नंदिनी दूध ₹8 महंगा: सीएम शिवकुमार बोले — किसानों को बचाने के लिए जरूरी था फैसला
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 29 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में कैबिनेट बैठक के बाद नंदिनी दूध की कीमत में ₹8 प्रति लीटर की बढ़ोतरी को पूरी तरह उचित ठहराया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय उन किसानों को हो रहे नुकसान को रोकने के लिए लिया गया है, जो पिछले कई वर्षों से कीमतों में संशोधन की माँग कर रहे थे।
किसानों की ज़रूरत को बताया मुख्य वजह
शिवकुमार ने तर्क दिया कि दूध उत्पादन से जुड़ी लागतें — प्लास्टिक पैकेजिंग, डीजल और परिवहन — सभी बढ़ चुकी हैं, जिससे किसानों की आमदनी पर सीधा असर पड़ रहा था। उन्होंने कहा, 'किसानों के होने पर ही हम दूध पी सकते हैं। वरना क्या दूध पीना संभव है?' उन्होंने यह भी बताया कि मूल माँग ₹12 से ₹15 प्रति लीटर बढ़ाने की थी, लेकिन सभी पक्षों से विचार-विमर्श के बाद ₹8 की वृद्धि पर निर्णय लिया गया।
पड़ोसी राज्यों से तुलना और दूध की 'तस्करी' पर चिंता
मुख्यमंत्री ने जनता पर बोझ बढ़ने के सवाल को यह कहते हुए खारिज किया कि आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु की तुलना में कर्नाटक में दूध पहले से सस्ता था। उन्होंने बताया कि कम कीमत के कारण नंदिनी दूध आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र को भेजा जा रहा था, जिसे रोकना जरूरी था। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि तिरुपति मंदिर नंदिनी घी की खरीद करता है, जो इस ब्रांड की गुणवत्ता और विश्वसनीयता का प्रमाण है। उन्होंने जनता को याद दिलाया कि एक लीटर पानी के लिए लोग ₹30-35 खर्च करते हैं।
सर्वदलीय विधायकों की माँग का हवाला
शिवकुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि विधानसभा और विधान परिषद दोनों में सभी दलों के विधायकों ने पार्टी लाइन से परे जाकर दूध की कीमत बढ़ाने की माँग की थी। उनके अनुसार, यह निर्णय पहले इसलिए नहीं लिया जा सका क्योंकि चुनाव आचार संहिता लागू थी। चुनाव समाप्त होते ही सरकार ने इस पर कदम उठाया।
बस किराए पर भी दिया जवाब
बस किराए में वृद्धि के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि परिवहन विभाग को भारी घाटा उठाना पड़ रहा है और डीजल के लिए पर्याप्त धन नहीं बचा है। उन्होंने बताया कि सरकार महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा की सुविधा दे रही है, जिसके कारण यह वित्तीय दबाव और बढ़ा है। किराए पर अंतिम निर्णय परिवहन विभाग पर छोड़ दिया गया है।
क्या होगा आगे
नंदिनी दूध की बढ़ी हुई कीमतें राज्य के करोड़ों उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर डालेंगी, वहीं किसान संगठनों ने इस कदम का स्वागत किया है। गौरतलब है कि यह बढ़ोतरी ऐसे समय में आई है जब राज्य सरकार पर गारंटी योजनाओं के कारण वित्तीय दबाव पहले से ही है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या बढ़ी हुई कमाई का लाभ सीधे किसानों तक पहुँचता है।