मऊ-बलिया NH-128बी फोरलेन चौड़ीकरण को मंजूरी, 55.57 किमी परियोजना से पूर्वांचल को नई रफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश में मऊ-बलिया राष्ट्रीय राजमार्ग-128बी के 55.57 किलोमीटर लंबे फोरलेन चौड़ीकरण परियोजना को स्वीकृति मिल गई है, जिसे पूर्वांचल के बुनियादी ढाँचे के लिए एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। 7 जून 2026 को मिली इस मंजूरी के बाद क्षेत्र में लंबे समय से लंबित यातायात सुधार की उम्मीदें अब ठोस आकार लेने लगी हैं।
मंजूरी के बाद की कार्रवाई
परियोजना की स्वीकृति मिलते ही मंत्री एके शर्मा ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अध्यक्ष को पत्र लिखकर टेंडर प्रक्रिया और निर्माण कार्य को शीघ्र प्रारंभ कराने का अनुरोध किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस परियोजना को लेकर पूर्व में भी लगातार पत्राचार और उच्चस्तरीय संवाद होता रहा है, और अब मंजूरी मिलने के बाद क्रियान्वयन में किसी प्रकार की देरी स्वीकार्य नहीं होगी।
परियोजना का दायरा और प्रस्तावित सुविधाएँ
इस फोरलेन परियोजना के अंतर्गत कई रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण भी प्रस्तावित है, जिससे मौजूदा यातायात बाधाएँ दूर होंगी और यात्रियों को निर्बाध परिवहन सुविधा मिलेगी। चौड़ीकरण से यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आने और सड़क सुरक्षा मानकों में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
आम जनता और अर्थव्यवस्था पर असर
मंत्री एके शर्मा के अनुसार, यह परियोजना केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है — यह पूर्वांचल के आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक विकास की नींव बनेगी। बेहतर सड़क संपर्क से मऊ, बलिया और आसपास के जनपदों में व्यापारिक गतिविधियाँ तेज होंगी, निवेश की संभावनाएँ बढ़ेंगी और किसानों, व्यापारियों तथा विद्यार्थियों सहित आम नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
पूर्वांचल के लिए ग्रोथ कॉरिडोर
शर्मा ने विश्वास व्यक्त किया कि परियोजना के पूर्ण होने के बाद यह फोरलेन पूर्वांचल की अर्थव्यवस्था के लिए एक नए ग्रोथ कॉरिडोर के रूप में उभरेगा। उन्होंने NHAI से जन आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए क्रियान्वयन में तेजी लाने का आग्रह किया, ताकि क्षेत्र की जनता को यथाशीघ्र इस आधारभूत सुविधा का लाभ मिल सके।
क्या होगा आगे
अब सभी की नजरें NHAI की टेंडर प्रक्रिया पर टिकी हैं। मंत्री के पत्र के बाद यह देखना होगा कि प्राधिकरण कितनी जल्दी निविदा जारी करता है और निर्माण कार्य कब जमीन पर उतरता है। पूर्वांचल के विकास की यह परियोजना राज्य सरकार की बुनियादी ढाँचा प्राथमिकताओं की कसौटी भी बनेगी।