मध्य प्रदेश में मूंग खरीद का संकट: कमलनाथ ने CM मोहन यादव को लिखा पत्र, 2% खरीद पर जताई चिंता
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 28 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर मध्य प्रदेश में मूंग खरीद की बेहद धीमी रफ्तार पर गहरी चिंता व्यक्त की है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 16 जुलाई तक राज्य में तय कोटे की मात्र 2 प्रतिशत मूंग की सरकारी खरीद हो पाई है, जिससे किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम दाम पर फसल बेचने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
क्या है पूरा मामला
केंद्र सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए मध्य प्रदेश से 4.54 लाख मीट्रिक टन मूंग खरीद का कोटा निर्धारित किया है। यह देश की कुल मूंग खरीद का 87 प्रतिशत है — एक आँकड़ा जो इस बात की पुष्टि करता है कि मध्य प्रदेश देश का सबसे बड़ा मूंग उत्पादक राज्य है। बावजूद इसके, मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, 16 जुलाई तक इस विशाल कोटे में से केवल 2 प्रतिशत की ही खरीद हो सकी।
कमलनाथ ने अपने पत्र में लिखा कि जब केंद्र ने राज्य के लिए इतना बड़ा कोटा तय किया है, तो राज्य सरकार खरीद प्रक्रिया में इतनी देरी क्यों कर रही है। उन्होंने इसे किसानों के साथ सरासर अन्याय करार दिया।
किसानों का बढ़ता आक्रोश
न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद में देरी और कथित अनियमितताओं के चलते हरदा, बैतूल सहित कई जिलों के किसान विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं। किसानों का यह आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। मजबूरी में किसान खुले बाज़ार में औने-पौने दामों पर मूंग बेच रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ रहा है।
गौरतलब है कि मूंग एक खरीफ फसल है जिसकी कटाई के बाद किसानों के पास भंडारण की सीमित क्षमता होती है। ऐसे में खरीद में देरी उन्हें बाज़ार के दबाव में बिक्री के लिए मजबूर करती है।
कमलनाथ की माँग
कमलनाथ ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से माँग की है कि मूंग खरीद की प्रक्रिया तत्काल तेज की जाए और संबंधित अधिकारियों को इस दिशा में स्पष्ट आदेश दिए जाएँ। उन्होंने कहा कि किसानों के संकट का समाधान सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
राजनीतिक आयाम
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) इस मुद्दे को पूरे ज़ोर से उठा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार किसानों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का दावा करती रही है। आलोचकों का कहना है कि MSP पर खरीद में इस स्तर की चूक राज्य सरकार की प्रशासनिक क्षमता पर सवाल खड़े करती है।
आगे क्या होगा
यदि राज्य सरकार खरीद प्रक्रिया में तेज़ी नहीं लाती, तो किसान आंदोलन और तेज़ होने की आशंका है। कांग्रेस के इस मुद्दे को राजनीतिक मंच पर उठाने से राज्य सरकार पर दबाव बढ़ेगा। फिलहाल मुख्यमंत्री मोहन यादव की ओर से इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।