3 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बेलगावी में गन्ना किसानों का आंदोलन तेज: डीसी दफ्तर के सामने खाना पकाकर जताया विरोध, ₹5,500 प्रति टन की माँग

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बेलगावी में गन्ना किसानों का आंदोलन तेज: डीसी दफ्तर के सामने खाना पकाकर जताया विरोध, ₹5,500 प्रति टन की माँग

सारांश

बेलगावी में गन्ना किसानों ने डीसी दफ्तर के सामने खाना पकाकर अनूठे अंदाज़ में विरोध दर्ज कराया। ₹5,500 प्रति टन की माँग और फरवरी 2019 से न बदले चीनी एमएसपी पर गुस्सा — प्रभारी मंत्री सतीश जारकीहोली की अध्यक्षता में बैठक से नतीजे का इंतज़ार।

मुख्य बातें

बेलगावी में 3 नवंबर 2026 को गन्ना किसानों ने डीसी दफ्तर के सामने खाना पकाकर विरोध प्रदर्शन किया।
किसान नेता गणेश इलिगर के नेतृत्व में किसान ₹5,500 प्रति टन गन्ने की माँग कर रहे हैं।
किसानों की माँग — चीनी का एमएसपी ₹31 से बढ़ाकर ₹60 प्रति किलो , या ₹6,000 प्रति क्विंटल न्यूनतम बिक्री मूल्य।
चीनी का एमएसपी फरवरी 2019 से नहीं बदला है — यही किसानों के गुस्से की जड़ है।
प्रभारी मंत्री सतीश जारकीहोली और अतिरिक्त डीसी की अध्यक्षता में बेलगावी डीसी दफ्तर में बैठक प्रस्तावित है।
किसान नेता इलिगर ने राज्य से गन्ना किसानों के लिए छठी गारंटी घोषित करने की माँग की है।

बेलगावी के गन्ना किसानों का विरोध-प्रदर्शन 3 नवंबर 2026 को निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया, जब किसान नेता गणेश इलिगर के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान बेलगावी जिला उपायुक्त (डीसी) दफ्तर के सामने जमा हुए और वहाँ खाना पकाकर अपना गुस्सा जाहिर किया। इस संकट को सुलझाने के लिए प्रभारी मंत्री सतीश जारकीहोली और अतिरिक्त डीसी की अध्यक्षता में डीसी दफ्तर में एक अहम बैठक होने वाली है।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

किसानों का यह प्रदर्शन कर्नाटक में 2026-27 के पेराई सीज़न से जुड़ी तीन प्रमुख माँगों के इर्द-गिर्द केंद्रित है — गन्ने की ऊँची कीमत, चीनी के केंद्रीय न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी और राज्य स्तर पर बेहतर वित्तीय सहायता। रिपोर्टों के अनुसार, किसान प्रति टन गन्ने के लिए ₹5,500 की माँग कर रहे हैं, जिसमें केंद्रीय मूल्य के ऊपर अतिरिक्त राज्य-परामर्श प्रोत्साहन या बोनस भी शामिल है।

यह ऐसे समय में आया है जब मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि राज्य के खजाने में पर्याप्त धन नहीं है। किसान नेता गणेश इलिगर ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि राज्य सरकार गारंटी योजनाओं के लिए कर्ज ले सकती है, तो गन्ना किसानों के लिए छठी गारंटी की घोषणा भी की जानी चाहिए।

चीनी एमएसपी पर किसानों की माँग

किसानों की एक प्रमुख माँग यह है कि केंद्र सरकार चीनी का एमएसपी ₹31 प्रति किलो से बढ़ाकर ₹60 प्रति किलो करे, या फिर ₹6,000 प्रति क्विंटल का न्यूनतम बिक्री मूल्य निर्धारित करे। किसानों का तर्क है कि चीनी का एमएसपी फरवरी 2019 से नहीं बदला है, और मौजूदा चीनी कीमतों के माहौल में चीनी मिलें किसानों को बेहतर दर देने में असमर्थ हैं।

गौरतलब है कि गन्ने को एक नकदी फसल के रूप में जाना जाता है, क्योंकि इसे मुख्य रूप से चीनी मिलों और बाज़ारों में बेचकर नकद आमदनी कमाने के लिए उगाया जाता है। इसलिए गन्ने की सरकारी कीमत में कोई भी बदलाव किसानों की सीधी आय को प्रभावित करता है।

सरकार की प्रतिक्रिया

प्रभारी मंत्री सतीश जारकीहोली और अतिरिक्त डीसी की अध्यक्षता में होने वाली बैठक को इस आंदोलन के संदर्भ में एक महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालाँकि बैठक के नतीजों का इंतजार है और किसान संगठनों ने संकेत दिया है कि जब तक ठोस लिखित आश्वासन नहीं मिलता, प्रदर्शन जारी रहेगा।

आम किसानों पर असर

बेलगावी सहित उत्तरी कर्नाटक के कई जिलों में गन्ना एक प्रमुख फसल है। यदि पेराई सीज़न में उचित मूल्य नहीं मिलता, तो हजारों किसान परिवारों की सालाना आय पर सीधा असर पड़ेगा। किसानों का कहना है कि बढ़ती लागत — उर्वरक, मजदूरी और सिंचाई — के मुकाबले मौजूदा कीमतें टिकाऊ नहीं हैं।

आगे क्या होगा

डीसी दफ्तर में प्रस्तावित बैठक के नतीजे इस आंदोलन की दिशा तय करेंगे। किसान नेताओं ने स्पष्ट किया है कि वे केवल मौखिक आश्वासन से संतुष्ट नहीं होंगे। यदि राज्य और केंद्र सरकार की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो विरोध-प्रदर्शन का दायरा और विस्तृत हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि इनपुट लागत कई गुना बढ़ चुकी है। मुख्यमंत्री शिवकुमार का 'खजाने में पैसा नहीं' वाला बयान किसानों को गारंटी योजनाओं के वादों की याद दिलाता है — जिन्हें राज्य ने कर्ज लेकर भी लागू करने की कोशिश की। असली सवाल यह है कि क्या सरकार गन्ना किसानों को भी उसी प्राथमिकता में रखेगी, या यह आंदोलन केवल एक और बैठक की खानापूर्ति बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बेलगावी में गन्ना किसान किस बात का विरोध कर रहे हैं?
कर्नाटक के बेलगावी में गन्ना किसान 2026-27 के पेराई सीज़न के लिए ₹5,500 प्रति टन की कीमत, चीनी के एमएसपी में बढ़ोतरी और राज्य से बेहतर वित्तीय सहायता की माँग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि चीनी का एमएसपी फरवरी 2019 से नहीं बदला है, जिससे मिलें उन्हें उचित मूल्य नहीं दे पा रहीं।
किसानों की चीनी एमएसपी को लेकर क्या माँग है?
किसान चाहते हैं कि केंद्र सरकार चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य ₹31 प्रति किलो से बढ़ाकर ₹60 प्रति किलो करे, या ₹6,000 प्रति क्विंटल का एमएसपी तय करे। उनका तर्क है कि फरवरी 2019 के बाद से यह दर नहीं बदली है और मौजूदा कीमतों में मिलें किसानों को अधिक भुगतान करने में असमर्थ हैं।
किसान नेता गणेश इलिगर ने 'छठी गारंटी' की माँग क्यों की?
किसान नेता गणेश इलिगर ने कहा कि यदि राज्य सरकार अपनी मौजूदा गारंटी योजनाओं के लिए कर्ज ले सकती है, तो गन्ना किसानों के लिए भी एक अलग 'छठी गारंटी' घोषित की जानी चाहिए। यह बयान मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के उस बयान के जवाब में आया, जिसमें उन्होंने राज्य के खजाने में धन की कमी का हवाला दिया था।
इस आंदोलन में सरकार की क्या भूमिका है?
प्रभारी मंत्री सतीश जारकीहोली और अतिरिक्त डीसी की अध्यक्षता में बेलगावी डीसी दफ्तर में एक बैठक प्रस्तावित है। बैठक के नतीजे इस आंदोलन की अगली दिशा तय करेंगे; किसान नेताओं ने स्पष्ट किया है कि ठोस लिखित आश्वासन के बिना प्रदर्शन जारी रहेगा।
बेलगावी के किसानों पर इस विवाद का क्या असर पड़ेगा?
बेलगावी सहित उत्तरी कर्नाटक के कई जिलों में गन्ना प्रमुख नकदी फसल है। यदि 2026-27 के पेराई सीज़न में उचित मूल्य नहीं मिला, तो हजारों किसान परिवारों की सालाना आय पर सीधा असर पड़ेगा, खासकर जब उर्वरक, मजदूरी और सिंचाई की लागत पहले से ही बढ़ चुकी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. 3 दिन पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 2 सप्ताह पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले