19 अगस्त 2026
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बिहार को ₹3,591 करोड़ की सड़क परियोजना की सौगात, मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा खंड बनेगा फोर-लेन हाईवे

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बिहार को ₹3,591 करोड़ की सड़क परियोजना की सौगात, मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा खंड बनेगा फोर-लेन हाईवे

सारांश

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बिहार के NH-22 पर ₹3,591 करोड़ की फोर-लेन परियोजना को मंजूरी दी — 82.578 किमी का यह कॉरिडोर मुजफ्फरपुर से सोनबरसा तक नेपाल सीमा के पास कनेक्टिविटी मजबूत करेगा, सात पुल और तीन ROB बनेंगे, और ₹13,000 करोड़ के व्यापक इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज का हिस्सा है।

मुख्य बातें

सीसीईए ने 19 अगस्त 2026 को NH-22 के मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा खंड को फोर-लेन हाईवे बनाने की मंजूरी दी।
परियोजना की अनुमानित लागत ₹3,591 करोड़ ; कुल लंबाई 82.578 किलोमीटर ।
डिज़ाइन स्पीड 100 किमी/घंटा ; 7 प्रमुख पुल (बागमती पर 340 मीटर), 3 ROB और 2 फ्लाईओवर शामिल।
मुजफ्फरपुर, डुमरा, भुतही, सोनबरसा सहित घनी आबादी वाले क्षेत्रों में ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी।
यह परियोजना ₹13,000 करोड़ के कुल पाँच इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्टों के पैकेज का हिस्सा है, जिसमें चार राज्यों में रेलवे मल्टीट्रैकिंग ( ₹9,450 करोड़ ) भी शामिल है।
रेलवे परियोजनाओं से नेटवर्क में 410 किमी की अतिरिक्त क्षमता जुड़ेगी; लक्ष्य 2030-31 तक पूरा करना।

केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने बुधवार, 19 अगस्त 2026 को बिहार के लिए एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचा परियोजना को हरी झंडी दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में राष्ट्रीय राजमार्ग-22 (NH-22) के मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा खंड के 82.578 किलोमीटर हिस्से को चार-लेन हाईवे में अपग्रेड करने की मंजूरी दी गई, जिसकी अनुमानित लागत ₹3,591 करोड़ है। यह परियोजना उत्तर बिहार की कनेक्टिविटी को मजबूत करने और नेपाल सीमा से लगे इलाकों तक पहुँच आसान बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

परियोजना का दायरा और तकनीकी विवरण

मंत्रिमंडल की विज्ञप्ति के अनुसार, इस कॉरिडोर को 100 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति और 80 किमी प्रति घंटे की औसत गति के लिए डिज़ाइन किया गया है। सड़क पर कोई एट-ग्रेड मीडियन ओपनिंग नहीं होगी, जिससे यात्रा तेज़ और सुरक्षित बनेगी। परियोजना में सात प्रमुख पुल — जिनमें बारहमासी बागमती नदी पर 340 मीटर लंबा पुल शामिल है — तीन रेलवे ओवर ब्रिज (ROB) और दो फ्लाईओवर का निर्माण भी शामिल है।

किन इलाकों को मिलेगी राहत

सरकारी विज्ञप्ति के मुताबिक, इस हाईवे के बनने से मुजफ्फरपुर, मुक्सुदपुर, रुन्नीसैदपुर, थुम्मा, डुमरा, भुतही और सोनबरसा जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में यातायात का दबाव उल्लेखनीय रूप से कम होगा। इसके अलावा, भीथामोर स्थित लैंड पोर्ट के ज़रिये सीमा पार यात्री और माल परिवहन को भी बल मिलेगा।

आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व

यह परियोजना पाँच पीएम गति-शक्ति आर्थिक केंद्रों (चार औद्योगिक संपदा और एक मेगा फूड पार्क), चार सामाजिक केंद्रों — जिनमें बाबा गरीबनाथ मंदिर, माता जानकी मंदिर, पुनाउरा धाम और मुजफ्फरपुर व सीतामढ़ी के आकांक्षी ज़िले शामिल हैं — तथा दो लॉजिस्टिक केंद्रों (मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी रेलवे स्टेशन) से कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगी। गौरतलब है कि यह कॉरिडोर बरौनी जैसे औद्योगिक क्षेत्रों और नदी-आधारित लॉजिस्टिक्स हब से भी जुड़ेगा। बौद्ध सर्किट और ऐतिहासिक जानकी पुनाउरा धाम मंदिर, सीतामढ़ी तक पहुँच भी बेहतर होगी, जिससे धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

व्यापक इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज का हिस्सा

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक के बाद बताया कि सरकार ने इस बिहार सड़क परियोजना के साथ-साथ पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में भारतीय रेलवे की चार मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है, जिनकी कुल अनुमानित लागत ₹9,450 करोड़ है और इन्हें 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इन सभी परियोजनाओं को मिलाकर कुल ₹13,000 करोड़ के पाँच बुनियादी ढाँचा प्रोजेक्टों को एक साथ स्वीकृति दी गई है। वैष्णव के अनुसार, इन परियोजनाओं के पूरा होने पर भारतीय रेल नेटवर्क में लगभग 410 किलोमीटर की अतिरिक्त क्षमता जुड़ेगी।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार बिहार में बुनियादी ढाँचे पर निवेश बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। NH-22 का यह उन्नत खंड कृषि आपूर्ति शृंखलाओं की कुशल आवाजाही और क्षेत्रीय आर्थिक विकास में सहायक बनेगा। परियोजना के क्रियान्वयन की समयसीमा और ठेका प्रक्रिया की जानकारी आने वाले हफ्तों में सामने आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

591 करोड़ की सड़क परियोजना राजनीतिक दृष्टि से भी उल्लेखनीय है — राज्य एनडीए गठबंधन की धुरी है और चुनावी चक्र के करीब बुनियादी ढाँचे की घोषणाएँ अक्सर तेज़ होती हैं। असली कसौटी यह होगी कि क्या यह परियोजना तय समयसीमा और बजट में पूरी होती है, क्योंकि उत्तर बिहार में बाढ़-प्रवण भूगोल और ज़मीन अधिग्रहण की जटिलताएँ अक्सर निर्माण को लंबा खींचती हैं। नेपाल सीमा से जुड़ाव और भीथामोर लैंड पोर्ट का उल्लेख रणनीतिक महत्व को रेखांकित करता है, लेकिन सीमा पार व्यापार की वास्तविक वृद्धि द्विपक्षीय नीतियों पर भी निर्भर करेगी, जो इस परियोजना के दायरे से बाहर है।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार में NH-22 की फोर-लेन परियोजना क्या है?
यह राष्ट्रीय राजमार्ग-22 के मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा खंड के 82.578 किलोमीटर हिस्से को फोर-लेन हाईवे में अपग्रेड करने की परियोजना है, जिसे सीसीईए ने 19 अगस्त 2026 को ₹3,591 करोड़ की लागत से मंजूरी दी। यह उत्तर बिहार को नेपाल सीमा के करीबी इलाकों से बेहतर तरीके से जोड़ेगी।
इस हाईवे से किन इलाकों को फायदा होगा?
मुजफ्फरपुर, मुक्सुदपुर, रुन्नीसैदपुर, थुम्मा, डुमरा, भुतही और सोनबरसा के घनी आबादी वाले क्षेत्रों में ट्रैफिक जाम कम होगा। इसके अलावा भीथामोर लैंड पोर्ट के ज़रिये नेपाल के साथ सीमा पार व्यापार और यात्री आवाजाही भी सुगम होगी।
इस परियोजना में कौन-कौन से निर्माण कार्य शामिल हैं?
परियोजना में सात प्रमुख पुल — जिनमें बागमती नदी पर 340 मीटर लंबा पुल शामिल है — तीन रेलवे ओवर ब्रिज (ROB) और दो फ्लाईओवर बनाए जाएँगे। सड़क को 100 किमी/घंटा की अधिकतम गति के लिए डिज़ाइन किया गया है और इसमें कोई एट-ग्रेड मीडियन ओपनिंग नहीं होगी।
क्या यह परियोजना किसी बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज का हिस्सा है?
हाँ, यह ₹13,000 करोड़ के कुल पाँच इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्टों के पैकेज का हिस्सा है। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में ₹9,450 करोड़ की चार रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई है, जिन्हें 2030-31 तक पूरा करना है।
इस हाईवे का आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व क्या है?
यह कॉरिडोर पाँच पीएम गति-शक्ति आर्थिक केंद्रों, बाबा गरीबनाथ मंदिर और माता जानकी मंदिर जैसे धार्मिक स्थलों, तथा मुजफ्फरपुर व सीतामढ़ी रेलवे स्टेशनों से जुड़ेगा। बौद्ध सर्किट और जानकी पुनाउरा धाम तक बेहतर पहुँच से धार्मिक पर्यटन और कृषि आपूर्ति शृंखला दोनों को लाभ मिलेगा।
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