17 सितंबर 2026
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'खोज-ए-ब्रज' प्रोजेक्ट के लिए कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में एमओयू, मुरली मनोहर जोशी ने 'मोहन भागवत' पुस्तक का विमोचन किया

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'खोज-ए-ब्रज' प्रोजेक्ट के लिए कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में एमओयू, मुरली मनोहर जोशी ने 'मोहन भागवत' पुस्तक का विमोचन किया

सारांश

नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में 'खोज-ए-ब्रज' प्रोजेक्ट के लिए एमओयू साइन हुआ — ब्रज क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत, प्राचीन साहित्य और पुरातत्व के संरक्षण की दिशा में एक संस्थागत कदम। BJP के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने इसे जनभागीदारी से संचालित शोध का आदर्श उदाहरण बताया।

मुख्य बातें

कॉन्स्टिट्यूशन क्लब, नई दिल्ली में 17 सितंबर 2026 को 'खोज-ए-ब्रज' प्रोजेक्ट के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।
BJP के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी मुख्य अतिथि रहे और उन्होंने 'मोहन भागवत' पुस्तक का विमोचन किया।
प्रोजेक्ट का लक्ष्य ब्रज क्षेत्र के इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व का शोध, संरक्षण और संवर्धन करना है।
जोशी ने कहा कि ऐसे शोध कार्य सरकारों के बजाय संस्थाओं और शोधकर्ताओं के माध्यम से होते हैं।
एमओयू के बाद ब्रज क्षेत्र में शीघ्र ही फील्ड रिसर्च और दस्तावेजीकरण शुरू किया जाएगा।

नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में 17 सितंबर 2026 को 'खोज-ए-ब्रज' प्रोजेक्ट के लिए एक महत्वपूर्ण एमओयू (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर किए गए। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी इस अवसर पर मुख्य अतिथि रहे और उन्होंने 'मोहन भागवत' नामक पुस्तक का विमोचन भी किया। इस कार्यक्रम में इतिहासकार, शोधार्थी और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

खोज-ए-ब्रज प्रोजेक्ट का उद्देश्य

'खोज-ए-ब्रज' प्रोजेक्ट का मुख्य लक्ष्य ब्रज क्षेत्र के इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व का विस्तृत अध्ययन, संरक्षण और संवर्धन करना है। इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत ब्रज इलाके के प्राचीन ग्रंथों, साहित्य और सांस्कृतिक धरोहरों पर व्यापक शोध किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को अपने इतिहास और विरासत की गहरी समझ प्रदान करना है।

मुरली मनोहर जोशी का संबोधन

कार्यक्रम में मुरली मनोहर जोशी ने इस सांस्कृतिक पहल की भरपूर सराहना की। उन्होंने कहा, 'यह बहुत अच्छा कार्यक्रम है। ऐसा जरूर होना चाहिए। हमारे देश में अभी भी ऐसे कई महत्वपूर्ण संस्थानों के बारे में लोगों को पता नहीं है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हम देश की विरासत के बारे में बहुत कम जानते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि देश के महापुरुषों के बारे में जागरूकता सीमित है, लेकिन ऐसे संस्थान इस कमी को दूर कर सकते हैं।

जोशी ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे शोध कार्य मुख्यतः संस्थाओं और शोधकर्ताओं के सामूहिक प्रयासों से ही संभव होते हैं। उन्होंने कहा, 'दुनिया भर में इस तरह के ज़्यादातर काम ऐसी संस्थाओं के माध्यम से होते हैं, सरकारें ये गतिविधियाँ नहीं करतीं, लोग योगदान करते हैं और शोधकर्ता इस कार्य को अंजाम देते हैं।'

ब्रज की सांस्कृतिक अहमियत

वरिष्ठ नेता जोशी ने ज़ोर देकर कहा कि भारत की सांस्कृतिक जड़ों को समझने के लिए ब्रज क्षेत्र का अध्ययन अत्यंत आवश्यक है। उनके अनुसार ब्रज केवल धार्मिक महत्व का स्थल नहीं, बल्कि साहित्य, संगीत और कला का भी ऐतिहासिक केंद्र रहा है। ऐसे में 'खोज-ए-ब्रज' जैसी परियोजना इस विरासत को आगे की पीढ़ियों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

अन्य वक्ताओं की प्रतिक्रिया

भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष कुंवर बासित अली ने कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों की जनसेवा की प्रशंसा करते हुए कहा, 'जिस तरह से पीएम मोदी ने 25 साल जनसेवा और देश व राज्यों की सेवा में बिताए हैं, ऐसा लगता है जैसे कोई फरिश्ता काम कर रहा हो।' उन्होंने गरीब कल्याण, महिला उत्थान और बुनियादी ढाँचे के विकास का विशेष उल्लेख किया।

आगे की योजना

आयोजकों ने बताया कि एमओयू पर हस्ताक्षर के बाद शीघ्र ही ब्रज क्षेत्र में फील्ड रिसर्च और दस्तावेजीकरण का कार्य प्रारंभ किया जाएगा। गौरतलब है कि यह प्रोजेक्ट ऐसे समय में आया है जब देश में सांस्कृतिक विरासत संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। शोधकर्ताओं और इतिहासकारों की सक्रिय भागीदारी से यह परियोजना एक दीर्घकालिक शैक्षणिक संसाधन बनने की दिशा में आगे बढ़ेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी — फील्ड रिसर्च, दस्तावेजीकरण और शोध के नतीजे सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराए जाते हैं या नहीं, यह देखना होगा। जोशी का यह कहना सटीक है कि ऐसे कार्य सरकारी तंत्र के बजाय संस्थाओं द्वारा बेहतर होते हैं, लेकिन इसके लिए पारदर्शी वित्तपोषण और स्वायत्त शोध ढाँचा ज़रूरी है। ब्रज क्षेत्र की विरासत विशाल और बहुआयामी है — धार्मिक, साहित्यिक और सांगीतिक — जिसका अकादमिक दस्तावेजीकरण अब तक अपेक्षा के अनुरूप नहीं हुआ है। यह एमओयू उस कमी को दूर करने की शुरुआत हो सकता है, बशर्ते शोध परिणाम केवल आयोजनों तक सीमित न रहें।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'खोज-ए-ब्रज' प्रोजेक्ट क्या है?
'खोज-ए-ब्रज' एक सांस्कृतिक शोध परियोजना है जिसका उद्देश्य ब्रज क्षेत्र के इतिहास, पुरातत्व, प्राचीन साहित्य और सांस्कृतिक धरोहरों का अध्ययन, संरक्षण और संवर्धन करना है। इसके लिए 17 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।
कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में एमओयू किसने साइन किया और कार्यक्रम में कौन मौजूद था?
17 सितंबर 2026 को 'खोज-ए-ब्रज' प्रोजेक्ट के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर हुए, जिसमें BJP के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम में इतिहासकार, शोधार्थी और सांस्कृतिक क्षेत्र के कई गणमान्य लोग भी उपस्थित थे।
मुरली मनोहर जोशी ने कौन सी पुस्तक का विमोचन किया?
BJP के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने इस कार्यक्रम में 'मोहन भागवत' नामक पुस्तक का विमोचन किया। यह विमोचन 'खोज-ए-ब्रज' एमओयू साइनिंग कार्यक्रम के दौरान ही हुआ।
ब्रज क्षेत्र के शोध के लिए आगे क्या होगा?
एमओयू पर हस्ताक्षर के बाद आयोजकों ने बताया कि शीघ्र ही ब्रज क्षेत्र में फील्ड रिसर्च और दस्तावेजीकरण का कार्य शुरू किया जाएगा। इस परियोजना के तहत प्राचीन ग्रंथों और सांस्कृतिक धरोहरों पर विस्तृत शोध किया जाएगा ताकि नई पीढ़ी को अपनी विरासत से परिचित कराया जा सके।
मुरली मनोहर जोशी ने 'खोज-ए-ब्रज' के बारे में क्या कहा?
जोशी ने इस पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि देश की विरासत और महापुरुषों के बारे में जागरूकता बेहद कम है, और ऐसी संस्थाएँ इस कमी को दूर कर सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया भर में इस तरह के शोध कार्य सरकारों के बजाय संस्थाओं और शोधकर्ताओं के माध्यम से होते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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