बिहार के मखाना को मिला यूरोपीय बाज़ार: एपीईडीए की मदद से पूर्णिया से ग्रीस को 1 मीट्रिक टन खेप रवाना
सारांश
मुख्य बातें
कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए) की सक्रिय सहभागिता से बिहार के पूर्णिया जिले से 1 मीट्रिक टन पॉप्ड मखाना की पहली खेप ग्रीस के लिए रवाना की गई है। वाणिज्य मंत्रालय ने 2 अक्टूबर 2026 को बताया कि यह पहल बिहार के मखाना उत्पादकों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों से जोड़ने और उनके लिए बेहतर आय के नए द्वार खोलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
खेप का स्रोत और मार्ग
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, इस खेप को इंडो ग्लोबल एक्सपोर्ट, बेलौरी (पूर्णिया) द्वारा स्रोतित किया गया है, जबकि निर्यात एस. एस. फूड्स एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से किया जा रहा है। यह माल मुंद्रा बंदरगाह से रवाना होकर ग्रीस के पिराएस पोर्ट पर पहुँचेगा।
सरकार ने स्पष्ट किया कि इस निर्यात में मखाना उत्पादकों को घरेलू बाज़ार की तुलना में बेहतर मूल्य प्राप्त हुआ है, जो यह दर्शाता है कि वैश्विक बाज़ार किसानों को मूल्यवर्धन के बड़े अवसर दे सकते हैं।
बिहार की मखाना उद्योग में भूमिका
भारत दुनिया का सबसे बड़ा मखाना उत्पादक देश है और देश के कुल उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी 80-85 प्रतिशत है। राज्य के 10 जिलों में 35,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में मखाना की खेती होती है, जो हज़ारों किसान परिवारों की आजीविका का प्रमुख स्रोत है।
गौरतलब है कि यह क्षेत्र न केवल कृषि उत्पादन में बल्कि ग्रामीण रोज़गार और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में भी निर्णायक भूमिका निभाता है।
निर्यात के आँकड़े और सरकारी प्रयास
बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत ने 7,000 मीट्रिक टन से अधिक मखाना और मूल्यवर्धित मखाना उत्पादों का निर्यात किया, जिसकी कुल कीमत लगभग 2.2 करोड़ डॉलर (22 मिलियन डॉलर) रही। यह निर्यात 20 से अधिक देशों तक पहुँचा।
सिन्हा ने यह भी बताया कि बिहार सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए कृषि निर्यात नीति पर काम कर रही है। मखाना निर्यात मूल्य शृंखला को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से राज्य में पैकहाउस भी विकसित किए गए हैं।
एपीईडीए की भूमिका और आगे की राह
वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि एपीईडीए भारतीय मखाना के लिए लगातार नए बाज़ार तलाश रहा है, निर्यातकों को सहयोग दे रहा है और यूरोप सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के साथ बाज़ार संपर्क स्थापित कर रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय सुपरफूड्स की वैश्विक माँग तेज़ी से बढ़ रही है।
मंत्रालय के अनुसार, मखाना निर्यात का विस्तार किसानों को वैश्विक माँग से जोड़ने, नए बाज़ार विकसित करने और बेहतर मूल्य दिलाने में सहायक सिद्ध होगा। इससे बिहार के मखाना उद्योग को नई गति मिलने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को भी बल मिलेगा।