गन्ना किसान आंदोलन: CM शिवकुमार ने PM मोदी को लिखा पत्र, उत्तरी कर्नाटक में पेराई सत्र ठप
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 19 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक तीन पृष्ठ का पत्र लिखकर गन्ना किसानों की लंबित मांगों पर तत्काल केंद्रीय हस्तक्षेप की माँग की है। उत्तरी कर्नाटक में जारी विरोध प्रदर्शनों के कारण गन्ना पेराई का मौसम अभी तक शुरू नहीं हो पाया है, जिससे खेतों में पका हुआ गन्ना खड़ा होने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।
पाँच प्रमुख मांगें जो केंद्र के दायरे में
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने पत्र में केंद्र सरकार से पाँच प्रमुख मुद्दों पर शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया है। इनमें चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य (MSP) में संशोधन, घरेलू और व्यावसायिक चीनी के लिए अलग-अलग मूल्य निर्धारण, गन्ने से तैयार इथेनॉल की खरीद और मूल्य निर्धारण नीति में बदलाव, तथा उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) तय करने के लिए आधार वसूली दर को 9.50 प्रतिशत पर बहाल करना शामिल है।
शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि ये माँगें केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती हैं और राज्य सरकार इन्हें एकतरफा हल करने में असमर्थ है।
मुख्य घटनाक्रम: पदयात्रा, हाई कोर्ट और हुबली
उत्तरी कर्नाटक के गन्ना किसान विभिन्न शहरों से हुबली की ओर पदयात्रा निकाल रहे हैं। किसानों का इरादा केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी के आवास का घेराव करने का था। हालांकि, कर्नाटक उच्च न्यायालय ने इस प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए हैं। कई स्थानों पर सड़क अवरोध की भी खबरें आई हैं, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने 17 अक्टूबर को बेलगावी जिले के कित्तूर का दौरा कर प्रदर्शनकारी किसानों से पदयात्रा वापस लेने की अपील की थी। किसानों ने स्पष्ट किया कि केंद्र से ठोस आश्वासन मिले बिना वे आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे।
राज्य सरकार के उठाए गए कदम
शिवकुमार ने पत्र में राज्य सरकार द्वारा उठाए गए उपायों का विस्तृत ब्यौरा भी दिया। 27 नवंबर 2023 के एक सरकारी आदेश के तहत सभी 81 चालू चीनी मिलों को एनालॉग से डिजिटल लोड सेल प्रणाली में स्थानांतरित किया गया है। जिला स्तरीय टीमों का गठन किया गया है, जो 2025-26 सत्र के दौरान प्रत्येक मिल में कम से कम महीने में दो बार चीनी उत्पादन और गन्ने के वजन का निरीक्षण करती हैं।
इन सुधारों के परिणामस्वरूप चीनी की औसत रिकवरी दर 2022-23 में 9.91 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 11.09 प्रतिशत हो गई है। सभी मिलों को राष्ट्रीय परीक्षण एवं अंशांकन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (NABL) से मान्यता प्राप्त करने का निर्देश भी दिया गया है।
इसके अलावा, राज्य सरकार ने 2025-26 सत्र के लिए मिलों द्वारा तय कीमत से ₹100 प्रति टन अतिरिक्त सुनिश्चित किया है, जिसमें ₹50 प्रति टन राज्य सरकार अपने कोष से वहन कर रही है और लगभग ₹290 करोड़ सीधे किसानों को भुगतान किए जा चुके हैं।
आम जनता पर असर और नुकसान का आँकलन
मुख्यमंत्री ने पत्र में चेताया कि पेराई सत्र में हर दिन की देरी से गन्ने के वजन और चीनी की मात्रा में नुकसान हो रहा है। लगातार सड़क अवरोधों से क्षेत्र में सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ रही है और आम नागरिकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तरी कर्नाटक का कृषि क्षेत्र पहले से ही मौसमी अनिश्चितताओं से जूझ रहा है। गौरतलब है कि गन्ना उत्पादन क्षेत्रों में पेराई सत्र में देरी सीधे तौर पर लाखों किसानों की आजीविका को प्रभावित करती है।
नीति आयोग समिति और आगे की राह
कर्नाटक ने 14 अक्टूबर को केंद्र सरकार द्वारा गठित उस समिति का स्वागत किया है, जिसकी अध्यक्षता नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद कर रहे हैं। यह समिति गन्ना किसानों और चीनी क्षेत्र से जुड़े मुद्दों की जाँच के लिए गठित की गई है।
शिवकुमार ने कहा कि राज्य इस समिति में पूरी तरह भाग लेगा और अपने आँकड़े साझा करेगा। साथ ही उन्होंने जोर दिया कि समिति की जाँच जारी रहते हुए भी तत्काल निर्णय लेना आवश्यक है, क्योंकि मौके पर की जा रही देरी से किसानों का नुकसान हर दिन बढ़ता जा रहा है।