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पीएम-उदय योजना: दिल्ली CM रेखा गुप्ता ने केंद्र से माँगे ₹100 करोड़, 45 लाख निवासियों को मिलेगा फायदा

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पीएम-उदय योजना: दिल्ली CM रेखा गुप्ता ने केंद्र से माँगे ₹100 करोड़, 45 लाख निवासियों को मिलेगा फायदा

सारांश

दिल्ली CM रेखा गुप्ता ने पीएम-उदय योजना के पहले चरण के लिए केंद्र से ₹100 करोड़ माँगे हैं। संशोधित नीति के तहत 1,531 अनधिकृत कॉलोनियाँ 'जैसी हैं, वैसी हैं' के आधार पर नियमित होंगी और 45 लाख निवासियों को कानूनी मालिकाना हक मिलने की उम्मीद है।

मुख्य बातें

दिल्ली CM रेखा गुप्ता ने 12 जुलाई 2026 को केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल को पत्र लिखकर पीएम-उदय के पहले चरण के लिए ₹100 करोड़ की माँग की।
संशोधित योजना के तहत 1,531 अनधिकृत कॉलोनियाँ बिना लेआउट प्लान की पूर्व-मंज़ूरी के 'जैसी हैं, वैसी हैं' आधार पर नियमित होंगी।
DDA का जीआईएस सर्वे 7 दिनों में, कमियों का निराकरण 15 दिनों में और कन्वेयंस डीड 45 दिनों के भीतर जारी होगी।
दिल्ली की 1,731 अनधिकृत कॉलोनियों में से 511 को तत्काल नियमित करने के लिए चुना गया है।
45 लाख से अधिक निवासियों को कानूनी स्वामित्व, बिक्री अधिकार और बैंक ऋण की सुविधा मिलने की उम्मीद।
सैनिक फार्म सहित 60 से अधिक संपन्न कॉलोनियों को भी नियमित करने पर विचार, हालाँकि शुल्क-ढाँचा अभी अनिर्धारित।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 12 जुलाई 2026 को केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल को पत्र लिखकर 'प्रधानमंत्री अनधिकृत कॉलोनी आवास अधिकार योजना' (पीएम-उदय) के संशोधित स्वरूप को लागू करने के पहले चरण में ₹100 करोड़ की केंद्रीय वित्तीय सहायता की माँग की है। यह अनुरोध ऐसे समय में आया है जब दिल्ली की 1,731 अनधिकृत कॉलोनियों में बसे 45 लाख से अधिक निवासी दशकों से कानूनी मालिकाना हक की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

पीएम-उदय योजना क्या है और इसमें क्या बदला

पीएम-उदय केंद्र सरकार की वह योजना है जो दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले निवासियों को कानूनी स्वामित्व अधिकार और संपत्ति हस्तांतरण का अधिकार देती है। संशोधित ढाँचे के तहत अब 'जैसी हैं, वैसी हैं' के आधार पर कॉलोनियों को नियमित किया जाएगा — यानी पहले की तरह लेआउट प्लान की पूर्व-स्वीकृति अनिवार्य नहीं होगी।

इस बदलाव से जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी, वसीयत या बिक्री समझौते के ज़रिये रखी गई संपत्तियों को भी कानूनी रूप से रजिस्टर्ड स्वामित्व विलेख में बदला जा सकेगा। योग्य निवासी अब अपनी संपत्ति कानूनी तरीके से बेच सकेंगे और उसके बदले बैंक ऋण भी प्राप्त कर सकेंगे।

मुख्यमंत्री की माँग और पत्र की पृष्ठभूमि

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अप्रैल में केंद्र के संशोधित नीति-निर्णय का स्वागत किया था। उन्होंने तब कहा था कि नए ढाँचे के अंतर्गत 1,531 अनधिकृत कॉलोनियों को बिना लेआउट प्लान की मंज़ूरी के नियमित किया जा सकेगा और इन कॉलोनियों के सभी प्लॉट व इमारतों को आवासीय संपत्ति माना जाएगा।

उन्होंने यह भी घोषणा की थी कि राजस्व अधिकारियों द्वारा संयुक्त सर्वे तय समय-सीमा में पूरे किए जाएँगे। योजना के अनुसार, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) का जीआईएस सर्वे 7 दिनों में, कमियों का निराकरण 15 दिनों में और कन्वेयंस डीड (स्वामित्व हस्तांतरण विलेख) 45 दिनों के भीतर जारी किए जाएँगे।

केंद्र का रुख और अप्रैल की घोषणा

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने अप्रैल में 1,511 अनधिकृत कॉलोनियों को 'जैसी हैं, वैसी हैं' के आधार पर नियमित करने की घोषणा करते हुए मंजूरशुदा लेआउट प्लान की पुरानी अनिवार्यता समाप्त की थी। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि सैनिक फार्म और अनंत राम डेयरी समेत 60 से अधिक संपन्न अनधिकृत कॉलोनियों को भी नियमित करने पर विचार किया जाएगा, हालाँकि उनके निवासियों को अधिक शुल्क देना होगा। उन शुल्कों का ढाँचा और समय-सीमा अभी तय नहीं की गई है।

गौरतलब है कि दिल्ली की 1,731 अनधिकृत कॉलोनियों में से 511 को तत्काल नियमित करने के लिए चुना गया था।

आम जनता पर असर

ये अनधिकृत कॉलोनियाँ पिछले तीन-चार दशकों में कृषि भूमि पर बसी थीं — राष्ट्रीय राजधानी में किफायती आवास की कमी और तीव्र शहरी विस्तार इसकी मुख्य वजह रहे। संशोधित नीति से 45 लाख से अधिक निवासियों को कानूनी सुरक्षा मिलने की उम्मीद है, जो अब तक अनिश्चित कब्ज़े में जीवन गुज़ार रहे थे।

₹100 करोड़ की वित्तीय सहायता मिलने पर पहले चरण का क्रियान्वयन शुरू हो सकेगा। यह अनुरोध स्वीकार होता है या नहीं, यह केंद्र-राज्य समन्वय की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

45 दिन में कन्वेयंस डीड — लेकिन दिल्ली की नौकरशाही की पुरानी धीमी गति को देखते हुए इन पर संदेह स्वाभाविक है। 45 लाख निवासियों का दाँव ऊँचा है, और जब तक शुल्क-ढाँचा और सत्यापन-तंत्र स्पष्ट नहीं होते, तब तक 60 संपन्न कॉलोनियों के नियमितीकरण का प्रश्न राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना रहेगा।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम-उदय योजना क्या है और यह दिल्ली में किसके लिए है?
पीएम-उदय यानी 'प्रधानमंत्री अनधिकृत कॉलोनी आवास अधिकार योजना' केंद्र सरकार की वह पहल है जो दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले निवासियों को कानूनी मालिकाना हक और संपत्ति हस्तांतरण का अधिकार देती है। इससे वे अपनी संपत्ति कानूनी तरीके से बेच सकते हैं और बैंक ऋण भी प्राप्त कर सकते हैं।
CM रेखा गुप्ता ने केंद्र से ₹100 करोड़ क्यों माँगे हैं?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पीएम-उदय के संशोधित स्वरूप को पहले चरण में प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए यह राशि माँगी है। बिना केंद्रीय वित्तीय सहायता के सर्वे, दस्तावेज़ीकरण और कन्वेयंस डीड जारी करने की प्रक्रिया शुरू करना कठिन होगा।
'जैसी हैं, वैसी हैं' नीति का क्या मतलब है?
इस नीति के तहत अनधिकृत कॉलोनियों को उनकी मौजूदा स्थिति में नियमित किया जाएगा — बिना पहले की अनिवार्य शर्त के कि लेआउट प्लान पहले से स्वीकृत हो। इससे 1,531 कॉलोनियों के निवासियों को तुरंत लाभ मिल सकता है।
कन्वेयंस डीड और सर्वे के लिए क्या समय-सीमा तय की गई है?
योजना के अनुसार DDA का जीआईएस सर्वे 7 दिनों में पूरा होगा, कमियों का निराकरण अगले 15 दिनों में और कन्वेयंस डीड 45 दिनों के भीतर जारी की जाएगी। राजस्व अधिकारियों द्वारा संयुक्त सर्वे भी तय समय में कराए जाएँगे।
सैनिक फार्म जैसी संपन्न कॉलोनियों का क्या होगा?
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने संकेत दिया है कि सैनिक फार्म और अनंत राम डेयरी समेत 60 से अधिक संपन्न अनधिकृत कॉलोनियों को भी नियमित करने पर विचार किया जाएगा। हालाँकि, इनके निवासियों को अधिक शुल्क देना होगा और शुल्क-ढाँचे की विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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