15 जुलाई 2026
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दिल्ली में 'ओल्ड क्लोथ्स डोनेशन प्रोजेक्ट' लॉन्च: 10 मेट्रो स्टेशनों पर 'अर्पण' केंद्र, DMRC और दिल्ली सरकार का MoU

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दिल्ली में 'ओल्ड क्लोथ्स डोनेशन प्रोजेक्ट' लॉन्च: 10 मेट्रो स्टेशनों पर 'अर्पण' केंद्र, DMRC और दिल्ली सरकार का MoU

सारांश

दिल्ली में पुराने कपड़ों को लैंडफिल से बचाने की नई पहल — DMRC के 10 मेट्रो स्टेशनों पर 'अर्पण' केंद्र खुलेंगे, जहाँ SHG महिलाएं कपड़ों को उपयोगी उत्पादों में बदलेंगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की उपस्थिति में हुए MoU से पर्यावरण, रोज़गार और सर्कुलर इकोनॉमी तीनों को साधने की कोशिश।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की उपस्थिति में 14 जुलाई 2026 को DMRC और दिल्ली सरकार के बीच 'ओल्ड क्लोथ्स डोनेशन प्रोजेक्ट' के लिए MoU पर हस्ताक्षर हुए।
दिल्ली मेट्रो के 10 स्टेशनों पर 'अर्पण' नाम से कपड़ा-संग्रह केंद्र स्थापित होंगे; समय सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक।
एकत्रित कपड़ों को तीन श्रेणियों में बाँटा जाएगा — अपसाइक्लिंग, रीसाइक्लिंग और धार्मिक सामग्री का सम्मानपूर्वक पुनः उपयोग।
स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाएं केंद्रों का संचालन करेंगी और उन्हें अपसाइक्लिंग-रीसाइक्लिंग का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
क्लोथ्स बॉक्स फाउंडेशन और रेस्पन छंटाई व पुनर्चक्रण प्रक्रिया का संचालन करेंगे।
भविष्य में इस पहल का विस्तार पूरे दिल्ली में किए जाने की योजना है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की उपस्थिति में 14 जुलाई 2026 को दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) और डीएमआरसी लेडीज वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन (DLWO) ने दिल्ली सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत राजधानी में 'ओल्ड क्लोथ्स डोनेशन प्रोजेक्ट' की शुरुआत की गई है। इस पहल का लक्ष्य पुराने और अनुपयोगी कपड़ों को लैंडफिल में जाने से रोककर सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देना है।

समझौते में कौन-कौन शामिल

यह MoU DMRC और DLWO ने दिल्ली सरकार के स्टेट अर्बन लाइवलीहुड मिशन तथा वस्त्र पुनर्चक्रण से जुड़ी संस्थाओं — क्लोथ्स बॉक्स फाउंडेशन और रेस्पन — के साथ मिलकर किया। समारोह में DMRC के प्रबंध निदेशक विकास कुमार और सभी सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

'अर्पण' केंद्र: कहाँ और कैसे करें दान

परियोजना के पहले चरण में 'अर्पण' नाम से कपड़ा-संग्रह केंद्र दिल्ली मेट्रो के 10 स्टेशनों पर स्थापित किए जाएंगे। इनमें शाहदरा, डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल, मालवीय नगर, हौज खास, द्वारका, मोहन एस्टेट, लाजपत नगर, मयूर विहार फेज-1, पंजाबी बाग वेस्ट और शालीमार बाग मेट्रो स्टेशन शामिल हैं। नागरिक सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक यहाँ अपने पुराने कपड़े दान कर सकेंगे। इन केंद्रों पर रीसाइक्लिंग और अपसाइक्लिंग से तैयार उत्पादों की बिक्री के लिए कियोस्क भी लगाए जाएंगे।

कपड़ों की छंटाई और पुनर्उपयोग की प्रक्रिया

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि एकत्रित कपड़ों को तीन श्रेणियों में बाँटा जाएगा। पहली श्रेणी में वे कपड़े होंगे जिन्हें स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाएं बैग, सजावटी सामान और अन्य उपयोगी वस्तुओं में परिवर्तित करेंगी। दूसरी श्रेणी के आंशिक रूप से खराब कपड़ों को रीसाइक्लिंग के ज़रिए कच्चे माल में बदला जाएगा। तीसरी श्रेणी में धार्मिक अनुष्ठानों में इस्तेमाल हुए कपड़ों और पवित्र सामग्री का सम्मानपूर्वक पुनः उपयोग किया जाएगा, ताकि लोगों की भावनाओं का सम्मान बना रहे।

महिला सशक्तिकरण और रोज़गार पर ज़ोर

सरकारी बयान के अनुसार, इन संग्रह केंद्रों का संचालन स्टेट अर्बन लाइवलीहुड मिशन से जुड़ी SHG महिलाएं करेंगी, जिन्हें अपसाइक्लिंग और रीसाइक्लिंग का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। दान किए गए कपड़ों का एक हिस्सा उन्हें अपसाइक्लिंग के लिए भी उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। क्लोथ्स बॉक्स फाउंडेशन और रेस्पन छंटाई, रीसाइक्लिंग और अपसाइक्लिंग की पूरी प्रक्रिया का संचालन करेंगे।

आगे का रोडमैप

मुख्यमंत्री गुप्ता ने स्पष्ट किया कि फिलहाल 10 अर्पण केंद्र शुरू किए जा रहे हैं, लेकिन भविष्य में इस पहल का विस्तार पूरे दिल्ली में किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार टूटी-फूटी मूर्तियों, प्लास्टिक कचरे और अन्य प्रकार के कचरे के लिए भी अलग वैज्ञानिक समाधान विकसित कर रही है। गौरतलब है कि यह पहल ऐसे समय में आई है जब दिल्ली में ठोस कचरा प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बना हुआ है और लैंडफिल साइटें क्षमता से अधिक भरी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी सफलता पूरी तरह क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी — दिल्ली में इससे पहले भी कई 'ग्रीन इनिशिएटिव' घोषणाएं हुई हैं जो ज़मीन पर टिक नहीं पाईं। SHG महिलाओं को प्रशिक्षण और बाज़ार तक पहुँच सुनिश्चित करना असली परीक्षा होगी, क्योंकि अपसाइक्लिंग उत्पादों की माँग बिना विपणन रणनीति के सीमित रहती है। साथ ही, केवल 10 मेट्रो स्टेशन दिल्ली की विशाल आबादी और कपड़ा-कचरे की मात्रा के सामने प्रतीकात्मक ही लगते हैं — जब तक विस्तार की ठोस समयसीमा सार्वजनिक नहीं होती।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'ओल्ड क्लोथ्स डोनेशन प्रोजेक्ट' क्या है?
यह दिल्ली सरकार, DMRC और DLWO की संयुक्त पहल है, जिसके तहत नागरिक दिल्ली मेट्रो के 10 स्टेशनों पर स्थापित 'अर्पण' केंद्रों में पुराने कपड़े दान कर सकते हैं। एकत्रित कपड़ों को रीसाइक्लिंग और अपसाइक्लिंग के ज़रिए नए उत्पादों में बदला जाएगा।
अर्पण केंद्र किन मेट्रो स्टेशनों पर खुलेंगे?
पहले चरण में शाहदरा, डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल, मालवीय नगर, हौज खास, द्वारका, मोहन एस्टेट, लाजपत नगर, मयूर विहार फेज-1, पंजाबी बाग वेस्ट और शालीमार बाग मेट्रो स्टेशनों पर ये केंद्र शुरू होंगे। यहाँ सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक कपड़े दान किए जा सकेंगे।
दान किए गए कपड़ों का क्या होगा?
कपड़ों को तीन श्रेणियों में बाँटा जाएगा — अच्छी स्थिति वाले कपड़ों को SHG महिलाएं बैग व सजावटी सामान में बदलेंगी, आंशिक रूप से खराब कपड़ों को रीसाइक्लिंग कर कच्चा माल बनाया जाएगा, और धार्मिक सामग्री का सम्मानपूर्वक पुनः उपयोग किया जाएगा।
इस परियोजना से महिलाओं को क्या फायदा होगा?
स्टेट अर्बन लाइवलीहुड मिशन से जुड़ी स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाएं इन केंद्रों का संचालन करेंगी और उन्हें अपसाइक्लिंग-रीसाइक्लिंग का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। दान किए गए कपड़ों का एक हिस्सा उन्हें उत्पाद बनाने के लिए भी मिलेगा, जिससे आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
क्या भविष्य में यह परियोजना और मेट्रो स्टेशनों पर भी शुरू होगी?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि फिलहाल 10 अर्पण केंद्र शुरू किए जा रहे हैं, लेकिन भविष्य में इस पहल का विस्तार पूरे दिल्ली में किया जाएगा। विस्तार की कोई निश्चित समयसीमा अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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