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कर्नाटक आम उत्पादकों के संकट पर कुमारस्वामी ने शिवराज को लिखा पत्र, PDPS सहायता की मांग

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कर्नाटक आम उत्पादकों के संकट पर कुमारस्वामी ने शिवराज को लिखा पत्र, PDPS सहायता की मांग

सारांश

कर्नाटक में आम की कीमतें लागत ₹3,951 प्रति क्विंटल से नीचे जा चुकी हैं और 1.45 लाख हेक्टेयर में फैली खेती संकट में है। कुमारस्वामी ने शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर PDPS के तहत तत्काल राहत की मांग की है — बागवानी किसानों की आय बचाने की सीधी गुहार।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री एच.डी.
कुमारस्वामी ने 17 जून 2026 को कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर कर्नाटक के आम किसानों के लिए PDPS सहायता की मांग की।
आम की खेती की लागत ₹3,951 प्रति क्विंटल (कॉस्ट सी-3) है, जबकि मौजूदा बाजार भाव इससे कम हैं।
कर्नाटक में लगभग 1.45 लाख हेक्टेयर में आम की खेती; इस सीजन 10 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का अनुमान।
प्रभावित जिलों में कोलार, चिक्कबल्लापुर, रामनगर, बेंगलुरु ग्रामीण, धारवाड़, तुमकुरु और हावेरी शामिल हैं।
कुमारस्वामी ने केंद्र से कर्नाटक सरकार के साथ समन्वय कर प्रशासनिक प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने का आग्रह किया।

केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने 17 जून 2026 को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर कर्नाटक के आम उत्पादक किसानों को प्राइस डेफिशिएंसी पेमेंट स्कीम (PDPS) के तहत मार्केट इंटरवेंशन स्कीम के माध्यम से तत्काल सहायता देने का आग्रह किया है। कीमतों में भारी गिरावट और अधिक उत्पादन के कारण राज्य के हजारों बागवान परिवार गंभीर आर्थिक संकट में हैं।

संकट की जड़: कीमतें लागत से नीचे

कर्नाटक कृषि मूल्य आयोग के अनुमान के अनुसार आम की खेती की कॉस्ट सी-3 लगभग ₹3,951 प्रति क्विंटल आंकी गई है, जबकि मौजूदा बाजार भाव इससे काफी नीचे चल रहे हैं। इसका सीधा अर्थ है कि सिंचाई, श्रम और कटाई पर भारी निवेश करने वाले किसान प्रत्येक क्विंटल पर घाटा उठा रहे हैं। वर्ष 2026-27 के मौजूदा सीजन में अधिक आपूर्ति और बढ़ती खेती लागत ने यह संकट और गहरा कर दिया है।

कर्नाटक में आम की खेती का दायरा

कुमारस्वामी ने अपने पत्र में रेखांकित किया कि कर्नाटक देश के प्रमुख आम उत्पादक राज्यों में शामिल है, जहाँ लगभग 1.45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में आम की खेती होती है। मौजूदा सीजन में करीब 10 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का अनुमान है। कोलार, चिक्कबल्लापुर, रामनगर, बेंगलुरु ग्रामीण, धारवाड़, तुमकुरु और हावेरी जैसे जिलों में हजारों किसान परिवार अपनी आजीविका के लिए बागवानी — विशेष रूप से आम की खेती — पर निर्भर हैं।

PDPS से क्या मिलेगी राहत

कुमारस्वामी ने पत्र में तर्क दिया कि PDPS के तहत सहायता मिलने से बाजार मूल्य और लाभकारी मूल्य के बीच की खाई पाटी जा सकेगी और किसानों की आय की सुरक्षा सुनिश्चित होगी — साथ ही बाजार व्यवस्था भी अप्रभावित रहेगी। उन्होंने विशेष रूप से कोलार जैसे बागवानी-आधारित जिलों का उल्लेख किया, जहाँ किसानों को इस योजना से सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है।

केंद्र से समन्वय की अपील

कुमारस्वामी ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि वह कर्नाटक सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर इस प्रस्ताव पर शीघ्र विचार करे और आम उत्पादकों को PDPS के तहत उचित सहायता प्रदान करने के लिए आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए। उन्होंने किसानों और बागवानी क्षेत्र के व्यापक हित को देखते हुए इस मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की अपील की है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में बागवानी फसलों की मूल्य अस्थिरता एक बड़ी नीतिगत चुनौती बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि पूर्वानुमानित। PDPS एक उपयोगी उपकरण है, लेकिन यह तभी सक्रिय होता है जब संकट गहरा चुका हो। गौरतलब है कि कर्नाटक जैसे प्रमुख बागवानी राज्यों में हर साल अधिक उत्पादन और मूल्य गिरावट की यह कहानी दोहराई जाती है, फिर भी दीर्घकालिक कोल्ड-चेन अवसंरचना और निर्यात लिंकेज पर नीतिगत प्रगति सीमित रही है। असली सवाल यह है कि PDPS एक तात्कालिक राहत है या एक स्थायी नीति — और इसका जवाब अभी तक किसी भी सरकार ने स्पष्ट नहीं किया है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुमारस्वामी ने शिवराज सिंह चौहान को पत्र क्यों लिखा?
केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कर्नाटक के आम उत्पादकों को बाजार में कीमतों की भारी गिरावट और अधिक उत्पादन से हो रहे आर्थिक नुकसान से राहत दिलाने के लिए यह पत्र लिखा। उन्होंने PDPS के तहत मार्केट इंटरवेंशन स्कीम के माध्यम से किसानों को सहायता देने का आग्रह किया है।
PDPS यानी प्राइस डेफिशिएंसी पेमेंट स्कीम क्या है?
PDPS एक केंद्रीय योजना है जिसके तहत जब किसी फसल का बाजार भाव लाभकारी मूल्य से नीचे चला जाता है, तो सरकार किसानों को उस अंतर की भरपाई सीधे भुगतान के रूप में करती है। इससे बाजार में हस्तक्षेप किए बिना किसानों की आय सुरक्षित रखी जा सकती है।
कर्नाटक में आम की खेती कितने क्षेत्र में होती है और इस सीजन कितना उत्पादन है?
कर्नाटक में लगभग 1.45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में आम की खेती होती है। वर्ष 2026-27 के मौजूदा सीजन में करीब 10 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का अनुमान लगाया गया है।
आम उत्पादकों की खेती की लागत कितनी है और बाजार भाव क्या है?
कर्नाटक कृषि मूल्य आयोग के अनुसार आम की खेती की कॉस्ट सी-3 लगभग ₹3,951 प्रति क्विंटल है, जबकि मौजूदा बाजार भाव इससे कम हैं। इस कारण किसानों को प्रति क्विंटल घाटा उठाना पड़ रहा है।
कर्नाटक के कौन-से जिले इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित हैं?
कोलार, चिक्कबल्लापुर, रामनगर, बेंगलुरु ग्रामीण, धारवाड़, तुमकुरु और हावेरी जिलों के हजारों किसान परिवार इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित हैं। ये जिले बागवानी और आम की खेती पर आजीविका के लिए निर्भर हैं।
राष्ट्र प्रेस
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