एपीडा की पहल: हिमाचल का अनार और अरुणाचल की कीवी दुबई पहुँची, किसानों को घरेलू दाम से 50% अधिक मूल्य
सारांश
मुख्य बातें
कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) की मदद से भारत के दो राज्यों — हिमाचल प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश — के फलों की परीक्षण निर्यात खेप 3 नवंबर 2026 को दुबई के बाज़ार तक सफलतापूर्वक पहुँच गई है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने मंगलवार को एक आधिकारिक बयान में बताया कि इस पहल के तहत इस निर्यात में शामिल किसानों को घरेलू बाज़ार में प्रचलित कीमतों की तुलना में 50 प्रतिशत अधिक मूल्य प्राप्त हुआ।
निर्यात की मुख्य विवरण
मंत्रालय के बयान के अनुसार, हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले से सिंदूरी किस्म के 1.3 मीट्रिक टन अनार और अरुणाचल प्रदेश के जीरो क्षेत्र से 1.5 मीट्रिक टन कीवी की खेप संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दुबई भेजी गई। अनार की खेप में 2-2 किलोग्राम के 650 बॉक्स शामिल थे, जिनका निर्यात उत्तर प्रदेश स्थित अमामा एक्सपोर्ट्स ने किया।
अनार सीधे स्थानीय किसानों और भुंतर एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) से खरीदे गए, जो लगभग 600 किसानों से जुड़ा हुआ है। कुल्लू जिला बागवानी प्रशासन ने खरीद और समन्वय में सहायता प्रदान की।
सिंदूरी अनार की विशेषताएँ
सिंदूरी किस्म हिमाचल प्रदेश में उगाई जाने वाली अनार की प्रमुख किस्मों में से एक है। इसके अलावा राज्य में भगवा और कंधारी किस्मों की भी खेती होती है। आकर्षक लाल छिलके, रसीले दानों और मीठे-खट्टे स्वाद के लिए पहचाने जाने वाले सिंदूरी अनार ताज़ा खपत के लिए उपयुक्त हैं और इनमें निर्यात बाज़ार की भी अच्छी संभावनाएँ हैं।
अरुणाचल की कीवी का 'लुलु हाइपरमार्केट' में प्रदर्शन
अरुणाचल प्रदेश से भेजी गई 1.5 मीट्रिक टन कीवी की परीक्षण खेप दुबई के अल कुसैस स्थित लुलु हाइपरमार्केट में प्रदर्शित की गई। यह पहल पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (एमडीओएनईआर) के तहत 'कीवी: अरुणाचल प्रदेश की यूएसपी' ब्रांडिंग अभियान के अंतर्गत शुरू की गई है।
अरुणाचल के ऊँचाई वाले क्षेत्रों की जलवायु कीवी की खेती के लिए अनुकूल है और यहाँ मुख्यतः हेवर्ड, मोंटी, एलिसन और ब्रूनो किस्मों की खेती की जाती है। इनमें हेवर्ड किस्म की अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में विशेष माँग है।
किसानों पर असर और आगे की राह
यह पहल इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि प्रत्यक्ष खरीद और एफपीओ के माध्यम से सामूहिक भागीदारी से किसानों को बेहतर मूल्य मिल सकता है। गौरतलब है कि इस निर्यात में शामिल किसानों को घरेलू बाज़ार दर की तुलना में 50 प्रतिशत अधिक मूल्य प्राप्त हुआ — जो इस मॉडल की व्यावहारिक सफलता का प्रमाण है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार कृषि निर्यात को बढ़ाने और किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य पर ज़ोर दे रही है। परीक्षण निर्यात से मिलने वाली बाज़ार प्रतिक्रिया भविष्य में नियमित और बड़े पैमाने पर होने वाले निर्यात का मार्ग प्रशस्त करेगी। उम्मीद है कि इस अनुभव से अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों की ज़रूरतों की पहचान होगी और पूर्वोत्तर व पहाड़ी राज्यों के उत्पादकों के लिए नए आर्थिक अवसर खुलेंगे।