8 अगस्त 2026
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मिथिला मखाना का ऑस्ट्रेलिया निर्यात: पहली बार समुद्री मार्ग से 18 मीट्रिक टन भेजा, दरभंगा किसानों को 18% अधिक लाभ

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मिथिला मखाना का ऑस्ट्रेलिया निर्यात: पहली बार समुद्री मार्ग से 18 मीट्रिक टन भेजा, दरभंगा किसानों को 18% अधिक लाभ

सारांश

बिहार के जीआई टैग वाले मिथिला मखाना ने एक और वैश्विक छलांग लगाई — पहली बार समुद्री मार्ग से 18 मीट्रिक टन ऑस्ट्रेलिया पहुँचा। दरभंगा के किसानों को बाजार भाव से 18% अधिक मिला। कनाडा के बाद ऑस्ट्रेलिया — मखाना का वैश्विक सफर जारी है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने 8 अगस्त 2026 को बताया कि पहली बार बिहार से 18 मीट्रिक टन मिथिला मखाना समुद्री मार्ग से ऑस्ट्रेलिया निर्यात किया गया।
खेप सीधे दरभंगा के किसानों से खरीदी गई; उन्हें बाजार भाव से 18 प्रतिशत अधिक मूल्य प्राप्त हुआ।
निर्यात अपेडा (APEDA) के सहयोग से संपन्न हुआ; मखाना को जीआई (भौगोलिक संकेत) टैग प्राप्त है।
पिछले महीने दरभंगा से 7 मीट्रिक टन फ्लेवर्ड मखाना पहली बार कनाडा भेजा गया था, जिसमें किसानों को 50% से अधिक बेहतर मूल्य मिला था।
ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में बढ़ती माँग से मखाना प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन उद्योगों में निवेश बढ़ने की संभावना।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 8 अगस्त 2026 को जानकारी दी कि बिहार के जीआई (भौगोलिक संकेत) टैग प्राप्त मिथिला मखाना का पहली बार समुद्री मार्ग से ऑस्ट्रेलिया को 18 मीट्रिक टन निर्यात सफलतापूर्वक संपन्न हुआ है। यह खेप सीधे दरभंगा के किसानों से खरीदी गई, जिन्हें बाजार भाव की तुलना में लगभग 18 प्रतिशत अधिक मूल्य प्राप्त हुआ।

मुख्य घटनाक्रम

कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (अपेडा / APEDA) के सहयोग से यह निर्यात संभव हुआ। गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए कहा, "अपेडा के सहयोग से जीआई टैग वाले 18 मीट्रिक टन मिथिला मखाना को बिहार से ऑस्ट्रेलिया निर्यात किया गया।" यह कदम भारत की वैल्यू-एडेड कृषि उत्पाद निर्यात रणनीति को नई दिशा देता है।

किसानों पर असर

इस पहल से जुड़े दरभंगा के किसानों को बाजार भाव की तुलना में 18 प्रतिशत अधिक कीमत मिली, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय सुधार आया है। गोयल के अनुसार, मिथिला मखाना की बढ़ती वैश्विक माँग बिहार के कृषि क्षेत्र के लिए नए द्वार खोल रही है और राज्य के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में सहायक है।

पृष्ठभूमि: कनाडा निर्यात की सफलता के बाद अगला कदम

गौरतलब है कि पिछले महीने भी बिहार के मखाना उत्पादकों ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की थी — पहली बार दरभंगा से 7 मीट्रिक टन फ्लेवर्ड मखाना समुद्री मार्ग से कनाडा भेजा गया था। उस अवसर पर किसानों को पहले की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक बेहतर मूल्य मिला था। उस निर्यात को भी अपेडा ने सुगम बनाया था। ऑस्ट्रेलिया को हुआ यह नवीनतम निर्यात उसी सफलता की अगली कड़ी है।

मिथिला मखाना की वैश्विक पहचान

मिथिला क्षेत्र में उत्पादित मखाना अपनी गुणवत्ता और पोषण मूल्य के लिए जाना जाता है। जीआई टैग मिलने के बाद से इसे वैश्विक 'रेडी-टू-ईट' और स्वास्थ्यवर्धक खाद्य बाजार में तेज़ी से स्वीकृति मिल रही है। ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे विकसित देशों में इसकी बढ़ती माँग न केवल निर्यात आँकड़ों को बेहतर करेगी, बल्कि मखाना प्रसंस्करण, पैकेजिंग और मूल्य संवर्धन उद्योगों में निवेश को भी प्रोत्साहित करेगी।

क्या होगा आगे

विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री मार्ग से सफल निर्यात की यह श्रृंखला भारत की कृषि निर्यात नीति के लिए एक महत्वपूर्ण मॉडल बन सकती है। बिहार के मखाना किसानों की आय में वृद्धि के साथ-साथ राज्य के कृषि निर्यात को भी नई गति मिलने की उम्मीद है, बशर्ते आपूर्ति श्रृंखला और प्रसंस्करण क्षमता को और सुदृढ़ किया जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि किसान की आय बढ़ाने का व्यावहारिक उपकरण भी बन सकता है। लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या यह मॉडल दरभंगा के चुनिंदा किसानों से आगे बढ़कर पूरे मिथिला क्षेत्र तक पहुँच पाएगा। समुद्री मार्ग से निर्यात की लागत-क्षमता हवाई मार्ग की तुलना में अधिक टिकाऊ है, पर इसके लिए कोल्ड-चेन और प्रसंस्करण बुनियादी ढाँचे में गंभीर निवेश ज़रूरी है — जिसकी अभी कमी है। कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के बाद यदि यूरोप और खाड़ी देशों में भी यही रणनीति दोहराई गई, तो मखाना बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था का असली गेम-चेंजर बन सकता है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मिथिला मखाना का ऑस्ट्रेलिया निर्यात क्यों खास है?
यह पहली बार है जब बिहार से मिथिला मखाना समुद्री मार्ग से ऑस्ट्रेलिया भेजा गया है — 18 मीट्रिक टन की यह खेप जीआई टैग प्राप्त उत्पाद की बढ़ती वैश्विक स्वीकृति का प्रमाण है। समुद्री मार्ग से निर्यात हवाई मार्ग की तुलना में अधिक किफायती है, जिससे बड़े पैमाने पर व्यापार की संभावना बनती है।
दरभंगा के किसानों को इस निर्यात से कितना फायदा हुआ?
इस पहल से जुड़े दरभंगा के किसानों को बाजार भाव की तुलना में लगभग 18 प्रतिशत अधिक मूल्य प्राप्त हुआ, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। यह लाभ सीधी खरीद व्यवस्था और अपेडा के सहयोग से संभव हुआ।
अपेडा की इस निर्यात में क्या भूमिका रही?
कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (अपेडा) ने ऑस्ट्रेलिया और इससे पहले कनाडा को हुए मखाना निर्यात दोनों को सुगम बनाया। अपेडा ने किसानों और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के बीच संपर्क स्थापित करने के साथ-साथ निर्यात प्रक्रिया को सरल बनाया।
क्या इससे पहले भी मखाना का विदेश निर्यात हुआ था?
हाँ, पिछले महीने पहली बार दरभंगा से 7 मीट्रिक टन फ्लेवर्ड मखाना समुद्री मार्ग से कनाडा भेजा गया था। उस निर्यात में किसानों को पहले की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक बेहतर मूल्य मिला था। ऑस्ट्रेलिया को हुआ निर्यात उसी श्रृंखला की अगली कड़ी है।
मिथिला मखाना को जीआई टैग क्यों मिला है और इसका क्या महत्व है?
मिथिला मखाना को भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग इसलिए मिला है क्योंकि यह बिहार के मिथिला क्षेत्र में उत्पादित एक विशिष्ट गुणवत्ता और पोषण मूल्य वाला उत्पाद है। जीआई टैग इसे नकली उत्पादों से अलग पहचान देता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उच्च मूल्य दिलाने में सहायक होता है।
राष्ट्र प्रेस
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