22 अक्टूबर 2026
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हिमाचल प्रदेश के सिंदूरी अनार दुबई पहुँचे, APEDA की मदद से कुल्लू से 1.3 मीट्रिक टन निर्यात

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हिमाचल प्रदेश के सिंदूरी अनार दुबई पहुँचे, APEDA की मदद से कुल्लू से 1.3 मीट्रिक टन निर्यात

सारांश

हिमाचल के कुल्लू से सिंदूरी अनार अब दुबई के बाज़ारों में — यह महज़ एक खेप नहीं, बल्कि भारत की उस रणनीति का हिस्सा है जो छोटे किसानों को सीधे अंतरराष्ट्रीय मंच पर लाना चाहती है। APEDA और FTA आउटरीच के ज़रिए मोदी सरकार 'मेड इन इंडिया' को खेत से विदेशी थाली तक पहुँचाने की कोशिश में है।

मुख्य बातें

पीयूष गोयल ने 22 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि कुल्लू (हिमाचल प्रदेश) से 1.3 मीट्रिक टन सिंदूरी अनार दुबई निर्यात किए गए।
निर्यात APEDA (कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण) के सहयोग से संपन्न हुआ।
इसी महीने APEDA ने हरियाणा के सोनीपत से कनाडा तक 24 मीट्रिक टन फ्रोज़न खाद्य उत्पाद भी भेजे।
गांधीनगर में एफटीए आउटरीच कार्यशाला में 200 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
सरकार देश भर में ऐसी और पहल आयोजित करने की योजना बना रही है।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 22 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के प्रसिद्ध सिंदूरी अनारों की पहली खेप दुबई के बाज़ार में सफलतापूर्वक पहुँच गई है। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के सहयोग से भेजी गई इस खेप में कुल 1.3 मीट्रिक टन सिंदूरी अनार शामिल हैं। मंत्री ने कहा कि यह पहल स्थानीय उपज को वैश्विक बाज़ारों से जोड़ने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है।

निर्यात का महत्व और पृष्ठभूमि

हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में उगाए जाने वाले सिंदूरी अनार अपनी विशिष्ट मिठास और रंग के लिए जाने जाते हैं। गोयल ने कहा, 'स्थानीय उपज को वैश्विक बाज़ारों से जोड़ने की यह पहल, किसानों की आय बढ़ाने और भारतीय कृषि निर्यात को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।' यह ऐसे समय में आया है जब सरकार कृषि निर्यात को विविधता देने और छोटे किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों से सीधे जोड़ने पर जोर दे रही है।

हरियाणा से कनाडा तक — APEDA की व्यापक भूमिका

दुबई निर्यात से पहले इसी महीने APEDA ने हरियाणा के सोनीपत से कनाडा तक 24 मीट्रिक टन फ्रोज़न खाद्य उत्पादों की खेप भेजने में भी सहायता की। किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के नेतृत्व में भेजी गई इस खेप में हरी मटर, मिश्रित सब्जियाँ, मटर-गाजर, स्वीट कॉर्न और समोसे जैसे उत्पाद शामिल थे। निर्यात इकाई को APEDA की वित्तीय सहायता योजना से मदद मिली, जो छोटे उत्पादकों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक पहुँचने में सक्षम बना रही है।

एफटीए आउटरीच और राज्यों की भूमिका

केंद्र सरकार की चल रही आउटरीच पहलों के तहत गांधीनगर में मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) का लाभ उठाने पर एक राज्य-स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें राज्य सरकार के अधिकारियों, निर्यात संवर्धन परिषदों और निर्यातकों सहित 200 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। गोयल ने गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की सराहना की, जिन्होंने स्थानीय व्यवसायों और निर्यातकों की भागीदारी बढ़ाने के प्रयास किए हैं। मंत्री ने कहा कि इससे भारत के कुल निर्यात में गुजरात की हिस्सेदारी और बढ़ेगी।

सरकार की व्यापक निर्यात रणनीति

गोयल ने जोर देते हुए कहा कि हाल के वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा किए गए कई एफटीए ने भारत के निर्यातकों के लिए नए अवसर खोले हैं। मोदी सरकार का लक्ष्य है कि इन समझौतों का फायदा किसानों, श्रमिकों, महिलाओं, युवाओं, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) और छोटे व्यवसायों तक पहुँचे। वाणिज्य विभाग इसके लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर विशेष एफटीए आउटरीच पहल आयोजित कर रहा है।

आगे की राह

गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत की स्थानीय व्यवसायों को निर्यात बाज़ारों की तलाश के लिए प्रोत्साहित करने वाले प्रयासों की भी मंत्री ने सराहना की। गोयल ने स्पष्ट किया कि देश भर में ऐसी और पहल आयोजित की जाएंगी, जिससे हर राज्य अपनी निर्यात क्षमता को पहचान सके, एफटीए का बेहतर उपयोग कर सके और भारत के समग्र निर्यात विकास को नई गति दे सके। सिंदूरी अनार की यह पहली सफल खेप हिमाचल के किसानों के लिए नए अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों के द्वार खोलने की शुरुआत मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह एकबारगी प्रचार-पहल है या एक स्थायी निर्यात श्रृंखला की नींव। APEDA की वित्तीय सहायता योजनाएँ अतीत में भी रही हैं, पर छोटे और पहाड़ी क्षेत्रों के किसानों तक उनकी पहुँच सीमित रही है। FTA आउटरीच कार्यशालाओं में 200 प्रतिभागी ठीक-ठाक संख्या है, लेकिन गुजरात और गोवा जैसे तटीय राज्यों की तुलना में हिमाचल जैसे भू-आबद्ध राज्यों के लिए लॉजिस्टिक्स और कोल्ड-चेन की चुनौतियाँ अलग और कहीं अधिक जटिल हैं — इन पर ध्यान देना ज़रूरी होगा।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिमाचल प्रदेश के सिंदूरी अनार का दुबई निर्यात कैसे हुआ?
APEDA (कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण) के सहयोग से कुल्लू के किसानों के 1.3 मीट्रिक टन सिंदूरी अनार दुबई भेजे गए। यह पहल स्थानीय उत्पादकों को वैश्विक बाज़ारों से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
APEDA ने हाल ही में और कौन-से कृषि निर्यात में मदद की है?
इसी महीने APEDA ने हरियाणा के सोनीपत से कनाडा तक किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के नेतृत्व में 24 मीट्रिक टन फ्रोज़न खाद्य उत्पादों की खेप भेजने में सहायता की। इसमें हरी मटर, मिश्रित सब्जियाँ, स्वीट कॉर्न और समोसे शामिल थे।
एफटीए आउटरीच कार्यशाला क्या है और यह किसानों को कैसे फायदा पहुँचाती है?
यह केंद्र सरकार के वाणिज्य विभाग द्वारा राज्य सरकारों के साथ मिलकर आयोजित विशेष कार्यशाला है, जिसमें निर्यातकों और अधिकारियों को मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) का लाभ उठाने की जानकारी दी जाती है। गांधीनगर में हाल ही में आयोजित ऐसी कार्यशाला में 200 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए।
इस निर्यात पहल से हिमाचल प्रदेश के किसानों को क्या फायदा होगा?
दुबई जैसे प्रीमियम बाज़ारों तक पहुँच से सिंदूरी अनार उत्पादकों को बेहतर मूल्य और स्थायी आमदनी मिल सकती है। पीयूष गोयल के अनुसार, यह पहल भारतीय कृषि निर्यात को नई ऊँचाइयों पर ले जाने और किसानों की आय बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
मोदी सरकार की एफटीए नीति का लक्ष्य क्या है?
मोदी सरकार का लक्ष्य है कि विभिन्न देशों के साथ किए गए मुक्त व्यापार समझौतों का फायदा किसानों, MSME, महिलाओं और युवाओं तक पहुँचे। वाणिज्य विभाग राज्यों के साथ मिलकर आउटरीच पहल चला रहा है ताकि हर राज्य अपनी निर्यात क्षमता पहचान सके।
राष्ट्र प्रेस
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