दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों का महत्वपूर्ण नियमितीकरण: रेखा गुप्ता ने केंद्र सरकार को धन्यवाद दिया
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली की 1,511 अनधिकृत कॉलोनियों का नियमितीकरण हुआ है।
- केंद्र सरकार ने इसके लिए मंजूर लेआउट प्लान की शर्तें हटाई हैं।
- ₹800 करोड़ का विशेष प्रावधान इन बस्तियों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए किया गया है।
- यह निर्णय 45 लाख प्रवासी निवासियों को राहत प्रदान करेगा।
- मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस निर्णय पर केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया।
नई दिल्ली, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने मंगलवार को घोषणा की कि दिल्ली की 1,511 अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित किया जाएगा, जिससे 45 लाख से अधिक प्रवासी निवासियों को राहत मिलेगी। इसके साथ ही, इन बस्तियों के लिए मंजूर लेआउट प्लान की आवश्यकताओं को भी समाप्त कर दिया गया है। इस ऐतिहासिक निर्णय पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने केंद्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।
दिल्ली के मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में दिल्ली सरकार की कैबिनेट ने राजधानी की 1511 अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने के इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए केंद्र सरकार का दिल से धन्यवाद दिया। मंगलवार को दिल्ली सचिवालय में आयोजित बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल सहित केंद्र सरकार के नेतृत्व के प्रति सर्वसम्मति से आभार व्यक्त किया गया।"
सीएमओ ने मुख्यमंत्री के हवाले से आगे लिखा, "यह निर्णय लाखों परिवारों के जीवन में नई आशा और सम्मान लेकर आया है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में ₹800 करोड़ का विशेष प्रावधान किया गया है, जिससे इन कॉलोनियों के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाएगा और विकास को गति मिलेगी।"
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने बताया कि यह निर्णय दिल्ली के निवासियों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है और यह दिन 45 लाख प्रवासी निवासियों के लिए राहत लेकर आया है, जो बिना योजना वाली कॉलोनियों में रहते हैं। ये कॉलोनियां पिछले तीन-चार दशकों से शहर की बढ़ती जनसंख्या के लिए किफायती आवास की कमी के कारण खेती की जमीन पर और भवन नियमों का उल्लंघन करके बसी हैं।
मनोहर लाल ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने 2019 में 'प्रधानमंत्री-दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में आवास अधिकार योजना' (पीएम-उदय) की शुरुआत की थी, ताकि इन कॉलोनियों के निवासियों को मालिकाना हक मिल सके। हालांकि, मंजूर लेआउट प्लान की कमी के कारण इस प्रक्रिया में गति कम थी।