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खगड़िया-पूर्णिया फोरलेन हाईवे: ₹3,936 करोड़ की परियोजना से बिहार के केला-मखाना किसानों को मिलेगी राहत

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खगड़िया-पूर्णिया फोरलेन हाईवे: ₹3,936 करोड़ की परियोजना से बिहार के केला-मखाना किसानों को मिलेगी राहत

सारांश

₹3,936 करोड़ की खगड़िया-पूर्णिया फोरलेन परियोजना सिर्फ सड़क नहीं — यह बिहार के केला और मखाना किसानों के लिए बाजार तक पहुँच की नई राह है। सीमांचल के उन जिलों के लिए जो दशकों से बाढ़ और खराब कनेक्टिविटी से जूझते रहे हैं, यह हाईवे आर्थिक बदलाव का प्रवेश द्वार बन सकता है।

मुख्य बातें

CCEA ने एनएच-31 और एनएच-231 के खगड़िया-पूर्णिया खंड को चार लेन में अपग्रेड करने की मंजूरी दी।
परियोजना की अनुमानित लागत ₹3,936.05 करोड़ है।
यात्रा समय 3.5–4 घंटे से घटकर 1.5–2 घंटे होने का अनुमान।
खगड़िया के केला और पूर्णिया के मखाना उत्पादकों को समय पर बाजार पहुँच मिलेगी, जिससे उपज की बर्बादी कम होगी।
पीएम गतिशक्ति के तहत 5 आर्थिक नोड्स और 11 लॉजिस्टिक्स नोड्स इस कॉरिडोर से जुड़ेंगे।
बिहार का संपर्क पश्चिम बंगाल और झारखंड से और मजबूत होगा।

केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने एनएच-31 और एनएच-231 के खगड़िया-पूर्णिया खंड को चार लेन में अपग्रेड करने की परियोजना को हाल ही में मंजूरी दी है। ₹3,936.05 करोड़ की लागत वाली यह परियोजना बिहार के पूर्वी जिलों में केला और मखाना जैसी नकदी फसलों के उत्पादकों के लिए एक बड़ी राहत बनकर आ सकती है। सरकार द्वारा 19 जुलाई को जारी फैक्टशीट में इस परियोजना के कृषि और आर्थिक प्रभावों का विस्तार से उल्लेख किया गया है।

केला और मखाना उद्योग को सीधा फायदा

खगड़िया बिहार के प्रमुख केला उत्पादक जिलों में से एक है, जहाँ से सुबह होने से पहले ही उपज से लदे ट्रक बाजारों की ओर रवाना हो जाते हैं। वहीं पूर्णिया देश के सबसे बड़े मखाना उत्पादक केंद्रों में शुमार है। अब तक यातायात जाम और मानसून के दौरान सड़क संपर्क टूटने से इन उच्च मूल्य वाली फसलों की ढुलाई बाधित होती रही है। चार लेन सड़क बनने के बाद केले जैसी शीघ्र खराब होने वाली उपज की बर्बादी में कमी आएगी, गुणवत्ता बनी रहेगी और किसानों को बेहतर बाजार मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी।

बाढ़ और बुनियादी ढाँचे की पुरानी चुनौती

पूर्वी बिहार का सड़क तंत्र वर्षों से कोसी और गंगा नदी प्रणाली की बाढ़ का शिकार होता रहा है। हर साल बाढ़ के मौसम में सड़क संपर्क बाधित होने से लोगों और माल की आवाजाही ठप पड़ जाती है। नई परियोजना में मजबूत सड़क संरचना, बेहतर रोड जियोमेट्री और आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम शामिल किए जाएंगे, ताकि सड़क वर्षभर सुचारु रह सके।

यात्रा समय में बड़ी कटौती

फैक्टशीट के अनुसार, अभी खगड़िया से पूर्णिया के बीच सफर में 3.5 से 4 घंटे लगते हैं। चार लेन परियोजना पूरी होने के बाद यही दूरी 1.5 से 2 घंटे में तय की जा सकेगी। इससे खगड़िया, भागलपुर, कटिहार और पूर्णिया जिलों में व्याप्त तीखे मोड़ों, संकरी सड़कों और शहरी क्षेत्रों में ट्रैफिक जाम की समस्या भी दूर होगी।

पीएम गतिशक्ति और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी

यह कॉरिडोर पीएम गतिशक्ति के अंतर्गत पाँच आर्थिक नोड्स — एक टेक्सटाइल क्लस्टर, दो मेगा फूड पार्क और दो मत्स्य एवं सीफूड पार्क — को बेहतर सड़क संपर्क प्रदान करेगा। इसके अलावा 11 प्रमुख लॉजिस्टिक्स नोड्स, जिनमें चार बड़े रेलवे स्टेशन, एक हवाई अड्डा, चार राष्ट्रीय राजमार्ग और दो राज्य राजमार्ग शामिल हैं, इस परियोजना से जुड़ेंगे। यह कॉरिडोर बिहार को पश्चिम बंगाल और राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के जरिए झारखंड से भी अधिक मजबूती से जोड़ेगा।

सीमांचल क्षेत्र के विकास की उम्मीद

सीमित सड़क संपर्क के कारण सीमांचल के जिले लंबे समय से विकास की मुख्यधारा से कटे रहे हैं। प्रशासनिक, शैक्षणिक और आर्थिक केंद्रों तक पहुँचने में यहाँ के लोगों को राज्य के अन्य हिस्सों की तुलना में कहीं अधिक समय लगता है। आँकड़ों के अनुसार, इस परियोजना से लाखों लोगों की आजीविका और दैनिक जीवन पर सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है। आने वाले वर्षों में यह हाईवे पूर्वी भारत की अंतरराज्यीय कनेक्टिविटी की रीढ़ बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन पूर्वी बिहार में बुनियादी ढाँचे की घोषणाएँ और उनका जमीनी क्रियान्वयन अक्सर अलग-अलग रहे हैं — कोसी क्षेत्र में बाढ़-रोधी निर्माण की विफलताएँ इसकी गवाह हैं। असली परीक्षा यह होगी कि आधुनिक ड्रेनेज और मजबूत संरचना के वादे मानसून की पहली चुनौती में कितने टिकते हैं। मखाना और केला जैसी फसलों के लिए कोल्ड चेन और स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर के बिना केवल सड़क चौड़ी करना किसानों की आय को उस हद तक नहीं बढ़ाएगा जितना सरकारी फैक्टशीट में दर्शाया गया है। सीमांचल के विकास की असली बाधा सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि बाजार संपर्क, कृषि प्रसंस्करण और ऋण तक पहुँच का समग्र अभाव है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खगड़िया-पूर्णिया फोरलेन हाईवे परियोजना क्या है?
यह एनएच-31 और एनएच-231 के खगड़िया-पूर्णिया खंड को दो लेन से चार लेन में अपग्रेड करने की परियोजना है, जिसे CCEA ने हाल ही में ₹3,936.05 करोड़ की लागत से मंजूरी दी है। इसमें मजबूत सड़क संरचना, बेहतर रोड जियोमेट्री और आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम शामिल हैं।
इस हाईवे से बिहार के किसानों को क्या फायदा होगा?
खगड़िया के केला उत्पादकों और पूर्णिया के मखाना किसानों को उनकी उपज बाजार तक समय पर पहुँचाने में मदद मिलेगी, जिससे शीघ्र खराब होने वाली फसलों की बर्बादी कम होगी और किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी। यातायात जाम और बाढ़ के दौरान सड़क बंद होने की समस्या भी कम होगी।
इस परियोजना से यात्रा समय कितना कम होगा?
अभी खगड़िया से पूर्णिया के बीच सफर में 3.5 से 4 घंटे लगते हैं। परियोजना पूरी होने के बाद यही दूरी 1.5 से 2 घंटे में तय की जा सकेगी, जो लगभग आधे से भी कम समय है।
पीएम गतिशक्ति से इस कॉरिडोर का क्या संबंध है?
यह कॉरिडोर पीएम गतिशक्ति के तहत एक टेक्सटाइल क्लस्टर, दो मेगा फूड पार्क और दो मत्स्य एवं सीफूड पार्क सहित पाँच आर्थिक नोड्स को बेहतर सड़क संपर्क देगा। साथ ही चार रेलवे स्टेशन, एक हवाई अड्डा और कई राजमार्गों सहित 11 लॉजिस्टिक्स नोड्स भी इससे जुड़ेंगे।
इस हाईवे से किन राज्यों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी?
यह कॉरिडोर बिहार को पश्चिम बंगाल और राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के जरिए झारखंड से अधिक मजबूती से जोड़ेगा। इससे पूर्वी भारत की अंतरराज्यीय कनेक्टिविटी और मल्टीमॉडल परिवहन को भी नई गति मिलेगी।
राष्ट्र प्रेस
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