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कृषि क्षेत्र का जीवीए एक दशक में दोगुना: ₹20.9 लाख करोड़ से बढ़कर ₹48.7 लाख करोड़ पहुँचा

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कृषि क्षेत्र का जीवीए एक दशक में दोगुना: ₹20.9 लाख करोड़ से बढ़कर ₹48.7 लाख करोड़ पहुँचा

सारांश

एक दशक में भारत का कृषि जीवीए ₹20.9 लाख करोड़ से ₹48.7 लाख करोड़ पर पहुँचा — 8.83% CAGR के साथ। खाद्यान्न उत्पादन 357.73 मिलियन टन के रिकॉर्ड पर, बागवानी 369 मिलियन टन और खाद्य तेल आयात निर्भरता में भी गिरावट। आँकड़े बड़े हैं, पर किसानों की आय पर असर की असली परीक्षा अभी बाकी है।

मुख्य बातें

भारत का कृषि और संबद्ध क्षेत्र जीवीए 2014-15 के ₹20.9 लाख करोड़ से बढ़कर 2023-24 में ₹48.7 लाख करोड़ पर पहुँचा — देश के कुल जीवीए का 18% ।
समीक्षा अवधि में मौजूदा कीमतों पर CAGR 8.83% ; फसल क्षेत्र का जीवीए अकेले ₹26.52 लाख करोड़ पर पहुँचा।
कुल खाद्यान्न उत्पादन 2024-25 में रिकॉर्ड 357.73 मिलियन टन ; चावल 150.18 मिलियन टन (+42%) और गेहूँ 117.94 मिलियन टन (+36%)।
बागवानी उत्पादन 280.70 से बढ़कर 369.05 मिलियन टन ; तिलहन उत्पादन में ~55% वृद्धि।
खाद्य तेल आयात निर्भरता 63.2% (2015-16) से घटकर 56.25% (2023-24) पर आई।
PMKSY , मृदा स्वास्थ्य कार्ड और राष्ट्रीय गोकुल मिशन को वृद्धि में योगदानकर्ता बताया गया।

भारत के कृषि और संबद्ध क्षेत्र का ग्रॉस वैल्यू एडेड (जीवीए) 2014-15 के ₹20.9 लाख करोड़ से बढ़कर 2023-24 में ₹48.7 लाख करोड़ पर पहुँच गया है — यानी एक दशक में दोगुने से भी अधिक की वृद्धि। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह आँकड़ा देश के कुल जीवीए का करीब 18 प्रतिशत है और इस वृद्धि के पीछे सरकारी निवेश में बढ़ोतरी तथा स्थिर नीतिगत ढाँचे को प्रमुख कारण बताया गया है।

मुख्य आँकड़े और वृद्धि दर

समीक्षा अवधि के दौरान कृषि क्षेत्र ने मौजूदा कीमतों पर 8.83 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्ज की। केवल फसल क्षेत्र का जीवीए 2014-15 के ₹12,92,874 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में ₹26,52,891 करोड़ हो गया। कुल खाद्यान्न उत्पादन 2013-14 के 265.05 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 357.73 मिलियन टन पर पहुँच गया, जिसमें चावल का रिकॉर्ड उत्पादन 150.18 मिलियन टन और गेहूँ का 117.94 मिलियन टन रहा — क्रमशः 42 प्रतिशत और 36 प्रतिशत की वृद्धि।

नीतिगत हस्तक्षेप और योजनाओं का योगदान

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) ने सिंचाई कवरेज का विस्तार किया और जल उपयोग दक्षता को बढ़ावा दिया। मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना ने वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन को सक्षम बनाया, जबकि राष्ट्रीय गोकुल मिशन ने स्वदेशी नस्लों और दुग्ध उत्पादन को समर्थन दिया। आधिकारिक बयान के अनुसार, MSP संचालन और खरीद प्रणालियों के विस्तार ने बाज़ार में स्थिरता सुनिश्चित की और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा उद्देश्यों को बल दिया।

गौरतलब है कि पिछले 12 वर्षों में नीतिगत फोकस कल्याणकारी सहायता से आगे बढ़कर उत्पादकता, आय सुरक्षा, बाज़ार पहुँच, बुनियादी ढाँचे और संस्थागत लचीलेपन को मज़बूत करने की ओर स्थानांतरित हुआ है।

बागवानी और तिलहन में प्रगति

बागवानी उत्पादन 2013-14 के 280.70 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 369.05 मिलियन टन हो गया है। यह विस्तार उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर विविधीकरण और बेहतर कृषि पद्धतियों का परिणाम बताया जा रहा है। तिलहन के अंतर्गत क्षेत्रफल में 18 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई, उत्पादन में करीब 55 प्रतिशत और उत्पादकता में 31 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

खाद्य तेल आयात पर निर्भरता 2015-16 के 63.2 प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 56.25 प्रतिशत हो गई, जो क्रमिक आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रगति का संकेत है।

डिजिटल और संस्थागत बदलाव

डिजिटल प्लेटफॉर्म, सहकारी समितियाँ, खाद्य प्रसंस्करण और जलवायु-लचीली पहलों ने कृषि मूल्य श्रृंखला में नए अवसर पैदा किए हैं। आधिकारिक बयान में इन्हें एक अधिक विविध, प्रौद्योगिकी-आधारित और किसान-केंद्रित कृषि प्रणाली की ओर क्रमिक बदलाव का प्रमाण बताया गया है।

आगे की राह

आँकड़े कृषि क्षेत्र की समग्र वृद्धि को रेखांकित करते हैं, लेकिन विशेषज्ञ यह भी देखेंगे कि क्या यह वृद्धि किसानों की वास्तविक आय में उसी अनुपात में परिलक्षित होती है। खाद्य तेल आयात निर्भरता में कमी और रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद, कृषि आय और शहरी आय के बीच की खाई को पाटना आने वाले वर्षों की सबसे बड़ी चुनौती बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह मुख्यतः मौजूदा कीमतों पर आधारित है — मुद्रास्फीति-समायोजित वास्तविक वृद्धि की तस्वीर अलग हो सकती है, जिसका उल्लेख आधिकारिक बयान में नहीं है। खाद्यान्न उत्पादन के रिकॉर्ड के बावजूद खाद्य तेल आयात निर्भरता में केवल 7 प्रतिशतांक की कमी एक दशक के लिए सीमित प्रगति दर्शाती है। सबसे बड़ा अनुत्तरित प्रश्न यह है कि क्या जीवीए वृद्धि किसान परिवारों की वास्तविक शुद्ध आय में परिलक्षित हुई है — क्योंकि उत्पादन और आय के बीच की खाई भारतीय कृषि की पुरानी विडंबना रही है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का कृषि जीवीए एक दशक में कितना बढ़ा?
आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, भारत का कृषि और संबद्ध क्षेत्र जीवीए 2014-15 के ₹20.9 लाख करोड़ से बढ़कर 2023-24 में ₹48.7 लाख करोड़ पर पहुँच गया — यानी दोगुने से भी अधिक। इस अवधि में CAGR 8.83% रही और यह देश के कुल जीवीए का करीब 18% है।
2024-25 में भारत का खाद्यान्न उत्पादन कितना रहा?
2024-25 में कुल खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड 357.73 मिलियन टन रहा। इसमें चावल का उत्पादन 150.18 मिलियन टन (42% वृद्धि) और गेहूँ का 117.94 मिलियन टन (36% वृद्धि) रहा, जबकि 2013-14 में कुल उत्पादन 265.05 मिलियन टन था।
भारत की खाद्य तेल आयात निर्भरता में कितनी कमी आई?
खाद्य तेल आयात निर्भरता 2015-16 के 63.2% से घटकर 2023-24 में 56.25% हो गई। इस दौरान तिलहन क्षेत्रफल में 18% से अधिक, उत्पादन में ~55% और उत्पादकता में ~31% की वृद्धि दर्ज की गई।
कृषि वृद्धि में किन सरकारी योजनाओं का योगदान रहा?
आधिकारिक बयान के अनुसार, PMKSY ने सिंचाई कवरेज और जल उपयोग दक्षता बढ़ाई, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना ने वैज्ञानिक पोषक प्रबंधन सक्षम किया और राष्ट्रीय गोकुल मिशन ने दुग्ध उत्पादन को समर्थन दिया। MSP और खरीद प्रणाली के विस्तार को भी बाज़ार स्थिरता का कारण बताया गया है।
बागवानी उत्पादन में क्या बदलाव आया?
बागवानी उत्पादन 2013-14 के 280.70 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 369.05 मिलियन टन हो गया। यह वृद्धि उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर विविधीकरण और बेहतर कृषि पद्धतियों को दर्शाती है।
राष्ट्र प्रेस
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