कर्नाटक गन्ना किसान आंदोलन: ₹5,500 प्रति टन की मांग, मैसूरु-बेलगावी में जाम और 'जेल भरो'
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक में गन्ना किसानों ने 3 नवंबर 2026 को अपना राज्यव्यापी आंदोलन तेज़ कर दिया। मैसूरु में प्रदर्शनकारी किसानों ने डिप्टी कमिश्नर कार्यालय का घेराव करने की कोशिश की, जबकि बेलगावी में 'जेल भरो' आंदोलन शुरू हो गया। किसान ₹5,500 प्रति टन की खरीद कीमत और केंद्र सरकार द्वारा चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य ₹31 प्रति किलो से बढ़ाकर ₹60 प्रति किलो करने की माँग कर रहे हैं।
मैसूरु में घेराव की कोशिश, सड़क पर जमे किसान
मैसूरु में प्रदर्शनकारियों ने डिप्टी कमिश्नर कार्यालय का गेट खोलकर अंदर घुसने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद किसानों ने कार्यालय के बाहर सड़क जाम कर दी, पुलिस बैरिकेड्स को धकेला और खुद की बैरिकेडिंग लगाकर यातायात ठप कर दिया। किसान वहाँ डटे रहे और सड़क पर ही दोपहर का खाना पकाकर अपना विरोध जारी रखा।
बेलगावी में 'जेल भरो', हज़ारों किसान सड़कों पर
राज्य सरकार और चीनी मिलों द्वारा उचित खरीद मूल्य घोषित करने की समय-सीमा बीत जाने के बाद, कर्नाटक राज्य रैथा संघ और हसीरु सेना के बैनर तले हज़ारों किसानों ने बेलगावी में 'जेल भरो' आंदोलन छेड़ दिया। किसानों ने 'कैदी नंबर 5500' लिखी टी-शर्ट पहनकर गुरलापुर क्रॉस से हिंडलगा सेंट्रल जेल की ओर पदयात्रा की। इस दौरान पुलिस बैरिकेड्स पर कुछ देर के लिए झड़प भी हुई।
आंदोलन का नेतृत्व और किसानों की माँगें
इस आंदोलन का नेतृत्व राज्य किसान संघ के अध्यक्ष बडागालापुरा नागेंद्र और राज्य गन्ना उत्पादक संघ के अध्यक्ष कुरुबुरु शांतकुमार कर रहे हैं। नागेंद्र ने बताया कि 26 अक्टूबर को बेलगावी में हुई एक बैठक में सभी किसान संगठन एकजुट हुए थे और एक साझा लेटरहेड के ज़रिए सरकार के सामने माँगें रखने का फैसला किया गया।
किसानों की माँग है कि चीनी मिलें ₹4,500 प्रति टन का भुगतान करें और राज्य सरकार उसमें ₹1,000 प्रति टन जोड़े, जिससे कुल खरीद मूल्य ₹5,500 प्रति टन हो जाए। इसके अलावा, किसान 'फेयर एंड रेमुनरेटिव प्राइस' (FRP) के लिए बेस रिकवरी रेट को वापस 9.5 प्रतिशत करने, गन्ने के बकाये का 14 दिनों के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने और गन्ने की फसल के लिए बीमा कवर की भी माँग कर रहे हैं।
यातायात बाधित, कई राजमार्गों पर असर
इस आंदोलन की वजह से मैसूरु-ऊटी नेशनल हाईवे और पुणे-बेंगलुरु हाईवे समेत कई अहम मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ। बेलगावी, बागलकोट, विजयपुरा, धारवाड़ और हावेरी जिलों की सड़कों पर भी जाम की स्थिति बनी रही।
आगे क्या: 6 नवंबर को बेंगलुरु में बड़ा सम्मेलन
नागेंद्र ने चेतावनी दी है कि यदि राज्य सरकार ने माँगों को गंभीरता से नहीं लिया तो आंदोलन नया मोड़ ले सकता है। उन्होंने 6 नवंबर 2026 को बेंगलुरु में एक बड़े किसान सम्मेलन की घोषणा की है, जिसमें हज़ारों किसानों के भाग लेने की उम्मीद है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके बाद इस आंदोलन को हर गाँव तक ले जाया जाएगा। गौरतलब है कि नागेंद्र ने एक विशेष 'चीनी नीति' की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए कहा, 'हर साल किसानों को चीनी मिलों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इस मुद्दे का समाधान निकाला जाना चाहिए।'