3 सितंबर 2026
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एनएच-327 फोरलेन परियोजना: सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास ₹2,077 करोड़ की मंजूरी, पूर्वोत्तर कनेक्टिविटी होगी मजबूत

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एनएच-327 फोरलेन परियोजना: सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास ₹2,077 करोड़ की मंजूरी, पूर्वोत्तर कनेक्टिविटी होगी मजबूत

सारांश

सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास ₹2,077 करोड़ की फोरलेन परियोजना सिर्फ सड़क नहीं, एक सामरिक दांव है। बागडोगरा से गलगलिया तक 31 किमी का यह खंड पूर्वोत्तर, नेपाल, भूटान और बांग्लादेश तक पहुँच को नया आयाम देगा — और उत्तर बंगाल की 'ट्रिपल-टी' अर्थव्यवस्था को रफ्तार।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने एनएच-327 के 31.02 किलोमीटर खंड को फोरलेन बनाने के लिए ₹2,077.18 करोड़ मंजूर किए।
परियोजना में 3 बड़े पुल , 1 आरओबी और 5 एलिफेंट अंडरपास शामिल हैं।
बागडोगरा-पानीटंकी-खारीबाड़ी-गलगलिया खंड दार्जिलिंग जिले , पश्चिम बंगाल में स्थित है।
परियोजना नेपाल , भूटान और बांग्लादेश तक सड़क पहुँच को बेहतर बनाएगी।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 3 सितंबर को एक्स पर यह घोषणा की।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने उत्तर बंगाल के 'ट्रिपल-टी सेक्टर' — चाय, लकड़ी और पर्यटन — के विकास को प्राथमिकता बताया है।

केंद्र सरकार ने रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर के निकट स्थित एनएच-327 के 31.02 किलोमीटर लंबे खंड को फोरलेन में बदलने की स्वीकृति दे दी है। इस परियोजना के लिए ₹2,077.18 करोड़ की राशि अनुमोदित की गई है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार, 3 सितंबर को यह जानकारी दी।

परियोजना का विवरण

गडकरी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में बताया कि पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में बागडोगरा-पानीटंकी-खारीबाड़ी-गलगलिया खंड को फोरलेन में बदला जाएगा। इस परियोजना के अंतर्गत 3 बड़े पुल, 1 रोड ओवर ब्रिज (आरओबी), 5 एलिफेंट अंडरपास और दोनों तरफ सर्विस रोड का निर्माण शामिल है। एलिफेंट अंडरपास का प्रावधान इस क्षेत्र में वन्यजीव आवाजाही को सुरक्षित बनाए रखने की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम है।

रणनीतिक और भू-राजनीतिक महत्व

यह परियोजना उस सिलीगुड़ी कॉरिडोर के समीप स्थित है जिसे 'चिकन्स नेक' भी कहा जाता है — यह भारत की मुख्यभूमि को पूर्वोत्तर के आठ राज्यों से जोड़ने वाली एकमात्र भूमि पट्टी है। फोरलेन निर्माण से नेपाल, भूटान और बांग्लादेश तक सड़क पहुँच भी सुगम होगी, जो भारत की पड़ोस-पहले नीति के अनुरूप है। गौरतलब है कि यह कॉरिडोर सामरिक दृष्टि से इतना संवेदनशील है कि यहाँ किसी भी बुनियादी ढाँचे को राष्ट्रीय सुरक्षा के नज़रिए से भी देखा जाता है।

स्थानीय जनजीवन पर असर

फोरलेन सड़क बनने से बागडोगरा, नक्सलबाड़ी, खारीबाड़ी और पानीटंकी में यातायात जाम की समस्या कम होगी। बागडोगरा हवाई अड्डे तक बेहतर पहुँच से यात्रियों को राहत मिलेगी। इसके अलावा चाय, कृषि और बागवानी उत्पादों को बड़े बाजारों तक तेजी से पहुँचाना आसान होगा, जिससे किसानों और व्यापारियों दोनों को लाभ होगा।

राज्य सरकार की प्राथमिकताएँ

यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार उत्तर बंगाल के बुनियादी ढाँचे को प्राथमिकता दे रही है। इस साल मई में सत्ता में आने के बाद से अधिकारी ने बार-बार कहा है कि पिछली लेफ्ट फ्रंट और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकारों के दौरान उत्तर बंगाल को नजरअंदाज किया गया। मुख्यमंत्री ने चाय, लकड़ी और पर्यटन — जिन्हें 'ट्रिपल-टी सेक्टर' कहा जाता है — के विकास के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर को अनिवार्य बताया है।

आगे की राह

परियोजना के क्रियान्वयन की समय-सीमा और निविदा प्रक्रिया अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। हालाँकि, केंद्रीय स्वीकृति मिलने के बाद भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। यह परियोजना उत्तर बंगाल में दीर्घकालिक आर्थिक और सामरिक बदलाव की नींव रख सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अक्सर नागरिक चर्चाओं में अनदेखा रह जाता है। हालाँकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि उत्तर बंगाल में अनेक केंद्रीय परियोजनाओं की घोषणाएँ हुई हैं, लेकिन भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय विवादों के कारण क्रियान्वयन में देरी आम रही है। ₹2,077 करोड़ की यह मंजूरी तभी असरदार होगी जब निविदा से लेकर निर्माण तक की प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध हो।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनएच-327 फोरलेन परियोजना क्या है और यह कहाँ बनेगी?
यह पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में बागडोगरा से गलगलिया तक एनएच-327 के 31.02 किलोमीटर खंड को फोरलेन में बदलने की परियोजना है। इसके लिए केंद्र सरकार ने ₹2,077.18 करोड़ मंजूर किए हैं।
इस परियोजना में क्या-क्या बनाया जाएगा?
परियोजना में 3 बड़े पुल, 1 रोड ओवर ब्रिज (आरओबी), 5 एलिफेंट अंडरपास और दोनों तरफ सर्विस रोड का निर्माण शामिल है। एलिफेंट अंडरपास वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेंगे।
सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास यह परियोजना क्यों महत्वपूर्ण है?
सिलीगुड़ी कॉरिडोर — जिसे 'चिकन्स नेक' कहते हैं — भारत की मुख्यभूमि को पूर्वोत्तर के आठ राज्यों से जोड़ने वाली एकमात्र भूमि पट्टी है। यह परियोजना इस संवेदनशील क्षेत्र में कनेक्टिविटी और सामरिक क्षमता दोनों को बढ़ाएगी।
इस परियोजना से स्थानीय लोगों को क्या फायदा होगा?
बागडोगरा हवाई अड्डे तक बेहतर पहुँच, बागडोगरा-नक्सलबाड़ी-खारीबाड़ी-पानीटंकी में यातायात जाम में कमी और चाय, कृषि व बागवानी उत्पादों को बड़े बाजारों तक तेजी से पहुँचाना संभव होगा।
पश्चिम बंगाल सरकार उत्तर बंगाल में इंफ्रास्ट्रक्चर पर क्यों जोर दे रही है?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा है कि पिछली लेफ्ट फ्रंट और तृणमूल कांग्रेस सरकारों के दौरान उत्तर बंगाल को नजरअंदाज किया गया। उनकी सरकार चाय, लकड़ी और पर्यटन — 'ट्रिपल-टी सेक्टर' — के जरिए इस क्षेत्र के औद्योगिक विकास को गति देना चाहती है।
राष्ट्र प्रेस
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