खगड़िया-पूर्णिया फोरलेन हाईवे: ₹3,936 करोड़ की परियोजना से बिहार के केला-मखाना किसानों को मिलेगी राहत
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने एनएच-31 और एनएच-231 के खगड़िया-पूर्णिया खंड को चार लेन में अपग्रेड करने की परियोजना को हाल ही में मंजूरी दी है। ₹3,936.05 करोड़ की लागत वाली यह परियोजना बिहार के पूर्वी जिलों में केला और मखाना जैसी नकदी फसलों के उत्पादकों के लिए एक बड़ी राहत बनकर आ सकती है। सरकार द्वारा 19 जुलाई को जारी फैक्टशीट में इस परियोजना के कृषि और आर्थिक प्रभावों का विस्तार से उल्लेख किया गया है।
केला और मखाना उद्योग को सीधा फायदा
खगड़िया बिहार के प्रमुख केला उत्पादक जिलों में से एक है, जहाँ से सुबह होने से पहले ही उपज से लदे ट्रक बाजारों की ओर रवाना हो जाते हैं। वहीं पूर्णिया देश के सबसे बड़े मखाना उत्पादक केंद्रों में शुमार है। अब तक यातायात जाम और मानसून के दौरान सड़क संपर्क टूटने से इन उच्च मूल्य वाली फसलों की ढुलाई बाधित होती रही है। चार लेन सड़क बनने के बाद केले जैसी शीघ्र खराब होने वाली उपज की बर्बादी में कमी आएगी, गुणवत्ता बनी रहेगी और किसानों को बेहतर बाजार मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी।
बाढ़ और बुनियादी ढाँचे की पुरानी चुनौती
पूर्वी बिहार का सड़क तंत्र वर्षों से कोसी और गंगा नदी प्रणाली की बाढ़ का शिकार होता रहा है। हर साल बाढ़ के मौसम में सड़क संपर्क बाधित होने से लोगों और माल की आवाजाही ठप पड़ जाती है। नई परियोजना में मजबूत सड़क संरचना, बेहतर रोड जियोमेट्री और आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम शामिल किए जाएंगे, ताकि सड़क वर्षभर सुचारु रह सके।
यात्रा समय में बड़ी कटौती
फैक्टशीट के अनुसार, अभी खगड़िया से पूर्णिया के बीच सफर में 3.5 से 4 घंटे लगते हैं। चार लेन परियोजना पूरी होने के बाद यही दूरी 1.5 से 2 घंटे में तय की जा सकेगी। इससे खगड़िया, भागलपुर, कटिहार और पूर्णिया जिलों में व्याप्त तीखे मोड़ों, संकरी सड़कों और शहरी क्षेत्रों में ट्रैफिक जाम की समस्या भी दूर होगी।
पीएम गतिशक्ति और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी
यह कॉरिडोर पीएम गतिशक्ति के अंतर्गत पाँच आर्थिक नोड्स — एक टेक्सटाइल क्लस्टर, दो मेगा फूड पार्क और दो मत्स्य एवं सीफूड पार्क — को बेहतर सड़क संपर्क प्रदान करेगा। इसके अलावा 11 प्रमुख लॉजिस्टिक्स नोड्स, जिनमें चार बड़े रेलवे स्टेशन, एक हवाई अड्डा, चार राष्ट्रीय राजमार्ग और दो राज्य राजमार्ग शामिल हैं, इस परियोजना से जुड़ेंगे। यह कॉरिडोर बिहार को पश्चिम बंगाल और राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के जरिए झारखंड से भी अधिक मजबूती से जोड़ेगा।
सीमांचल क्षेत्र के विकास की उम्मीद
सीमित सड़क संपर्क के कारण सीमांचल के जिले लंबे समय से विकास की मुख्यधारा से कटे रहे हैं। प्रशासनिक, शैक्षणिक और आर्थिक केंद्रों तक पहुँचने में यहाँ के लोगों को राज्य के अन्य हिस्सों की तुलना में कहीं अधिक समय लगता है। आँकड़ों के अनुसार, इस परियोजना से लाखों लोगों की आजीविका और दैनिक जीवन पर सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है। आने वाले वर्षों में यह हाईवे पूर्वी भारत की अंतरराज्यीय कनेक्टिविटी की रीढ़ बन सकता है।