का आयोजन प्रस्तावित है, जो 1 नवंबर की विपक्षी रैली से ठीक एक दिन पहले होगी। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने स्पष्ट कर दिया है कि यह आयोजन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक महाभियोग प्रक्रिया के लिए किया जा रहा है और उन्हें इसका 'पूरा अधिकार' है।
मॉक पार्लियामेंट की पृष्ठभूमि
कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने बताया कि संसद भवन परिसर या उसके आसपास 'मॉक पार्लियामेंट' आयोजित करने की सभी अर्ज़ियाँ प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा खारिज कर दी गईं। उन्होंने कहा, 'जब उन्होंने हमारी सारी मांगें ठुकरा दीं, तो स्वाभाविक है कि खड़गे जी, जो राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के अध्यक्ष हैं, उनके नेतृत्व में हम मॉक पार्लियामेंट आयोजित कर सकते हैं।'
हरिप्रसाद ने यह भी कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार अहम पदों पर बने रहेंगे, यह आंदोलन जारी रहेगा और हर ब्लॉक स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।
विपक्षी दलों की एकजुट आवाज़
सीपीएम सांसद जॉन ब्रिटास ने इस आयोजन को करोड़ों नागरिकों की भावनाओं का प्रतिबिंब बताया। उन्होंने कहा, 'जब संवैधानिक संस्थाओं को कुचला जा रहा हो, चुनाव निष्पक्ष और स्वतंत्र न रह जाएं, जब अंपायर यानी चुनाव आयोग खुद पक्षपाती हो जाए, और जब लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा सभापति हमारे नोटिसों पर कोई ध्यान न दें, तो हमारे पास केवल एक ही विकल्प बचता है — इस तरह का राजनीतिक और सार्वजनिक महाभियोग चलाना।'
ब्रिटास ने यह भी कहा कि उनके अनुसार ज्ञानेश कुमार ने 'अपनी नैतिक साख पहले ही खो दी है, अदालतों ने भी अप्रत्यक्ष रूप से उन पर सवाल उठाए हैं, और अब उनके पास कोई कानूनी अधिकार भी नहीं बचा है।' उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से तत्काल इस्तीफे की माँग की।
वामपंथी दलों का रुख
सीपीएम सांसद वी. शिवदासन ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार 'सिर्फ आरएसएस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए काम कर रहे हैं।' उन्होंने कहा कि वे और उनकी टीम देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को 'बर्बाद' करने की कोशिश कर रहे हैं। शिवदासन ने यह भी घोषणा की कि सीपीएम और अन्य वामपंथी दल मिलकर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक बड़ा संयुक्त अभियान चलाएंगे।
उल्लेखनीय है कि ये सभी आरोप विपक्षी दलों के राजनीतिक बयान हैं; इन पर चुनाव आयोग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
जेएमएन का समर्थन और व्यापक विपक्षी संगठन
जेएमएन नेता मनोज पांडे ने भी 'इंडिया' गठबंधन के मंच पर इस आंदोलन को समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि 'देश की तानाशाही सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरने की ज़रूरत है।' गौरतलब है कि यह आंदोलन ऐसे समय में तेज़ हो रहा है जब विपक्षी दल आगामी चुनावों से पहले चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर सवाल उठाते हुए एकजुट होते दिख रहे हैं।
आगे क्या होगा
1 नवंबर 2026 को प्रस्तावित विपक्षी रैली से पहले 'मॉक पार्लियामेंट' कांग्रेस की रणनीतिक कार्रवाई का हिस्सा है। विपक्ष ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यह अभियान केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि ब्लॉक स्तर तक फैले दीर्घकालिक आंदोलन में तब्दील होगा। अब देखना यह होगा कि सरकार और चुनाव आयोग इस बढ़ते दबाव पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।