कर्नाटक के आम किसानों को राहत: कुमारस्वामी की माँग पर कृषि मंत्री चौहान का आश्वासन, MIS और PDPS सहायता पर जल्द फैसला
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 24 जून 2026 को नई दिल्ली में कर्नाटक के आम उत्पादक किसानों की संकटग्रस्त स्थिति पर शीघ्र राहत उपाय लागू करने का आश्वासन दिया। प्रतिकूल मौसम और बाज़ार में आम की कीमतों में भारी गिरावट के चलते राज्य के हज़ारों किसान गंभीर आर्थिक दबाव में हैं। केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने इस मुद्दे को सीधे कृषि मंत्री के समक्ष उठाया।
बैठक में क्या हुआ
कुमारस्वामी ने बुधवार को नई दिल्ली में कृषि मंत्री चौहान से मुलाकात कर कर्नाटक के आम किसानों की समस्याओं पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने केंद्र सरकार से मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (MIS) के तहत सहायता और प्राइस डेफिशिएंसी पेमेंट स्कीम (PDPS) के माध्यम से मूल्य समर्थन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। गौरतलब है कि कृषि मंत्री चौहान इससे पहले भी कुमारस्वामी के पत्र के ज़रिये इस मुद्दे पर संज्ञान ले चुके थे।
किसानों की स्थिति कितनी गंभीर
कुमारस्वामी ने बताया कि कोलार, चिक्काबल्लापुर, रामनगर, बेंगलुरु ग्रामीण, तुमकुरु और हावेरी समेत कई ज़िलों के किसान आम की गिरती कीमतों से बुरी तरह प्रभावित हैं। कर्नाटक में लगभग 1.45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में आम की खेती होती है और मौजूदा सीज़न में करीब 10 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का अनुमान है। बाज़ार में अत्यधिक आपूर्ति और कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण किसान अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर हैं।
लागत और बाज़ार भाव का अंतर
कर्नाटक कृषि मूल्य आयोग के अनुसार आम की खेती की C-3 लागत ₹3,951 प्रति क्विंटल आंकी गई है, जबकि मौजूदा बाज़ार भाव इससे काफी कम हैं। सिंचाई, मज़दूरी और तुड़ाई पर भारी खर्च के बावजूद किसानों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और बागवानी क्षेत्र पर जलवायु संबंधी दबाव भी तेज़ हो रहा है।
सरकार की प्रतिक्रिया
कृषि मंत्री चौहान ने कुमारस्वामी की अपील पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आम उत्पादकों के हित में जल्द निर्णय लिया जाएगा और राहत संबंधी उपायों की घोषणा शीघ्र की जाएगी। कुमारस्वामी ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि जल्द ही किसानों के हित में समर्थन मूल्य जैसी व्यवस्था पर फैसला लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार मूल्य अस्थिरता और जलवायु संबंधी चुनौतियों से किसानों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
आगे क्या होगा
केंद्र सरकार के MIS और PDPS के तहत हस्तक्षेप की घोषणा का किसान संगठन और बागवानी क्षेत्र बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। यह देखना अहम होगा कि राहत उपाय कितनी जल्दी ज़मीन पर उतरते हैं, क्योंकि आम का सीज़न सीमित समय का होता है और देरी से सहायता का असर काफी कम हो जाता है।