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इंडिया ब्लॉक की 'मॉक पार्लियामेंट': CEC ज्ञानेश कुमार के महाभियोग पर मतदान, खड़गे के आवास पर आयोजन

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इंडिया ब्लॉक की 'मॉक पार्लियामेंट': CEC ज्ञानेश कुमार के महाभियोग पर मतदान, खड़गे के आवास पर आयोजन

सारांश

विपक्ष ने संसद के बाहर संसद बना ली — खड़गे के आवास पर 'मॉक पार्लियामेंट' में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक महाभियोग प्रस्ताव पेश होगा। यह कदम कानूनी तौर पर निष्प्रभावी है, लेकिन चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति है।

मुख्य बातें

इंडिया ब्लॉक 29 अक्टूबर को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर 'मॉक पार्लियामेंट' आयोजित करेगा।
CEC ज्ञानेश कुमार के महाभियोग पर प्रतीकात्मक मतदान इस सत्र का केंद्रबिंदु होगा।
लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार सांकेतिक संसद की अध्यक्षता करेंगी।
प्रस्ताव खड़गे पेश करेंगे और राहुल गांधी चर्चा का समापन करेंगे।
विपक्ष का आरोप है कि SIR प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ हुई हैं।
यह कदम प्रतीकात्मक है — संवैधानिक महाभियोग के लिए संसद में आवश्यक बहुमत विपक्ष के पास नहीं है।

इंडिया ब्लॉक के विपक्षी दल शुक्रवार, 29 अक्टूबर को नई दिल्ली में एक सांकेतिक संसद सत्र — 'मॉक पार्लियामेंट' — आयोजित करने जा रहे हैं, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के महाभियोग के पक्ष में प्रतीकात्मक मतदान कराया जाएगा। यह आयोजन कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर होगा, जिसकी अध्यक्षता लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार करेंगी।

मॉक पार्लियामेंट का स्वरूप और कार्यक्रम

सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने बताया कि इस सांकेतिक संसद में एक विधिवत महाभियोग प्रक्रिया अपनाई जाएगी। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे महाभियोग का प्रस्ताव पेश करेंगे, जबकि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी चर्चा का समापन करेंगे।

ब्रिटास ने पत्रकारों से कहा, 'इससे जनता की आकांक्षाएं प्रतिबिंबित होंगी। हमारी एक विधिवत महाभियोग प्रक्रिया होगी, जिसमें एक पीठासीन अधिकारी होगा। लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार इस सांकेतिक संसद की अध्यक्षता करेंगी। विभिन्न दलों के प्रतिनिधि अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।'

इसके अतिरिक्त, नागरिक समाज के प्रतिनिधि और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया से प्रभावित व्यक्ति भी इस सत्र में अपने साक्ष्य रखेंगे।

विरोध की वजह: चुनाव आयोग पर आरोप

विपक्षी दल चुनाव आयोग पर 'मनमाने' निर्णय लेने और SIR प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप लगाते आए हैं। इंडिया ब्लॉक का कहना है कि चुनाव आयोग सत्ताधारी दल के साथ मिलकर कार्य कर रहा है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की निष्पक्षता को कमज़ोर करता है।

गौरतलब है कि SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण, मतदाता सूची को अद्यतन करने की एक प्रक्रिया है, जिस पर विपक्ष ने बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। आलोचकों का कहना है कि इस प्रक्रिया में विशेष समुदायों और क्षेत्रों के मतदाताओं को अनुचित तरीके से प्रभावित किया गया।

खड़गे का बयान: आंदोलन की ज़रूरत

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गुरुवार को प्रेस से बात करते हुए इस सांकेतिक संसद के विचार का समर्थन किया। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि लोकतंत्र में जनता को जागरूक करने के लिए आंदोलन आवश्यक है, और इसीलिए कांग्रेस सरकार तथा चुनाव आयोग की कथित मिलीभगत को उजागर करने पर केंद्रित है।

सीपीआई (एम) सांसद ब्रिटास ने इसे 'प्रचार का हथकंडा' कहने से इनकार किया और इसे जनता की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब बताया। उनका यह भी दावा है कि सत्ताधारी दल ने विपक्ष की आवाज़ को बार-बार नज़रअंदाज़ किया और दबाया है।

प्रतीकात्मक कदम, लेकिन संदेश स्पष्ट

यह कदम संवैधानिक दृष्टि से पूरी तरह प्रतीकात्मक है — इसका कोई कानूनी प्रभाव नहीं होगा, क्योंकि वास्तविक महाभियोग प्रक्रिया संसद के दोनों सदनों में बहुमत से होती है, जो फिलहाल विपक्ष के पास नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में विधानसभा चुनाव निकट हैं और चुनाव आयोग की तटस्थता पर सवाल उठाना विपक्षी दलों की व्यापक रणनीति का हिस्सा बन चुका है।

आगे देखें तो यह सांकेतिक संसद राजनीतिक संदेश भेजने का एक मंच बनेगी — और इंडिया ब्लॉक की एकजुटता का सार्वजनिक प्रदर्शन भी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो जनमत की अदालत में जाओ। लेकिन इसका जोखिम भी है: सांकेतिक महाभियोग को सरकार आसानी से 'नाटकबाज़ी' करार दे सकती है, जिससे मुद्दे की गंभीरता कम हो जाए। असली सवाल यह है कि SIR प्रक्रिया की कथित अनियमितताओं पर ठोस दस्तावेज़ी साक्ष्य क्या हैं — और क्या यह 'मॉक पार्लियामेंट' उन्हें उजागर करती है या महज़ राजनीतिक प्रदर्शन बनकर रह जाती है। चुनाव आयोग की संस्थागत विश्वसनीयता एक गंभीर लोकतांत्रिक प्रश्न है, लेकिन उसे प्रतीकवाद से नहीं, साक्ष्य और कानूनी चुनौती से हल किया जाता है।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंडिया ब्लॉक की 'मॉक पार्लियामेंट' क्या है?
यह कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया ब्लॉक द्वारा 29 अक्टूबर को आयोजित एक सांकेतिक संसद सत्र है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक महाभियोग प्रस्ताव पेश किया जाएगा। यह आयोजन कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नई दिल्ली स्थित आवास पर होगा।
CEC ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग की माँग क्यों की जा रही है?
विपक्षी दल चुनाव आयोग पर मनमाने निर्णय लेने और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि आयोग सत्ताधारी दल के साथ मिलकर कार्य कर रहा है, जिससे निष्पक्ष चुनाव की संभावना प्रभावित होती है।
क्या यह महाभियोग प्रक्रिया कानूनी तौर पर वैध है?
नहीं, यह पूरी तरह प्रतीकात्मक कदम है और इसका कोई संवैधानिक या कानूनी प्रभाव नहीं होगा। संविधान के अनुसार वास्तविक महाभियोग के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है, जो वर्तमान में इंडिया ब्लॉक के पास नहीं है।
मॉक पार्लियामेंट में कौन-कौन हिस्सा लेगा?
लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार इस सत्र की अध्यक्षता करेंगी। कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे प्रस्ताव पेश करेंगे और राहुल गांधी चर्चा का समापन करेंगे। इंडिया ब्लॉक के विभिन्न दलों के सांसद, नागरिक समाज के प्रतिनिधि और SIR प्रक्रिया से प्रभावित व्यक्ति भी भाग लेंगे।
SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
SIR चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को अद्यतन और सत्यापित करने की प्रक्रिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में विशेष समुदायों और क्षेत्रों के मतदाताओं को अनुचित तरीके से प्रभावित किया गया है, जिससे मतदाता सूची की निष्पक्षता संदिग्ध हो जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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