8 अगस्त 2026
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भारत ने वित्त वर्ष 2026 में 20+ देशों को निर्यात किया 7,000 मीट्रिक टन मखाना, बिहार के किसानों को मिला 18% अधिक मूल्य

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भारत ने वित्त वर्ष 2026 में 20+ देशों को निर्यात किया 7,000 मीट्रिक टन मखाना, बिहार के किसानों को मिला 18% अधिक मूल्य

सारांश

वित्त वर्ष 2026 में भारत का मखाना निर्यात 20 से अधिक देशों तक पहुँचा और 7,000 मीट्रिक टन का आँकड़ा पार किया। ऑस्ट्रेलिया को जीआई टैग वाले मिथिला मखाना की पहली समुद्री खेप और किसानों को बाज़ार भाव से 18% अधिक मूल्य — बिहार के मखाना क्षेत्र के लिए यह वैश्विक छलाँग का संकेत है।

मुख्य बातें

भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में 20 से अधिक देशों को 7,000 मीट्रिक टन से ज़्यादा मखाना निर्यात किया।
बिहार देश के कुल मखाना उत्पादन का लगभग 85% हिस्सा उत्पन्न करता है।
केंद्र सरकार ने जुलाई 2025 से मखाने के लिए अलग एचएस कोड लागू किया, जिससे निर्यात निगरानी सुदृढ़ हुई।
एपीईडीए ने बिहटा (BIADA) से 18 मीट्रिक टन जीआई टैग मिथिला मखाना की पहली समुद्री खेप ऑस्ट्रेलिया भेजी।
निर्यात पहल से जुड़े किसानों को मौजूदा बाज़ार भाव से लगभग 18% अधिक कीमत मिली।
बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने फोरी समुदाय की पारंपरिक विशेषज्ञता को मखाना उद्योग की आधारशिला बताया।

भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में 20 से अधिक देशों को 7,000 मीट्रिक टन से ज़्यादा मखाना और उससे निर्मित वैल्यू-एडेड उत्पादों का निर्यात किया। वाणिज्य मंत्रालय ने 8 अगस्त 2026 को बताया कि अमेरिका, मध्य पूर्व और अफ्रीकी देशों सहित कई अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में भारतीय मखाने की माँग लगातार बढ़ रही है, जिससे बिहार के किसानों और मखाना उद्योग को सीधा लाभ मिल रहा है।

बिहार: भारत का मखाना उत्पादन केंद्र

भारत में मखाना उत्पादन का प्रमुख केंद्र बिहार है, जहाँ देश के कुल उत्पादन का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा पैदा होता है। मखाना क्षेत्र को सुदृढ़ करने और निर्यात को गति देने के लिए केंद्र सरकार ने जुलाई 2025 से मखाने के लिए एक अलग एचएस कोड लागू किया है। इस कदम से मखाना निर्यात की सटीक निगरानी संभव हुई है और वैश्विक बाज़ारों में इसकी अलग पहचान स्थापित हुई है।

मिथिला मखाना की पहली समुद्री खेप ऑस्ट्रेलिया रवाना

कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए / APEDA) ने बिहार से जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाना की पहली व्यावसायिक समुद्री खेप ऑस्ट्रेलिया भेजने में सहयोग किया। बिहार के बिहटा स्थित बीआईएडीए (BIADA) औद्योगिक क्षेत्र से 18 मीट्रिक टन मिथिला मखाना निर्यात किया गया, जो दरभंगा जिले के मखाना उत्पादक किसानों से खरीदा गया था।

वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, इस पहल से न केवल बिहार के प्रमुख जीआई उत्पाद की अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति मज़बूत होगी, बल्कि निर्यात-आधारित बाज़ारों तक पहुँच बढ़ने से किसानों की आय में भी सुधार होगा।

किसानों को मिला 18% अधिक मूल्य

सरकार के अनुसार, इस निर्यात पहल से जुड़े किसानों को मौजूदा बाज़ार भाव की तुलना में लगभग 18 प्रतिशत अधिक कीमत प्राप्त हुई। यह आँकड़ा दर्शाता है कि निर्यात-केंद्रित वैल्यू चेन और किसानों को सीधे वैश्विक बाज़ार से जोड़ने की रणनीति उनकी आय बढ़ाने में कारगर साबित हो रही है।

बिहार सरकार और फोरी समुदाय की भूमिका

बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि मखाना राज्य की पहचान है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बिहार-आधारित निर्यातकों की बढ़ती भागीदारी किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने में सहायक होगी। उन्होंने वैश्विक बाज़ारों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने पर ज़ोर दिया।

सिन्हा ने विशेष रूप से फोरी समुदाय का उल्लेख किया, जिनकी पारंपरिक कौशल और विशेषज्ञता मखाना प्रसंस्करण उद्योग की महत्वपूर्ण आधारशिला मानी जाती है। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार मखाना उत्पादकों, प्रसंस्करण इकाइयों और निर्यातकों को सहयोग देकर पूरी वैल्यू चेन को मज़बूत बनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं और आगे की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों की बढ़ती माँग के बीच मखाना भारतीय कृषि निर्यात का एक महत्वपूर्ण उत्पाद बनकर उभर रहा है। ऑस्ट्रेलिया जैसे नए बाज़ारों में पहुँच बनने से आने वाले समय में बिहार के मखाना उद्योग को और अधिक गति मिलने की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत कृषि निर्यात में विविधता लाने और उच्च-मूल्य वाले जीआई उत्पादों को वैश्विक पटल पर स्थापित करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या यह वृद्धि टिकाऊ है या महज़ एकबारगी उपलब्धि। जुलाई 2025 में लागू अलग एचएस कोड एक सकारात्मक नीतिगत कदम है, क्योंकि इससे पहले मखाना के निर्यात आँकड़े व्यापक श्रेणियों में दब जाते थे और सटीक मूल्यांकन मुश्किल था। किसानों को 18% अधिक मूल्य मिलना वैल्यू चेन की सफलता का संकेत है, परंतु यह लाभ अभी केवल निर्यात पहल से जुड़े किसानों तक सीमित है — बड़े पैमाने पर दरभंगा और मिथिलांचल के किसानों तक यह लाभ कब और कैसे पहुँचेगा, इसका स्पष्ट रोडमैप अभी सामने नहीं आया है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत ने वित्त वर्ष 2026 में कितने देशों को मखाना निर्यात किया?
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 20 से अधिक देशों को 7,000 मीट्रिक टन से ज़्यादा मखाना और वैल्यू-एडेड उत्पाद निर्यात किए। प्रमुख बाज़ारों में अमेरिका, मध्य पूर्व और अफ्रीकी देश शामिल हैं।
मिथिला मखाना को जीआई टैग क्यों मिला है और इसका क्या महत्व है?
मिथिला मखाना बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र की पारंपरिक उपज है और इसे भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग प्राप्त है, जो इसकी विशिष्ट उत्पत्ति और गुणवत्ता को प्रमाणित करता है। जीआई टैग से वैश्विक बाज़ारों में इसे प्रीमियम उत्पाद के रूप में विपणन करना आसान होता है और नकली उत्पादों से सुरक्षा मिलती है।
ऑस्ट्रेलिया को मिथिला मखाना की पहली समुद्री खेप कहाँ से भेजी गई?
यह खेप बिहार के बिहटा स्थित बीआईएडीए (BIADA) औद्योगिक क्षेत्र से भेजी गई और इसमें 18 मीट्रिक टन मिथिला मखाना शामिल था। मखाना दरभंगा जिले के उत्पादक किसानों से खरीदा गया था।
मखाना निर्यात से बिहार के किसानों को कितना अधिक मूल्य मिल रहा है?
सरकार के अनुसार, निर्यात पहल से जुड़े किसानों को मौजूदा बाज़ार भाव की तुलना में लगभग 18 प्रतिशत अधिक कीमत मिली है। यह वैल्यू चेन को मज़बूत करने और किसानों को सीधे निर्यात बाज़ार से जोड़ने की रणनीति का परिणाम बताया जा रहा है।
मखाने के लिए अलग एचएस कोड क्यों लागू किया गया?
केंद्र सरकार ने जुलाई 2025 से मखाने के लिए एक अलग एचएस (हार्मोनाइज़्ड सिस्टम) कोड लागू किया, ताकि निर्यात आँकड़ों की सटीक निगरानी हो सके और वैश्विक बाज़ारों में मखाना की स्वतंत्र पहचान स्थापित हो। इससे पहले मखाना अन्य कृषि उत्पादों की व्यापक श्रेणी में दर्ज होता था।
राष्ट्र प्रेस
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