बिहार के सभी जिला मुख्यालय फोर-लेन से जुड़ेंगे: CM सम्राट चौधरी का बड़ा फैसला
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार, 26 मई को पटना में पथ निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि बिहार के सभी जिला मुख्यालयों को फोर-लेन सड़क नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। यह कदम राज्य की आर्थिक प्रगति को गति देने और रोज़गार के नए अवसर सृजित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
मुख्य घोषणाएँ और निर्देश
मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि राज्य के सुदूर इलाकों से पाँच घंटे में पटना पहुँचने के लक्ष्य पर काम जारी है। उन्होंने अधिकारियों को राज्य में निर्माणाधीन एक्सप्रेस-वे, राष्ट्रीय राजमार्ग और स्टेट हाईवे के कार्य को तीव्र गति एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कच्ची दरगाह-बिदुपुर 6 लेन पुल का निर्माण कार्य जुलाई के पहले सप्ताह तक अनिवार्य रूप से पूर्ण किया जाए।
आर्थिक प्रगति और रोज़गार पर असर
मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि राज्य के पर्यटन स्थलों, सांस्कृतिक विरासत स्थलों, औद्योगिक कॉरिडोर, विशेष कृषि उत्पादन क्षेत्रों और प्रमुख बाज़ारों को बेहतर सड़क संपर्क मिलने से राज्य की आर्थिक रफ्तार तेज़ होगी। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार सड़क अवसंरचना में निवेश को आर्थिक विकास के प्रमुख चालक के रूप में देख रहा है।
विक्रमशीला पुल और ब्रिज मेंटेनेंस नीति
मुख्यमंत्री ने ब्रिज मेंटेनेंस पॉलिसी को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पुलों की गुणवत्ता एवं मज़बूती की जाँच निरंतर होती रहे। विक्रमशीला पुल का स्थायी पुनर्स्थापन कार्य विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर ही कराया जाएगा।
बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी
समीक्षा बैठक में उपमुख्यमंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, पथ निर्माण मंत्री कुमार शैलेन्द्र, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, बिहार राज्य पथ विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक शीर्षत कपिल अशोक और एनएचएआई (NHAI) के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से विभाग की अद्यतन स्थिति और भावी कार्य योजना की जानकारी दी।
क्या होगा आगे
गौरतलब है कि बिहार में सड़क अवसंरचना का विस्तार राज्य सरकार की प्राथमिकता सूची में शीर्ष पर रहा है। फोर-लेन कनेक्टिविटी के इस लक्ष्य के क्रियान्वयन की प्रगति अब विभागीय समीक्षाओं में नियमित रूप से परखी जाएगी, और परियोजनाओं की समय-सीमा पर कड़ी नज़र रखी जाएगी।