क्या कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ने पीएम मोदी को गन्ना किसानों के संकट पर पत्र लिखा?

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क्या कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ने पीएम मोदी को गन्ना किसानों के संकट पर पत्र लिखा?

सारांश

कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, जिसमें गन्ना किसानों के संकट को लेकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। क्या इस पत्र से किसानों की समस्याएं हल होंगी?

Key Takeaways

  • कर्नाटक के सीएम ने पीएम मोदी को पत्र लिखा है।
  • गन्ना किसानों का आंदोलन तेजी से बढ़ा है।
  • सरकार ने किसानों को वित्तीय राहत देने का निर्णय लिया है।
  • मुख्यमंत्री ने तीन प्रमुख मांगें की हैं।
  • स्थायी समाधान के लिए केंद्र सरकार का हस्तक्षेप आवश्यक है।

बेंगलुरु, 17 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर राज्य में गन्ना किसानों के आंदोलन और मूल्य संकट के बारे में अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से त्वरित हस्तक्षेप की अपील की है।

पत्र की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को कर्नाटक की जनता की ओर से शुभकामनाएं दीं और कहा कि उन्होंने 6 और 8 नवंबर 2025 को भेजे गए पत्रों में किसानों की स्थिति पर चर्चा की थी। साथ ही, उन्होंने प्रधानमंत्री से मुलाकात का अवसर मिलने के लिए आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि गन्ना किसानों का आंदोलन राज्य भर में तेज हो गया और इससे कानून-व्यवस्था पर खतरा मंडराने लगा। इस स्थिति को संभालने के लिए राज्य सरकार को त्वरित कदम उठाने पड़े। 7 नवंबर 2025 को उन्होंने किसान नेताओं और चीनी मिल मालिकों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बातचीत के बाद सरकार ने एक आदेश जारी किया, जिसके तहत किसानों को तात्कालिक वित्तीय सहायता देने का निर्णय लिया गया।

सीएम ने आगे बताया कि सरकार के आदेश के अनुसार, प्रति टन गन्ने पर 100 रुपए की अतिरिक्त राशि देने का निर्णय लिया गया। इसमें से 50 रुपए प्रति टन राज्य सरकार और 50 रुपए चीनी मिलें देंगी। इस निर्णय के बाद किसानों को 10.25 प्रतिशत रिकवरी पर 3,200 रुपए प्रति टन और 11.25 प्रतिशत रिकवरी पर 3,300 रुपए प्रति टन का शुद्ध मूल्य मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस हस्तक्षेप से तत्काल संकट काफी हद तक शांत हुआ और आंदोलन नियंत्रित हो गया।

हालांकि, उन्होंने कहा कि इस राहत के बावजूद समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। उनका कहना है कि मूल समस्या चीनी के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से संबंधित है, जो लंबे समय से 31 रुपए प्रति किलो पर स्थिर है। चीनी मिलें इस मूल्य पर किसानों को अधिक भुगतान नहीं कर पा रही हैं, जिससे संघर्ष जारी है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी से तीन प्रमुख मांगें दोहराईं। पहली मांग है कि चीनी के एमएसपी में तुरंत संशोधन किया जाए, जिससे मिलों को पर्याप्त तरलता उपलब्ध हो सके। दूसरी मांग यह है कि कर्नाटक की चीनी आधारित डिस्टिलरियों से एथनॉल की खरीद बढ़ाई जाए, ताकि मिलों को नियमित आय मिले। तीसरी मांग केंद्र सरकार से ऐसी अधिसूचना जारी करने की है, जिससे राज्यों को गन्ने का शुद्ध मूल्य तय करने का अधिकार मिले। इससे गन्ने की कटाई और ढुलाई की लागत किसानों पर बोझ नहीं बनेगी और एफआरपी व्यावहारिक रूप से लागू हो सकेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्नाटक सरकार ने ईमानदारी से अपने संसाधनों का उपयोग कर किसानों को राहत दी है, लेकिन स्थायी समाधान केवल केंद्र सरकार के हस्तक्षेप से ही संभव है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि प्रधानमंत्री इन मुद्दों पर शीघ्र निर्णय लेकर कर्नाटक के किसानों के लिए एक स्थायी और व्यावहारिक समाधान प्रदान करेंगे।

Point of View

जो कि एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। किसानों की स्थिति को लेकर सरकारों की जिम्मेदारी होती है, और इस मामले में केंद्र सरकार का हस्तक्षेप आवश्यक है। सभी पक्षों को मिलकर एक स्थायी समाधान निकालना चाहिए।
NationPress
06/02/2026

Frequently Asked Questions

कर्नाटक में गन्ना किसानों का आंदोलन क्यों हो रहा है?
गन्ना किसानों का आंदोलन मूल्य संकट और उचित मूल्य न मिलने के कारण हो रहा है।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने पीएम मोदी से क्या मांगा?
उन्होंने गन्ना किसानों के लिए एमएसपी में संशोधन और एथनॉल की खरीद बढ़ाने की मांग की।
क्या केंद्र सरकार ने इस पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
अभी तक केंद्र सरकार ने इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
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