कृषि क्षेत्र का जीवीए एक दशक में दोगुना: ₹20.9 लाख करोड़ से बढ़कर ₹48.7 लाख करोड़ पहुँचा
सारांश
मुख्य बातें
भारत के कृषि और संबद्ध क्षेत्र का ग्रॉस वैल्यू एडेड (जीवीए) 2014-15 के ₹20.9 लाख करोड़ से बढ़कर 2023-24 में ₹48.7 लाख करोड़ पर पहुँच गया है — यानी एक दशक में दोगुने से भी अधिक की वृद्धि। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह आँकड़ा देश के कुल जीवीए का करीब 18 प्रतिशत है और इस वृद्धि के पीछे सरकारी निवेश में बढ़ोतरी तथा स्थिर नीतिगत ढाँचे को प्रमुख कारण बताया गया है।
मुख्य आँकड़े और वृद्धि दर
समीक्षा अवधि के दौरान कृषि क्षेत्र ने मौजूदा कीमतों पर 8.83 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्ज की। केवल फसल क्षेत्र का जीवीए 2014-15 के ₹12,92,874 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में ₹26,52,891 करोड़ हो गया। कुल खाद्यान्न उत्पादन 2013-14 के 265.05 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 357.73 मिलियन टन पर पहुँच गया, जिसमें चावल का रिकॉर्ड उत्पादन 150.18 मिलियन टन और गेहूँ का 117.94 मिलियन टन रहा — क्रमशः 42 प्रतिशत और 36 प्रतिशत की वृद्धि।
नीतिगत हस्तक्षेप और योजनाओं का योगदान
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) ने सिंचाई कवरेज का विस्तार किया और जल उपयोग दक्षता को बढ़ावा दिया। मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना ने वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन को सक्षम बनाया, जबकि राष्ट्रीय गोकुल मिशन ने स्वदेशी नस्लों और दुग्ध उत्पादन को समर्थन दिया। आधिकारिक बयान के अनुसार, MSP संचालन और खरीद प्रणालियों के विस्तार ने बाज़ार में स्थिरता सुनिश्चित की और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा उद्देश्यों को बल दिया।
गौरतलब है कि पिछले 12 वर्षों में नीतिगत फोकस कल्याणकारी सहायता से आगे बढ़कर उत्पादकता, आय सुरक्षा, बाज़ार पहुँच, बुनियादी ढाँचे और संस्थागत लचीलेपन को मज़बूत करने की ओर स्थानांतरित हुआ है।
बागवानी और तिलहन में प्रगति
बागवानी उत्पादन 2013-14 के 280.70 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 369.05 मिलियन टन हो गया है। यह विस्तार उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर विविधीकरण और बेहतर कृषि पद्धतियों का परिणाम बताया जा रहा है। तिलहन के अंतर्गत क्षेत्रफल में 18 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई, उत्पादन में करीब 55 प्रतिशत और उत्पादकता में 31 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
खाद्य तेल आयात पर निर्भरता 2015-16 के 63.2 प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 56.25 प्रतिशत हो गई, जो क्रमिक आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रगति का संकेत है।
डिजिटल और संस्थागत बदलाव
डिजिटल प्लेटफॉर्म, सहकारी समितियाँ, खाद्य प्रसंस्करण और जलवायु-लचीली पहलों ने कृषि मूल्य श्रृंखला में नए अवसर पैदा किए हैं। आधिकारिक बयान में इन्हें एक अधिक विविध, प्रौद्योगिकी-आधारित और किसान-केंद्रित कृषि प्रणाली की ओर क्रमिक बदलाव का प्रमाण बताया गया है।
आगे की राह
आँकड़े कृषि क्षेत्र की समग्र वृद्धि को रेखांकित करते हैं, लेकिन विशेषज्ञ यह भी देखेंगे कि क्या यह वृद्धि किसानों की वास्तविक आय में उसी अनुपात में परिलक्षित होती है। खाद्य तेल आयात निर्भरता में कमी और रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद, कृषि आय और शहरी आय के बीच की खाई को पाटना आने वाले वर्षों की सबसे बड़ी चुनौती बनी रहेगी।