हुबली में किसानों का बड़ा प्रदर्शन: गन्ने का रेट ₹5,500 प्रति टन करने की माँग, 2,000 से अधिक किसान जुटे
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के धारवाड़, बेलगावी और अन्य जिलों के 2,000 से अधिक किसानों ने मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को हुबली में विरोध प्रदर्शन तेज करते हुए केंद्र सरकार से गन्ने का न्यूनतम मूल्य ₹5,500 प्रति टन निर्धारित करने, चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य में वृद्धि करने और डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने की माँग की। कर्नाटक राज्य रायथा संघ और हसिरू सेना के नेतृत्व में आयोजित इस आंदोलन ने हुबली की कई प्रमुख सड़कों पर यातायात बाधित कर दिया।
मुख्य घटनाक्रम
प्रदर्शनकारी किसान पहले कित्तूर रानी चेन्नम्मा सर्कल पर एकत्र हुए और इसके बाद केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी के आवास की ओर मार्च किया। किसानों ने मूल रूप से जोशी के हुबली स्थित कार्यालय का घेराव करने की योजना बनाई थी, परंतु पुलिस द्वारा अनुमति न दिए जाने पर वे नेहरू मैदान की ओर मुड़ गए और वहाँ से चेन्नम्मा सर्कल होते हुए मंत्री के आवास तक पहुँचे।
कुछ किसानों द्वारा बैरिकेड्स हटाने के प्रयास के कारण अल्पकालिक तनाव उत्पन्न हुआ। जोशी के कार्यालय और आवास के आसपास 250 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात रहे और बैरिकेड्स लगाए गए। हुबली की कई प्रमुख सड़कों पर धरने के कारण यातायात बाधित हुआ और वाहनों की कतारें कई किलोमीटर तक फैल गईं।
किसानों की प्रमुख माँगें
प्रदर्शनकारियों ने सरकार के समक्ष कई माँगें रखीं। उन्होंने चालू पेराई सत्र के लिए गन्ने का न्यूनतम मूल्य ₹5,500 प्रति टन तय करने की माँग की। इसके साथ ही चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य को ₹31 प्रति किलो से बढ़ाकर ₹60 प्रति किलो करने की माँग की गई।
किसानों ने 2025-26 सत्र में गन्ना आपूर्ति करने वाले किसानों को ₹300 प्रति टन का अतिरिक्त भुगतान, सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की घोषणा, महादयी सिंचाई परियोजना को लागू करने, गन्ने के उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) का वैज्ञानिक निर्धारण तथा राज्य के संपूर्ण इथेनॉल उत्पादन की खरीद की भी माँग की।
किसान नेता की बात
किसान नेता चुन्नप्पा पुजारी ने बताया कि 2019 और 2026 के बीच खेती की लागत लगभग तीन गुना बढ़ गई है। उन्होंने माँग की कि गन्ने की कीमतें कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) द्वारा प्रस्तुत अनुमानों के आधार पर वैज्ञानिक तरीके से तय की जाएँ।
पुजारी ने केंद्र और राज्य दोनों सरकारों से किसानों के ऋण पूर्णतः माफ करने की भी माँग की। उन्होंने राज्य सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि फसल हानि के मुआवजे के रूप में केवल ₹2,500 दिया जाना अत्यंत अपर्याप्त है।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक का गन्ना उत्पादक क्षेत्र, विशेषकर बेलगावी और धारवाड़ जिले, नई पेराई सत्र की शुरुआत से पहले मूल्य निर्धारण को लेकर अनिश्चितता में हैं। गौरतलब है कि देशभर में किसान संगठन CACP की सिफारिशों और वास्तविक FRP के बीच के अंतर को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत हैं।
किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनकी माँगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। हुबली में हुई इस रैली को आंदोलन के विस्तार की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
क्या होगा आगे
आयोजकों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि माँगें शीघ्र स्वीकार नहीं की गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राज्य सरकार की प्रतिक्रिया भी अभी प्रतीक्षित है।