कर्नाटक में गन्ना किसानों का 'जेल भरो' आंदोलन: बेलगावी में पुलिस ने रोका मार्च, नेता हिरासत में
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के बेलगावी में गन्ना किसानों ने 5 नवंबर 2026 को 'जेल भरो' आंदोलन के तहत विरोध मार्च निकाला, जिसे पुलिस ने शहर के बाहरी इलाके में मुक्ति मठ के पास रोक दिया और प्रमुख किसान नेताओं को हिरासत में ले लिया। किसान राज्य सरकार से प्रति टन ₹1,000 की अतिरिक्त सब्सिडी की माँग पर अड़े हुए हैं, जिसके बिना वे आंदोलन वापस लेने को तैयार नहीं हैं।
मुख्य माँगें और आंदोलन की पृष्ठभूमि
किसान संगठनों की माँग है कि चीनी मिलें प्रति टन गन्ने के लिए ₹4,500 का भुगतान करें और राज्य सरकार अतिरिक्त ₹1,000 सब्सिडी दे, जिससे कुल मूल्य ₹5,500 प्रति टन हो जाए। इसके साथ ही किसानों ने केंद्र सरकार से चीनी का न्यूनतम विक्रय मूल्य (MSP) मौजूदा ₹31 प्रति किलो से बढ़ाकर ₹60 प्रति किलो करने की भी माँग की है।
व्यापक माँगों में उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) में संशोधन, 14 दिनों के भीतर समय पर भुगतान, घरेलू और वाणिज्यिक चीनी के लिए पृथक मूल्य निर्धारण, गन्ना आधारित इथेनॉल की खरीद एवं मूल्य निर्धारण में बदलाव और एक व्यापक राष्ट्रीय चीनी नीति भी शामिल हैं।
बेलगावी में हिरासत और तीखा टकराव
विरोध मार्च का नेतृत्व कर रहे किसान नेता चूनप्पा पुजारी को बेलगावी के निकट गुरलापुरा में हिरासत में लिया गया। एक अन्य प्रमुख नेता शशिकांत गुरुजी को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया। किसानों और पुलिसकर्मियों के बीच इस दौरान तीखी नोकझोंक हुई।
चूनप्पा पुजारी ने हिरासत लिए जाने से पहले कहा, "अगर मुझे जेल भेजा जाता है तो ठीक है, लेकिन किसानों को सरकार से ₹1,000 की सब्सिडी मिलनी चाहिए। कर्नाटक बंद होगा। कोई भी चीनी मिल नहीं चल पाएगी। समझौता लागू होने के बाद ही वे चल पाएंगी।" उन्होंने माँग की कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार कैबिनेट बैठक में इस सब्सिडी की घोषणा करें।
पुजारी ने यह भी चेतावनी दी, "हम डरेंगे नहीं। चीनी मिल मालिकों को सार्वजनिक रूप से घोषणा करनी चाहिए कि वे प्रति टन गन्ने के लिए ₹3,600 देने पर सहमत हैं। जब तक सरकार ₹1,000 की सब्सिडी की घोषणा नहीं करती, हम माँग करते हैं कि अधिकारी हमें जेल में रखें।"
सरकार की प्रतिक्रिया और बातचीत की नाकामी
लोक निर्माण विभाग मंत्री एवं बेलगावी जिला प्रभारी मंत्री सतीश जारकीहोली ने मंगलवार को चीनी मिल मालिकों और किसानों के बीच दो दौर की बैठकें कराई थीं, परंतु गतिरोध नहीं टूटा। बुधवार को जारकीहोली ने चीनी मिल मालिकों के साथ एक और दौर की चर्चा की।
गौरतलब है कि 26 अक्टूबर को बेलगावी के सुवर्ण विधान सौध में सरकार, चीनी मिल मालिकों और किसान प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक बेनतीजा रही थी। उस बातचीत में सरकार ने चीनी मिलों से किसानों को अतिरिक्त ₹250 प्रति टन देने का आग्रह किया था, लेकिन कथित तौर पर कई मिलों ने इस प्रस्ताव पर अमल नहीं किया।
इससे पहले अक्टूबर मध्य में मुख्यमंत्री शिवकुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर गन्ना किसानों की माँगों पर तत्काल केंद्रीय हस्तक्षेप का अनुरोध किया था। किसानों ने पुणे बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग को 30 घंटे से अधिक समय तक जाम भी किया था।
आंदोलन का विस्तार और आगे की रणनीति
यह आंदोलन केवल बेलगावी तक सीमित नहीं है — मैसूरु, मांड्या, हावेरी और अन्य जिलों में भी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। पिछले कई हफ्तों से किसान पदयात्रा, हाईवे जाम, विरोध मार्च और राज्यव्यापी प्रदर्शन करते आ रहे हैं।
'जेल भरो' कार्यक्रम के तहत किसानों ने 'कैदी नंबर 5,500' के नारे वाली टी शर्ट पहनकर प्रदर्शन किया और बेलगावी की हिंडालगा सेंट्रल जेल की ओर मार्च किया। किसान संगठन 6 नवंबर को बेंगलुरु में एक बड़े सम्मेलन की योजना बना रहे हैं, जिसके बाद गाँव स्तर पर और व्यापक लामबंदी की तैयारी है।
राज्य सरकार की कैबिनेट बैठक में गन्ना किसानों के मुद्दे पर चर्चा होने वाली है — उस बैठक के नतीजे से तय होगा कि आंदोलन और तेज होता है या गतिरोध टूटता है।