8 अगस्त 2026
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कोलार आम उत्पादकों का बंद: ₹8,000–10,000/टन MSP की माँग, कुमारस्वामी ने केंद्र से मदद का दिया भरोसा

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कोलार आम उत्पादकों का बंद: ₹8,000–10,000/टन MSP की माँग, कुमारस्वामी ने केंद्र से मदद का दिया भरोसा

सारांश

कोलार में आम की कीमत ₹3,000–4,000/टन तक गिरने से नाराज़ किसानों ने सोमवार को जिलेव्यापी बंद किया और ₹10/किलो MSP की माँग रखी। केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने कृषि मंत्री को पत्र लिखने और पिछले साल जैसी मदद दोहराने का भरोसा दिलाया, लेकिन कर्नाटक सरकार की ओर से केंद्र को अभी तक कोई आधिकारिक सूचना नहीं भेजी गई है।

मुख्य बातें

कोलार जिले में 22 जून 2026 को आम उत्पादकों ने जिलेव्यापी बंद किया; श्रीनिवासपुर में लगभग पूर्ण बंद रहा।
बाज़ार में आम की कीमत ₹3,000–4,000 प्रति टन — किसान ₹8,000–10,000 प्रति टन MSP की माँग कर रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री एच.डी.
कुमारस्वामी ने केंद्रीय कृषि मंत्री को पत्र लिखा; प्रह्लाद जोशी ने भी पत्र लिखा।
कर्नाटक सरकार ने अभी तक केंद्र को इस संकट पर कोई आधिकारिक सूचना नहीं भेजी।
JDS सांसद मल्लेश बाबू ने कहा — कृषि मंत्री के नई दिल्ली लौटने पर MSP घोषणा की उम्मीद।
आंध्र प्रदेश ने आम उत्पादकों के लिए पहले ही सहायता उपाय घोषित किए हैं।

कर्नाटक के कोलार जिले में 22 जून 2026 (सोमवार) को आम उत्पादक किसानों ने जिलेव्यापी बंद का आयोजन किया, जब बाज़ार में आम की कीमत गिरकर ₹3,000–4,000 प्रति टन तक आ गई — जो उत्पादन लागत से काफी कम है। किसानों की मुख्य माँग है कि सरकार ₹8,000–10,000 प्रति टन का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) घोषित करे।

मुख्य घटनाक्रम

आम उत्पादक संघ और कई किसान संगठनों के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने कोलार और श्रीनिवासपुर तालुक सहित जिले के विभिन्न हिस्सों में सुबह से ही विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। किसानों ने सड़कें जाम कीं और कम कीमतों के विरोध में सड़कों पर आम फेंके। श्रीनिवासपुर शहर में लगभग पूर्ण बंद रहा — दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। जिले के कुछ हिस्सों में आरटीसी बस सेवाएँ भी बाधित रहीं।

किसानों की माँगें और शिकायतें

प्रदर्शनकारी किसानों के अनुसार, बाज़ार में आम की मौजूदा कीमत ₹3,000–4,000 प्रति टन है, जो उत्पादन लागत से बहुत कम है, जिससे उन्हें भारी नुकसान हो रहा है। किसानों ने माँग की है कि सरकार ₹8,000–10,000 प्रति टन — यानी ₹10 प्रति किलोग्राम — का समर्थन मूल्य तय करे। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले सीज़न में भी इसी तरह का नुकसान हुआ था और सरकार के बाज़ार में हस्तक्षेप न करने के कारण इस साल भी वही स्थिति उत्पन्न हो गई है।

केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी की प्रतिक्रिया

केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने किसानों को आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार इस मामले को प्राथमिकता पर लेगी। उन्होंने कहा, "मैंने कोलार में आम उत्पादकों की समस्याओं के बारे में केंद्रीय कृषि मंत्री को पत्र लिखा है। मंत्री पिछले पाँच दिनों से भोपाल में हैं। मुझे मिली जानकारी के अनुसार, केंद्र को अभी तक इस मुद्दे पर कर्नाटक सरकार से कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी पत्र लिखा है।"

कुमारस्वामी ने कोलार और रामनगर के आम उत्पादकों से अपील की कि वे चिंता न करें। उन्होंने कहा, "पिछली बार केंद्र सरकार ने अच्छा-खासा मुआवज़ा दिया था और इस साल भी वैसी ही मदद दी जाएगी।" यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक सरकार ने अभी तक केंद्र को इस संकट पर कोई आधिकारिक सूचना नहीं भेजी है।

सांसद मल्लेश बाबू का बयान

कोलार से जनता दल (सेक्युलर) [JDS] के सांसद मल्लेश बाबू ने विरोध स्थल पर पहुँचकर किसानों का समर्थन किया। उन्होंने कहा, "हमने सरकार से आम के लिए सपोर्ट प्राइस घोषित करने की माँग पहले ही कर दी है। केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी और मैंने मिलकर यह मामला केंद्र सरकार के सामने उठाया है। प्रक्रिया में देरी इसलिए हुई है क्योंकि केंद्रीय कृषि मंत्री भोपाल गए हुए हैं। हमें उम्मीद है कि उनके नई दिल्ली लौटने पर सपोर्ट प्राइस के बारे में घोषणा कर दी जाएगी।"

मल्लेश बाबू ने यह भी बताया कि आंध्र प्रदेश ने आम उत्पादक किसानों के लिए पहले ही सहायता उपाय घोषित कर दिए हैं और उन्हें उम्मीद है कि केंद्र व कर्नाटक सरकार भी राज्य के किसानों को वैसी ही मदद देंगी। गौरतलब है कि पिछले साल भी कुमारस्वामी के हस्तक्षेप के बाद समर्थन मूल्य की घोषणा की गई थी।

आगे क्या होगा

केंद्रीय कृषि मंत्री के नई दिल्ली लौटने के बाद समर्थन मूल्य की घोषणा की उम्मीद जताई जा रही है। किसान संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि शीघ्र राहत नहीं मिली तो आंदोलन और तेज़ किया जाएगा। यह संकट कर्नाटक के आम उत्पादक क्षेत्रों में कृषि नीति की खामियों को एक बार फिर उजागर करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और तब भी राहत तभी मिली जब आंदोलन हुआ। यह एक चिंताजनक पैटर्न है: MSP की माँग हर साल उठती है, राजनेता पत्र लिखते हैं, और राहत तदर्थ आधार पर मिलती है — कोई स्थायी नीति नहीं बनती। सबसे उल्लेखनीय तथ्य यह है कि कर्नाटक सरकार ने अभी तक केंद्र को आधिकारिक सूचना तक नहीं भेजी, जबकि किसान सड़कों पर आम फेंक रहे हैं। आंध्र प्रदेश के त्वरित हस्तक्षेप की तुलना में यह विफलता और भी स्पष्ट दिखती है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलार में आम उत्पादकों ने बंद क्यों किया?
कोलार के आम उत्पादकों ने 22 जून 2026 को बंद इसलिए किया क्योंकि बाज़ार में आम की कीमत गिरकर ₹3,000–4,000 प्रति टन रह गई है, जो उत्पादन लागत से काफी कम है। किसान सरकार से ₹8,000–10,000 प्रति टन का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) घोषित करने की माँग कर रहे हैं।
कुमारस्वामी ने आम किसानों को क्या भरोसा दिलाया?
केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री को पत्र लिखा है और केंद्र सरकार पिछले साल की तरह इस साल भी आम उत्पादकों को मुआवज़ा और सहायता देगी। उन्होंने कोलार और रामनगर के किसानों से चिंता न करने की अपील की।
आम के लिए किसान कितने MSP की माँग कर रहे हैं?
किसान ₹8,000–10,000 प्रति टन यानी ₹10 प्रति किलोग्राम के समर्थन मूल्य की माँग कर रहे हैं। मौजूदा बाज़ार भाव ₹3,000–4,000 प्रति टन है, जो माँगे गए MSP से लगभग आधा है।
कोलार बंद का आम जनजीवन पर क्या असर पड़ा?
बंद के दौरान श्रीनिवासपुर शहर में लगभग पूर्ण बंद रहा — दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। जिले के कुछ हिस्सों में आरटीसी बस सेवाएँ भी बाधित रहीं और किसानों ने सड़कों पर आम फेंककर विरोध जताया।
आम MSP की घोषणा कब होने की उम्मीद है?
JDS सांसद मल्लेश बाबू के अनुसार, केंद्रीय कृषि मंत्री के नई दिल्ली लौटने के बाद समर्थन मूल्य की घोषणा होने की उम्मीद है। मंत्री उस समय भोपाल में थे, जिससे प्रक्रिया में देरी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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