29 अक्टूबर 2026
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केरल: कोरो हेल्थ के 800+ पूर्व कर्मचारियों की सहकारी हेल्थकेयर टेक पहल, मंत्री एमएम लिजू का समर्थन

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केरल: कोरो हेल्थ के 800+ पूर्व कर्मचारियों की सहकारी हेल्थकेयर टेक पहल, मंत्री एमएम लिजू का समर्थन

सारांश

कोच्चि की बंद हो चुकी कोरो हेल्थ के 800 से अधिक विस्थापित आईटी पेशेवर नौकरी के नुकसान को सामूहिक उद्यम में बदलने की राह पर हैं। इंडियन कॉफी हाउस के 1958 वाले मॉडल से प्रेरित यह पहल, केरल की सहकारी विरासत को डिजिटल दौर में ले जाने का एक अनूठा प्रयोग है।

मुख्य बातें

केरल के सहकारिता मंत्री एमएम लिजू ने 29 अक्टूबर 2026 को कोरो हेल्थ के पूर्व कर्मचारियों के सहकारी हेल्थकेयर टेक प्रस्ताव पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।
यह पहल 800 से अधिक विस्थापित आईटी पेशेवरों के लिए नए रोज़गार का रास्ता खोल सकती है।
अब तक 26 संस्थापक सदस्यों ने पंजीकरण कराया; प्राथमिक सहकारी समिति के रूप में पंजीकरण आवेदन दाखिल।
प्रस्तावित उद्यम में मेडिकल कोडिंग , बिलिंग और हेल्थकेयर आईटी सेवाएँ शामिल होंगी।
पहल को 1958 में थलस्सेरी में स्थापित इंडियन कॉफी हाउस के सहकारी मॉडल से प्रेरणा मिलती है।

केरल के सहकारिता मंत्री एमएम लिजू ने 29 अक्टूबर 2026 को तिरुवनंतपुरम में कोच्चि स्थित कोरो हेल्थ के पूर्व कर्मचारियों की एक महत्वाकांक्षी पहल पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। इन कर्मचारियों ने सहकारी मॉडल के तहत एक कर्मचारी-स्वामित्व वाली हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी कंपनी स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है, जो 800 से अधिक विस्थापित आईटी पेशेवरों के लिए रोज़गार का नया रास्ता खोल सकती है।

पहल की पृष्ठभूमि

कंपनी बंद होने के कारण नौकरी गँवा चुके कोरो हेल्थ के पूर्व कर्मचारियों ने एक परियोजना रिपोर्ट तैयार कर मंत्री के समक्ष प्रस्तुत की। इस रिपोर्ट में प्रस्तावित स्वास्थ्य सेवा आईटी और राजस्व चक्र सहकारी समिति के पंजीकरण में तेज़ी लाने के लिए सरकारी समर्थन माँगा गया। अब तक 26 लोगों ने संस्थापक सदस्यों के रूप में पंजीकरण करा लिया है, और समिति ने प्राथमिक सहकारी समिति के रूप में पंजीकरण के लिए आवेदन भी दाखिल कर दिया है।

इसके साथ ही, हेल्थकेयर आईटी और राजस्व चक्र प्रबंधन में उप-अनुबंध कार्य सुरक्षित करने की दिशा में प्रारंभिक चर्चा शुरू हो चुकी है। केरल भर के पेशेवरों ने इस उद्यम पर विचार-विमर्श के लिए एक ऑनलाइन बैठक में भाग लिया।

प्रस्तावित मॉडल

इस सहकारी उद्यम के तहत पेशेवर सामूहिक रूप से कंपनी के मालिक होंगे और उसका संचालन करेंगे। काम प्राप्त करने की ज़िम्मेदारी साझा होगी, और ग्राहकों को मेडिकल कोडिंग, बिलिंग, हेल्थकेयर आईटी तथा संबंधित सेवाएँ प्रदान की जाएँगी। यह मॉडल पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी व्यवस्था से अलग हटकर, सामूहिक स्वामित्व के ज़रिए रोज़गार सृजित करने का प्रयास है।

इंडियन कॉफी हाउस से प्रेरणा

इस पहल के प्रवर्तक इंडियन कॉफी हाउस के इतिहास से प्रेरणा लेते हैं, जिसकी नींव वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता एके गोपालन ने रखी थी। कॉफी बोर्ड द्वारा कॉफी हाउस बंद किए जाने के बाद, प्रभावित श्रमिकों ने खुद को संगठित कर सहकारी मॉडल के तहत उस व्यवसाय को जारी रखा था। केरल का पहला इंडियन कॉफी हाउस 1958 में थलस्सेरी में खुला था — जो श्रमिकों द्वारा किसी उद्यम का सामूहिक स्वामित्व लेने की एक ऐतिहासिक मिसाल है।

कोच्चि स्थित एक सहकारी परामर्श फर्म के सीईओ ने कहा, 'कॉफी हाउस के कर्मचारियों के पास एक काउंटर और एक केतली होती थी। आज के प्रौद्योगिकी पेशेवरों के पास लैपटॉप और विशेष कौशल हैं। उन्हें सही संगठनात्मक संरचना की आवश्यकता है, और केरल की सहकारी परंपरा इसे बनाने का एक तरीका प्रदान करती है।'

व्यापक सामाजिक प्रभाव

यह ऐसे समय में आया है जब आईटी क्षेत्र में छँटनी की घटनाएँ बढ़ रही हैं और तकनीकी पेशेवर पुनः रोज़गार के नए विकल्पों की तलाश में हैं। यदि यह मॉडल सफल होता है, तो इससे छोटे शहरों के नए स्नातकों, काम पर लौट रही महिलाओं और अन्य कुशल पेशेवरों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं। प्रवर्तकों का मानना है कि यह पहल सामूहिक उद्यम के माध्यम से आजीविका के पुनर्निर्माण का एक पुनरावर्तनीय मॉडल बन सकती है।

अगले कदम

तत्काल प्राथमिकताएँ पंजीकरण प्रक्रिया पूर्ण करना और सदस्यों को संचालन शुरू करने में सक्षम बनाने के लिए सेवा अनुबंध सुरक्षित करना है। सहकारिता मंत्री एमएम लिजू की सकारात्मक प्रतिक्रिया से पंजीकरण प्रक्रिया में तेज़ी आने की उम्मीद है। केरल की स्थापित सहकारी परंपरा को प्रौद्योगिकी क्षेत्र में विस्तारित करने का यह प्रयास आने वाले महीनों में कैसा आकार लेता है, यह देखना अहम होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन हेल्थकेयर आईटी और राजस्व चक्र प्रबंधन में अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा और कड़े अनुपालन मानक, एक केतली-काउंटर मॉडल की तुलना में कहीं अधिक जटिल व्यावसायिक चुनौती पेश करते हैं। असली सवाल यह है कि क्या सरकारी समर्थन पंजीकरण के बाद भी बना रहेगा — क्योंकि सहकारी समितियाँ अक्सर पहले अनुबंध सुरक्षित करने में ही लड़खड़ा जाती हैं। यदि यह मॉडल काम करता है, तो यह केरल से बाहर भी छँटनी-प्रभावित टेक पेशेवरों के लिए एक दोहराने योग्य खाका बन सकता है।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोरो हेल्थ के पूर्व कर्मचारियों की सहकारी पहल क्या है?
कोच्चि की बंद हो चुकी हेल्थकेयर कंपनी कोरो हेल्थ के पूर्व कर्मचारी एक कर्मचारी-स्वामित्व वाली हेल्थकेयर आईटी सहकारी समिति बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं, जो मेडिकल कोडिंग, बिलिंग और राजस्व चक्र प्रबंधन सेवाएँ प्रदान करेगी। इस उद्यम से 800 से अधिक विस्थापित आईटी पेशेवरों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
केरल के सहकारिता मंत्री एमएम लिजू ने इस पहल पर क्या कहा?
सहकारिता मंत्री एमएम लिजू ने 29 अक्टूबर 2026 को तिरुवनंतपुरम में प्रवर्तकों से मुलाकात के बाद इस प्रस्ताव पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने प्रस्तावित सहकारी समिति के पंजीकरण में तेज़ी लाने में सहयोग का संकेत दिया।
इस सहकारी उद्यम में कितने लोग जुड़े हैं?
अभी तक 26 लोगों ने संस्थापक सदस्यों के रूप में पंजीकरण कराया है और समिति ने प्राथमिक सहकारी समिति के रूप में पंजीकरण के लिए आवेदन दाखिल कर दिया है। केरल भर के पेशेवरों ने इस उद्यम पर चर्चा के लिए एक ऑनलाइन बैठक में भी भाग लिया।
इंडियन कॉफी हाउस से इस पहल को कैसे प्रेरणा मिली?
1958 में थलस्सेरी में खुले इंडियन कॉफी हाउस के श्रमिकों ने कॉफी बोर्ड द्वारा संचालित कॉफी हाउस बंद होने के बाद सहकारी मॉडल अपनाकर उस व्यवसाय को जारी रखा था। कोरो हेल्थ के पूर्व कर्मचारी उसी भावना को आधुनिक हेल्थकेयर टेक क्षेत्र में लागू करना चाहते हैं।
इस पहल के अगले कदम क्या हैं?
तत्काल प्राथमिकताएँ प्राथमिक सहकारी समिति के रूप में पंजीकरण सुनिश्चित करना और हेल्थकेयर आईटी व राजस्व चक्र प्रबंधन में उप-अनुबंध कार्य सुरक्षित करना है। इन दोनों दिशाओं में प्रारंभिक चर्चा शुरू हो चुकी है।
राष्ट्र प्रेस
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