केरल: कोरो हेल्थ के 800+ पूर्व कर्मचारियों की सहकारी हेल्थकेयर टेक पहल, मंत्री एमएम लिजू का समर्थन
सारांश
मुख्य बातें
केरल के सहकारिता मंत्री एमएम लिजू ने 29 अक्टूबर 2026 को तिरुवनंतपुरम में कोच्चि स्थित कोरो हेल्थ के पूर्व कर्मचारियों की एक महत्वाकांक्षी पहल पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। इन कर्मचारियों ने सहकारी मॉडल के तहत एक कर्मचारी-स्वामित्व वाली हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी कंपनी स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है, जो 800 से अधिक विस्थापित आईटी पेशेवरों के लिए रोज़गार का नया रास्ता खोल सकती है।
पहल की पृष्ठभूमि
कंपनी बंद होने के कारण नौकरी गँवा चुके कोरो हेल्थ के पूर्व कर्मचारियों ने एक परियोजना रिपोर्ट तैयार कर मंत्री के समक्ष प्रस्तुत की। इस रिपोर्ट में प्रस्तावित स्वास्थ्य सेवा आईटी और राजस्व चक्र सहकारी समिति के पंजीकरण में तेज़ी लाने के लिए सरकारी समर्थन माँगा गया। अब तक 26 लोगों ने संस्थापक सदस्यों के रूप में पंजीकरण करा लिया है, और समिति ने प्राथमिक सहकारी समिति के रूप में पंजीकरण के लिए आवेदन भी दाखिल कर दिया है।
इसके साथ ही, हेल्थकेयर आईटी और राजस्व चक्र प्रबंधन में उप-अनुबंध कार्य सुरक्षित करने की दिशा में प्रारंभिक चर्चा शुरू हो चुकी है। केरल भर के पेशेवरों ने इस उद्यम पर विचार-विमर्श के लिए एक ऑनलाइन बैठक में भाग लिया।
प्रस्तावित मॉडल
इस सहकारी उद्यम के तहत पेशेवर सामूहिक रूप से कंपनी के मालिक होंगे और उसका संचालन करेंगे। काम प्राप्त करने की ज़िम्मेदारी साझा होगी, और ग्राहकों को मेडिकल कोडिंग, बिलिंग, हेल्थकेयर आईटी तथा संबंधित सेवाएँ प्रदान की जाएँगी। यह मॉडल पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी व्यवस्था से अलग हटकर, सामूहिक स्वामित्व के ज़रिए रोज़गार सृजित करने का प्रयास है।
इंडियन कॉफी हाउस से प्रेरणा
इस पहल के प्रवर्तक इंडियन कॉफी हाउस के इतिहास से प्रेरणा लेते हैं, जिसकी नींव वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता एके गोपालन ने रखी थी। कॉफी बोर्ड द्वारा कॉफी हाउस बंद किए जाने के बाद, प्रभावित श्रमिकों ने खुद को संगठित कर सहकारी मॉडल के तहत उस व्यवसाय को जारी रखा था। केरल का पहला इंडियन कॉफी हाउस 1958 में थलस्सेरी में खुला था — जो श्रमिकों द्वारा किसी उद्यम का सामूहिक स्वामित्व लेने की एक ऐतिहासिक मिसाल है।
कोच्चि स्थित एक सहकारी परामर्श फर्म के सीईओ ने कहा, 'कॉफी हाउस के कर्मचारियों के पास एक काउंटर और एक केतली होती थी। आज के प्रौद्योगिकी पेशेवरों के पास लैपटॉप और विशेष कौशल हैं। उन्हें सही संगठनात्मक संरचना की आवश्यकता है, और केरल की सहकारी परंपरा इसे बनाने का एक तरीका प्रदान करती है।'
व्यापक सामाजिक प्रभाव
यह ऐसे समय में आया है जब आईटी क्षेत्र में छँटनी की घटनाएँ बढ़ रही हैं और तकनीकी पेशेवर पुनः रोज़गार के नए विकल्पों की तलाश में हैं। यदि यह मॉडल सफल होता है, तो इससे छोटे शहरों के नए स्नातकों, काम पर लौट रही महिलाओं और अन्य कुशल पेशेवरों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं। प्रवर्तकों का मानना है कि यह पहल सामूहिक उद्यम के माध्यम से आजीविका के पुनर्निर्माण का एक पुनरावर्तनीय मॉडल बन सकती है।
अगले कदम
तत्काल प्राथमिकताएँ पंजीकरण प्रक्रिया पूर्ण करना और सदस्यों को संचालन शुरू करने में सक्षम बनाने के लिए सेवा अनुबंध सुरक्षित करना है। सहकारिता मंत्री एमएम लिजू की सकारात्मक प्रतिक्रिया से पंजीकरण प्रक्रिया में तेज़ी आने की उम्मीद है। केरल की स्थापित सहकारी परंपरा को प्रौद्योगिकी क्षेत्र में विस्तारित करने का यह प्रयास आने वाले महीनों में कैसा आकार लेता है, यह देखना अहम होगा।