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कर्नाटक में गन्ना किसानों का 'जेल भरो' आंदोलन: बेलगावी में पुलिस ने रोका मार्च, नेता हिरासत में

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कर्नाटक में गन्ना किसानों का 'जेल भरो' आंदोलन: बेलगावी में पुलिस ने रोका मार्च, नेता हिरासत में

सारांश

कर्नाटक के गन्ना किसानों का धैर्य टूट गया है। बेलगावी में 'जेल भरो' आंदोलन, नेताओं की हिरासत और कर्नाटक बंद की चेतावनी — ₹5,500 प्रति टन की माँग पर अड़े किसान अब 6 नवंबर को बेंगलुरु सम्मेलन के बाद पूरे राज्य में लामबंदी का इरादा रखते हैं।

मुख्य बातें

कर्नाटक के बेलगावी में गन्ना किसानों ने 5 नवंबर 2026 को 'जेल भरो' आंदोलन शुरू किया; पुलिस ने मुक्ति मठ के पास मार्च रोका।
किसान नेता चूनप्पा पुजारी (गुरलापुरा) और शशिकांत गुरुजी को पुलिस ने हिरासत में लिया।
किसानों की माँग: चीनी मिलें ₹4,500 + राज्य सरकार ₹1,000 सब्सिडी = कुल ₹5,500 प्रति टन ; चीनी MSP ₹31 से बढ़ाकर ₹60 प्रति किलो करने की माँग।
26 अक्टूबर की सुवर्ण विधान सौध बैठक और लोक निर्माण मंत्री सतीश जारकीहोली की दो दौर की वार्ता बेनतीजा रही।
किसान संगठन 6 नवंबर को बेंगलुरु में बड़े सम्मेलन की तैयारी में; राज्य कैबिनेट में मुद्दे पर चर्चा प्रस्तावित।

कर्नाटक के बेलगावी में गन्ना किसानों ने 5 नवंबर 2026 को 'जेल भरो' आंदोलन के तहत विरोध मार्च निकाला, जिसे पुलिस ने शहर के बाहरी इलाके में मुक्ति मठ के पास रोक दिया और प्रमुख किसान नेताओं को हिरासत में ले लिया। किसान राज्य सरकार से प्रति टन ₹1,000 की अतिरिक्त सब्सिडी की माँग पर अड़े हुए हैं, जिसके बिना वे आंदोलन वापस लेने को तैयार नहीं हैं।

मुख्य माँगें और आंदोलन की पृष्ठभूमि

किसान संगठनों की माँग है कि चीनी मिलें प्रति टन गन्ने के लिए ₹4,500 का भुगतान करें और राज्य सरकार अतिरिक्त ₹1,000 सब्सिडी दे, जिससे कुल मूल्य ₹5,500 प्रति टन हो जाए। इसके साथ ही किसानों ने केंद्र सरकार से चीनी का न्यूनतम विक्रय मूल्य (MSP) मौजूदा ₹31 प्रति किलो से बढ़ाकर ₹60 प्रति किलो करने की भी माँग की है।

व्यापक माँगों में उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) में संशोधन, 14 दिनों के भीतर समय पर भुगतान, घरेलू और वाणिज्यिक चीनी के लिए पृथक मूल्य निर्धारण, गन्ना आधारित इथेनॉल की खरीद एवं मूल्य निर्धारण में बदलाव और एक व्यापक राष्ट्रीय चीनी नीति भी शामिल हैं।

बेलगावी में हिरासत और तीखा टकराव

विरोध मार्च का नेतृत्व कर रहे किसान नेता चूनप्पा पुजारी को बेलगावी के निकट गुरलापुरा में हिरासत में लिया गया। एक अन्य प्रमुख नेता शशिकांत गुरुजी को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया। किसानों और पुलिसकर्मियों के बीच इस दौरान तीखी नोकझोंक हुई।

चूनप्पा पुजारी ने हिरासत लिए जाने से पहले कहा, "अगर मुझे जेल भेजा जाता है तो ठीक है, लेकिन किसानों को सरकार से ₹1,000 की सब्सिडी मिलनी चाहिए। कर्नाटक बंद होगा। कोई भी चीनी मिल नहीं चल पाएगी। समझौता लागू होने के बाद ही वे चल पाएंगी।" उन्होंने माँग की कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार कैबिनेट बैठक में इस सब्सिडी की घोषणा करें।

पुजारी ने यह भी चेतावनी दी, "हम डरेंगे नहीं। चीनी मिल मालिकों को सार्वजनिक रूप से घोषणा करनी चाहिए कि वे प्रति टन गन्ने के लिए ₹3,600 देने पर सहमत हैं। जब तक सरकार ₹1,000 की सब्सिडी की घोषणा नहीं करती, हम माँग करते हैं कि अधिकारी हमें जेल में रखें।"

सरकार की प्रतिक्रिया और बातचीत की नाकामी

लोक निर्माण विभाग मंत्री एवं बेलगावी जिला प्रभारी मंत्री सतीश जारकीहोली ने मंगलवार को चीनी मिल मालिकों और किसानों के बीच दो दौर की बैठकें कराई थीं, परंतु गतिरोध नहीं टूटा। बुधवार को जारकीहोली ने चीनी मिल मालिकों के साथ एक और दौर की चर्चा की।

गौरतलब है कि 26 अक्टूबर को बेलगावी के सुवर्ण विधान सौध में सरकार, चीनी मिल मालिकों और किसान प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक बेनतीजा रही थी। उस बातचीत में सरकार ने चीनी मिलों से किसानों को अतिरिक्त ₹250 प्रति टन देने का आग्रह किया था, लेकिन कथित तौर पर कई मिलों ने इस प्रस्ताव पर अमल नहीं किया।

इससे पहले अक्टूबर मध्य में मुख्यमंत्री शिवकुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर गन्ना किसानों की माँगों पर तत्काल केंद्रीय हस्तक्षेप का अनुरोध किया था। किसानों ने पुणे बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग को 30 घंटे से अधिक समय तक जाम भी किया था।

आंदोलन का विस्तार और आगे की रणनीति

यह आंदोलन केवल बेलगावी तक सीमित नहीं है — मैसूरु, मांड्या, हावेरी और अन्य जिलों में भी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। पिछले कई हफ्तों से किसान पदयात्रा, हाईवे जाम, विरोध मार्च और राज्यव्यापी प्रदर्शन करते आ रहे हैं।

'जेल भरो' कार्यक्रम के तहत किसानों ने 'कैदी नंबर 5,500' के नारे वाली टी शर्ट पहनकर प्रदर्शन किया और बेलगावी की हिंडालगा सेंट्रल जेल की ओर मार्च किया। किसान संगठन 6 नवंबर को बेंगलुरु में एक बड़े सम्मेलन की योजना बना रहे हैं, जिसके बाद गाँव स्तर पर और व्यापक लामबंदी की तैयारी है।

राज्य सरकार की कैबिनेट बैठक में गन्ना किसानों के मुद्दे पर चर्चा होने वाली है — उस बैठक के नतीजे से तय होगा कि आंदोलन और तेज होता है या गतिरोध टूटता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन राज्य सरकार अपने स्तर पर ₹1,000 सब्सिडी की घोषणा करने से बच रही है — यह राजनीतिक जवाबदेही से पलायन की क्लासिक शैली है। ₹5,500 प्रति टन की माँग और चीनी MSP दोगुना करने की माँग केंद्र राज्य वित्तीय संतुलन और चीनी उद्योग की व्यवहार्यता दोनों पर असर डालती है — जिस पर मुख्यधारा की कवरेज चुप है।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में गन्ना किसानों का 'जेल भरो' आंदोलन क्या है?
'जेल भरो' आंदोलन कर्नाटक के गन्ना किसानों का वह विरोध अभियान है जिसमें किसान स्वेच्छा से गिरफ्तारी देकर सरकार पर दबाव बनाना चाहते हैं। 5 नवंबर 2026 को बेलगावी में किसानों ने 'कैदी नंबर 5,500' वाली टी शर्ट पहनकर हिंडालगा सेंट्रल जेल की ओर मार्च किया, जिसे पुलिस ने रोक दिया।
गन्ना किसान कितनी कीमत और सब्सिडी की माँग कर रहे हैं?
किसानों की माँग है कि चीनी मिलें ₹4,500 प्रति टन दें और राज्य सरकार ₹1,000 की अतिरिक्त सब्सिडी दे, जिससे कुल मूल्य ₹5,500 प्रति टन हो। साथ ही केंद्र सरकार से चीनी का न्यूनतम विक्रय मूल्य (MSP) मौजूदा ₹31 से बढ़ाकर ₹60 प्रति किलो करने की भी माँग है।
किसान नेता चूनप्पा पुजारी को क्यों हिरासत में लिया गया?
विरोध मार्च का नेतृत्व कर रहे किसान नेता चूनप्पा पुजारी को बेलगावी के निकट गुरलापुरा में पुलिस ने हिरासत में लिया क्योंकि वे प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे। उनके साथ शशिकांत गुरुजी को भी हिरासत में लिया गया।
बातचीत के पिछले प्रयास क्यों विफल हुए?
26 अक्टूबर को बेलगावी के सुवर्ण विधान सौध में हुई बैठक बेनतीजा रही थी। सरकार ने मिलों से ₹250 प्रति टन अतिरिक्त देने का आग्रह किया था, लेकिन कथित तौर पर कई मिलों ने इसे नहीं माना। लोक निर्माण मंत्री सतीश जारकीहोली की दो दौर की मध्यस्थता भी गतिरोध नहीं तोड़ सकी।
आंदोलन आगे किस दिशा में जाएगा?
किसान संगठन 6 नवंबर को बेंगलुरु में बड़े सम्मेलन की योजना बना रहे हैं, जिसके बाद गाँव स्तर पर व्यापक लामबंदी की तैयारी है। राज्य कैबिनेट की आगामी बैठक में गन्ना किसानों के मुद्दे पर चर्चा होनी है, जिसके नतीजे से आंदोलन की अगली दिशा तय होगी।
राष्ट्र प्रेस
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