मखाना बाजार 2029-30 तक ₹12,000 करोड़ पार करेगा, किसानों की आय में बड़ी उछाल की उम्मीद
सारांश
मुख्य बातें
भारत का मखाना (फॉक्स नट) बाजार तेज रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार की एक आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, बढ़ते उत्पादन, मजबूत घरेलू खपत, बेहतर मूल्य प्राप्ति और निर्यात में वृद्धि के बल पर यह बाजार वर्ष 2029-30 तक ₹11,000 से ₹12,000 करोड़ के स्तर तक पहुँच सकता है। यह आँकड़ा मखाने को भारत के सबसे तेज़ी से उभरते कृषि-खाद्य क्षेत्रों में से एक के रूप में स्थापित करता है।
मूल्य में ऐतिहासिक उछाल
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-22 से 2024-25 के बीच मखाना उत्पादन में केवल 4 से 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, लेकिन इस दौरान औसत कीमत लगभग ₹500 प्रति किलोग्राम से बढ़कर ₹1,250 प्रति किलोग्राम तक पहुँच गई। स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों की बढ़ती माँग, प्रीमियम ब्रांडिंग और सीमित आपूर्ति वृद्धि इस मूल्य उछाल के प्रमुख कारण रहे हैं। घरेलू मखाना बाजार ने इसी अवधि में 17 से 18 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की है।
उत्पादन के आँकड़े और बिहार की अग्रणी भूमिका
वर्ष 2024-25 में देश का कुल मखाना उत्पादन 63,910 मीट्रिक टन रहा और औसत उत्पादकता 2.03 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई। 2025-26 के द्वितीय अग्रिम अनुमान के अनुसार उत्पादन बढ़कर 80,590 मीट्रिक टन तक पहुँचने की संभावना है, जबकि उत्पादकता 2.34 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर हो सकती है।
उत्पादन के मामले में बिहार सबसे आगे है। 2025-26 में राज्य का उत्पादन लगभग 60,000 मीट्रिक टन रहने का अनुमान है और औसत उत्पादकता करीब 2 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर है। बिहार राष्ट्रीय उत्पादन का सबसे बड़ा हिस्सा प्रदान करता है।
आधुनिक खेती और उन्नत किस्मों का योगदान
पारंपरिक रूप से मखाने की खेती तालाबों और जलाशयों में होती थी, लेकिन अब आधुनिक कृषि तकनीकों ने उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय सुधार किया है। फील्ड सिस्टम खेती, स्वर्ण वैदेही और सबौर मखाना-1 जैसी उन्नत किस्मों के उपयोग से किसानों को बेहतर पैदावार मिल रही है। सरकार के अनुसार, खेती के दायरे में विस्तार, उत्पादकता में वृद्धि और कृषि जोखिमों में कमी इस क्षेत्र की निरंतर प्रगति के आधार हैं।
निर्यात की बढ़ती संभावनाएँ
भारत प्रतिवर्ष 0.6 लाख मीट्रिक टन से अधिक मखाने का उत्पादन करता है, जिसमें से लगभग 40 प्रतिशत यानी करीब 23,000 से 25,000 मीट्रिक टन का निर्यात होता है। वैश्विक स्तर पर क्लीन-लेबल और प्लांट-बेस्ड सुपरफूड्स की माँग में तेज़ वृद्धि के बीच भारत का मजबूत उत्पादन आधार मखाने को अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक प्रीमियम स्नैक के रूप में स्थापित कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात के नए अवसर इस क्षेत्र की विकास दर को और तेज कर सकते हैं।
सरकारी नीति और राष्ट्रीय मखाना बोर्ड
मखाना क्षेत्र के बढ़ते महत्व को देखते हुए केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट 2025-26 में राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की स्थापना की घोषणा की थी। इसके अतिरिक्त, 2025-26 से 2030-31 की अवधि के लिए ₹476.03 करोड़ की लागत वाली मखाना विकास केंद्रीय क्षेत्र योजना को भी मंजूरी दी गई है। इस योजना के तहत अनुसंधान एवं नवाचार, गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता, किसानों के कौशल विकास, कटाई-पश्चात प्रबंधन, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, विपणन, निर्यात प्रोत्साहन और गुणवत्ता नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब मखाना वैश्विक सुपरफूड मानचित्र पर तेजी से अपनी जगह बना रहा है — और भारतीय किसानों के लिए यह एक दुर्लभ अवसर है।