3 नवंबर 2026
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कर्नाटक गन्ना किसान आंदोलन: ₹5,500 प्रति टन की मांग, मैसूरु-बेलगावी में जाम और 'जेल भरो'

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कर्नाटक गन्ना किसान आंदोलन: ₹5,500 प्रति टन की मांग, मैसूरु-बेलगावी में जाम और 'जेल भरो'

सारांश

कर्नाटक के गन्ना किसानों ने ₹5,500 प्रति टन की माँग को लेकर मैसूरु में DC कार्यालय घेराव और बेलगावी में 'जेल भरो' के साथ राज्यव्यापी आंदोलन को नई धार दी। 6 नवंबर को बेंगलुरु में बड़े सम्मेलन की घोषणा — और हर गाँव तक पहुँचाने की चेतावनी।

मुख्य बातें

कर्नाटक गन्ना किसानों ने 3 नवंबर 2026 को मैसूरु में डिप्टी कमिश्नर कार्यालय घेराव और बेलगावी में 'जेल भरो' आंदोलन चलाया।
किसान चीनी मिलों से ₹4,500 और राज्य सरकार से ₹1,000 जोड़कर कुल ₹5,500 प्रति टन खरीद मूल्य की माँग कर रहे हैं।
केंद्र सरकार से चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य ₹31 से बढ़ाकर ₹60 प्रति किलो करने की माँग।
FRP बेस रिकवरी रेट 9.5% करने, गन्ना बकाया 14 दिनों में चुकाने और फसल बीमा की भी माँग।
मैसूरु-ऊटी और पुणे-बेंगलुरु हाईवे समेत बेलगावी, बागलकोट, विजयपुरा, धारवाड़, हावेरी जिलों में यातायात प्रभावित।
6 नवंबर को बेंगलुरु में बड़े किसान सम्मेलन की घोषणा, इसके बाद हर गाँव तक आंदोलन ले जाने की चेतावनी।

कर्नाटक में गन्ना किसानों ने 3 नवंबर 2026 को अपना राज्यव्यापी आंदोलन तेज़ कर दिया। मैसूरु में प्रदर्शनकारी किसानों ने डिप्टी कमिश्नर कार्यालय का घेराव करने की कोशिश की, जबकि बेलगावी में 'जेल भरो' आंदोलन शुरू हो गया। किसान ₹5,500 प्रति टन की खरीद कीमत और केंद्र सरकार द्वारा चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य ₹31 प्रति किलो से बढ़ाकर ₹60 प्रति किलो करने की माँग कर रहे हैं।

मैसूरु में घेराव की कोशिश, सड़क पर जमे किसान

मैसूरु में प्रदर्शनकारियों ने डिप्टी कमिश्नर कार्यालय का गेट खोलकर अंदर घुसने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद किसानों ने कार्यालय के बाहर सड़क जाम कर दी, पुलिस बैरिकेड्स को धकेला और खुद की बैरिकेडिंग लगाकर यातायात ठप कर दिया। किसान वहाँ डटे रहे और सड़क पर ही दोपहर का खाना पकाकर अपना विरोध जारी रखा।

बेलगावी में 'जेल भरो', हज़ारों किसान सड़कों पर

राज्य सरकार और चीनी मिलों द्वारा उचित खरीद मूल्य घोषित करने की समय-सीमा बीत जाने के बाद, कर्नाटक राज्य रैथा संघ और हसीरु सेना के बैनर तले हज़ारों किसानों ने बेलगावी में 'जेल भरो' आंदोलन छेड़ दिया। किसानों ने 'कैदी नंबर 5500' लिखी टी-शर्ट पहनकर गुरलापुर क्रॉस से हिंडलगा सेंट्रल जेल की ओर पदयात्रा की। इस दौरान पुलिस बैरिकेड्स पर कुछ देर के लिए झड़प भी हुई।

आंदोलन का नेतृत्व और किसानों की माँगें

इस आंदोलन का नेतृत्व राज्य किसान संघ के अध्यक्ष बडागालापुरा नागेंद्र और राज्य गन्ना उत्पादक संघ के अध्यक्ष कुरुबुरु शांतकुमार कर रहे हैं। नागेंद्र ने बताया कि 26 अक्टूबर को बेलगावी में हुई एक बैठक में सभी किसान संगठन एकजुट हुए थे और एक साझा लेटरहेड के ज़रिए सरकार के सामने माँगें रखने का फैसला किया गया।

किसानों की माँग है कि चीनी मिलें ₹4,500 प्रति टन का भुगतान करें और राज्य सरकार उसमें ₹1,000 प्रति टन जोड़े, जिससे कुल खरीद मूल्य ₹5,500 प्रति टन हो जाए। इसके अलावा, किसान 'फेयर एंड रेमुनरेटिव प्राइस' (FRP) के लिए बेस रिकवरी रेट को वापस 9.5 प्रतिशत करने, गन्ने के बकाये का 14 दिनों के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने और गन्ने की फसल के लिए बीमा कवर की भी माँग कर रहे हैं।

यातायात बाधित, कई राजमार्गों पर असर

इस आंदोलन की वजह से मैसूरु-ऊटी नेशनल हाईवे और पुणे-बेंगलुरु हाईवे समेत कई अहम मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ। बेलगावी, बागलकोट, विजयपुरा, धारवाड़ और हावेरी जिलों की सड़कों पर भी जाम की स्थिति बनी रही।

आगे क्या: 6 नवंबर को बेंगलुरु में बड़ा सम्मेलन

नागेंद्र ने चेतावनी दी है कि यदि राज्य सरकार ने माँगों को गंभीरता से नहीं लिया तो आंदोलन नया मोड़ ले सकता है। उन्होंने 6 नवंबर 2026 को बेंगलुरु में एक बड़े किसान सम्मेलन की घोषणा की है, जिसमें हज़ारों किसानों के भाग लेने की उम्मीद है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके बाद इस आंदोलन को हर गाँव तक ले जाया जाएगा। गौरतलब है कि नागेंद्र ने एक विशेष 'चीनी नीति' की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए कहा, 'हर साल किसानों को चीनी मिलों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इस मुद्दे का समाधान निकाला जाना चाहिए।'

संपादकीय दृष्टिकोण

जो खुद किसान नेता बडागालापुरा नागेंद्र ने स्वीकार किया। असली सवाल यह है कि राज्य और केंद्र के बीच खरीद मूल्य की जिम्मेदारी की खींचतान में किसान हर बार क्यों पिसता है। चीनी उद्योग को सरकारी सब्सिडी और निर्यात प्रोत्साहन मिलते रहते हैं, लेकिन FRP और वास्तविक भुगतान के बीच की खाई बनी रहती है। जब तक 'चीनी नीति' में मिल भुगतान की बाध्यकारी समय-सीमा और स्वतंत्र निगरानी तंत्र नहीं जुड़ता, तब तक यह आंदोलन हर साल सुर्खियाँ बनाता रहेगा — बिना किसी ठोस नतीजे के।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक के गन्ना किसान क्या माँग कर रहे हैं?
किसान ₹5,500 प्रति टन की खरीद कीमत माँग रहे हैं — जिसमें चीनी मिलें ₹4,500 और राज्य सरकार ₹1,000 अतिरिक्त दे। इसके अलावा केंद्र सरकार से चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य ₹31 से बढ़ाकर ₹60 प्रति किलो करने, FRP बेस रिकवरी रेट 9.5% करने, 14 दिनों में बकाया चुकाने और फसल बीमा की भी माँग है।
'जेल भरो' आंदोलन क्या है और यह कहाँ हुआ?
बेलगावी में कर्नाटक राज्य रैथा संघ और हसीरु सेना के बैनर तले हज़ारों किसानों ने 3 नवंबर 2026 को 'जेल भरो' आंदोलन शुरू किया। 'कैदी नंबर 5500' लिखी टी-शर्ट पहने किसान गुरलापुर क्रॉस से हिंडलगा सेंट्रल जेल की ओर पदयात्रा करते हुए स्वेच्छा से गिरफ्तारी देने के प्रतीकात्मक विरोध में निकले।
आंदोलन की वजह से किन इलाकों में यातायात प्रभावित हुआ?
मैसूरु-ऊटी नेशनल हाईवे और पुणे-बेंगलुरु हाईवे पर यातायात ठप रहा। बेलगावी, बागलकोट, विजयपुरा, धारवाड़ और हावेरी जिलों की सड़कों पर भी आवाजाही प्रभावित हुई।
किसान नेताओं ने आगे क्या कार्रवाई की चेतावनी दी है?
राज्य किसान संघ के अध्यक्ष बडागालापुरा नागेंद्र ने 6 नवंबर 2026 को बेंगलुरु में बड़े किसान सम्मेलन की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार ने माँगें नहीं मानीं तो आंदोलन को हर गाँव तक ले जाया जाएगा।
किसानों की इन माँगों का आधार क्या है?
26 अक्टूबर 2026 को बेलगावी में हुई बैठक में सभी किसान संगठन एकजुट हुए थे और साझा लेटरहेड के ज़रिए सरकार के सामने माँगें रखने का फैसला लिया गया था। किसानों का तर्क है कि मौजूदा खरीद मूल्य उत्पादन लागत को कवर नहीं करता और हर साल मिलों से संघर्ष करना पड़ता है।
राष्ट्र प्रेस
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