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क्या कर्नाटक में किसानों का प्रदर्शन उग्र हो गया?

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क्या कर्नाटक में किसानों का प्रदर्शन उग्र हो गया?

सारांश

कर्नाटक के बागलकोट में किसानों का प्रदर्शन उग्र हो गया है। गन्ना मूल्य को लेकर चल रहे संघर्ष में आंदोलनकारियों ने 50 से अधिक ट्रैक्टरों में आग लगा दी। किसानों की मांग है कि गन्ने की कीमत 3,500 रुपए प्रति टन हो। क्या सरकार इस संकट को सुलझा पाएगी?

मुख्य बातें

किसान आंदोलन का गंभीर रूप सरकार को हस्तक्षेप की आवश्यकता गन्ने की मूल्य निर्धारण में असहमति विपक्ष ने सरकार की नीति की आलोचना की किसानों को उचित मुआवजा

बागलकोट, 13 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक के बागलकोट जिले में गन्ना मिल मालिकों से 3,500 रुपए प्रति टन गन्ने की कीमत की मांग कर रहे किसानों का विरोध-प्रदर्शन गुरुवार को हिंसक हो गया। आंदोलनकारियों ने गन्ने से लदे 50 से अधिक ट्रैक्टरों को आग लगा दी।

यह घटना मुधोल के पास महालिंगपुरा कस्बे के पास संगनाकट्टी क्रॉस की है। अनुमान है कि आग में हजारों टन गन्ना जलकर खाक हो गया।

राज्य सरकार ने किसानों और कारखाना मालिकों के साथ बैठक के बाद गन्ने की कीमत 3,300 रुपए प्रति टन तय की थी।

प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, आंदोलनकारी किसान मुधोल कस्बे के पास सिद्दापुरा में स्थित चीनी मिल को घेरने की कोशिश कर रहे थे। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने मिल के सामने खड़ी गन्ने से लदी ट्रैक्टरों में आग लगा दी। मिल के बाहर 200 से ज्यादा ट्रैक्टर खड़े थे।

मुधोल के किसान सरकार द्वारा तय 3,300 रुपए प्रति टन गन्ने की कीमत का विरोध कर रहे थे। उन्होंने पिछले एक हफ्ते से प्रदर्शन किया था। गुरुवार को उन्होंने मुधोल कस्बे में पूरी बंदी की। वे मांग कर रहे थे कि सिर्फ चीनी मिल मालिक ही बातचीत के लिए आगे आएं और गन्ने की कीमत 3,500 रुपए प्रति टन तय की जाए।

इस पर केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि बेलगावी में किसानों के प्रदर्शन पर सरकार तुरंत कार्रवाई करती है, लेकिन पूरे राज्य में गन्ना किसानों की बड़ी समस्या को हल करने में पूरी तरह नाकाम रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को तुरंत हस्तक्षेप कर संकट का समाधान करना चाहिए।

विपक्ष के नेता आर अशोक ने कहा कि राज्य के गन्ना किसानों की दयनीय स्थिति कांग्रेस सरकार की लापरवाही का सीधा नतीजा है। उन्होंने कहा कि सिद्धारमैया को चीनी मिल मालिकों और किसान नेताओं के साथ बैठक करनी चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि सरकार को गन्ना किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए और आज की दुखद घटना के कारण किसानों को हुए नुकसान का उचित मुआवजा देना चाहिए।

नेता विपक्ष ने दावा किया कि देश के अन्नदाताओं के इस संघर्ष में भाजपा किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहेगी और उन्हें पूरा समर्थन देगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किसानों का प्रदर्शन क्यों हुआ?
किसान गन्ने का मूल्य बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
आंदोलन में क्या हुआ?
आंदोलनकारियों ने 50 से अधिक ट्रैक्टरों को आग लगा दी।
सरकार ने गन्ने की कीमत क्या तय की थी?
सरकार ने गन्ने की कीमत 3,300 रुपए प्रति टन तय की थी।
किसानों की मांगे क्या हैं?
किसान 3,500 रुपए प्रति टन गन्ने की कीमत की मांग कर रहे हैं।
इस घटना पर विपक्ष का क्या कहना है?
विपक्ष ने सरकार की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है।
राष्ट्र प्रेस
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