झारखंड: चुटुपालू-चरही घाटी के ब्लैक स्पॉट सुधार को केंद्र की ₹239.40 करोड़ की मंजूरी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने झारखंड के चुटुपालू और चरही घाटी में दुर्घटना संभावित स्थलों (ब्लैक स्पॉट) के सुधार और सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ₹239.40 करोड़ की परियोजना को स्वीकृति प्रदान की है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की यह मंजूरी रक्षा राज्य मंत्री एवं रांची के सांसद संजय सेठ की पहल पर मिली है, जिन्होंने 29 अक्टूबर 2026 को यह जानकारी सार्वजनिक की।
परियोजना का दायरा और कार्य-क्षेत्र
राष्ट्रीय राजमार्ग-33 (नया एनएच-20) पर स्थित चुटुपालू और चरही घाटी क्षेत्र में कुल 5.99 किलोमीटर सड़क का सुधार किया जाएगा। यह मार्ग रांची-पटना मुख्य सड़क पर पड़ता है और अपने पहाड़ी एवं घुमावदार रास्तों के कारण बरसों से दुर्घटनाओं का केंद्र बना हुआ है। परियोजना के तहत दुर्घटना-प्रवण स्थलों पर आवश्यक सुरक्षा संरचनाएँ और इंजीनियरिंग उपाय लागू किए जाएंगे। हालाँकि, कार्यों की विस्तृत रूपरेखा और निर्माण आरंभ की समयसीमा अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है।
पहल कैसे आगे बढ़ी
सांसद संजय सेठ के अनुसार, इन घाटियों में लगातार हो रहे सड़क हादसों को देखते हुए उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के समक्ष इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। मंत्रालय ने तत्पश्चात दोनों घाटी क्षेत्रों में विस्तृत सर्वेक्षण कराया और उसी आधार पर परियोजना को अंतिम स्वीकृति प्रदान की गई। सेठ ने इस स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के प्रति आभार व्यक्त किया।
सड़क सुरक्षा का व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि चुटुपालू और चरही घाटी की तीखी ढलानें और घने मोड़ दशकों से यात्रियों के लिए जोखिम का कारण रहे हैं। ये इलाके झारखंड के उन गिने-चुने क्षेत्रों में हैं जहाँ भारी वाहन, यात्री बसें और निजी वाहन एक ही संकरे मार्ग पर चलते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। सेठ ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश में सड़क अवसंरचना के विकास के साथ-साथ सड़क सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
आम यात्रियों पर अपेक्षित असर
परियोजना के पूरा होने के बाद रांची-पटना मार्ग पर यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है। ब्लैक स्पॉट पर सुरक्षा उपायों के सुदृढ़ होने से दुर्घटनाओं में कमी आने और माल-ढुलाई तथा आवागमन की निरंतरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इंजीनियरिंग-आधारित हस्तक्षेप, जैसे क्रैश बैरियर, साइनेज और रोड मार्किंग, पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क मृत्यु दर घटाने में सबसे प्रभावी सिद्ध होते हैं।
आगे की राह
परियोजना की विस्तृत कार्य-योजना और निर्माण शुरू होने की तारीख की घोषणा अभी शेष है। उद्योग व नागरिक संगठनों की माँग है कि कार्यान्वयन में पारदर्शिता बनाए रखी जाए और स्थानीय समुदायों को समय-समय पर प्रगति की जानकारी दी जाए। यदि योजना समयबद्ध तरीके से लागू होती है, तो यह झारखंड में सड़क सुरक्षा सुधार का एक मॉडल बन सकती है।