2 जुलाई 2026
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त्रिपुरा में NH नेटवर्क 198 से 923 किमी: गडकरी-माणिक साहा बैठक में फोरलेन, बाईपास और सुरंग परियोजनाओं पर बड़े फैसले

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त्रिपुरा में NH नेटवर्क 198 से 923 किमी: गडकरी-माणिक साहा बैठक में फोरलेन, बाईपास और सुरंग परियोजनाओं पर बड़े फैसले

सारांश

त्रिपुरा का NH नेटवर्क 2014 में 198 किमी से बढ़कर 2026 में 923 किमी हो गया है — और अब गडकरी-साहा बैठक में NH-8 फोरलेन, पहाड़ी सुरंगें, अगरतला बाईपास और 148 किमी की नई सड़क पर बड़े फैसले लिए गए हैं।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और त्रिपुरा CM माणिक साहा ने 1 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा बैठक की।
त्रिपुरा का NH नेटवर्क 2014 के 198 किमी से बढ़कर 2026 में 923 किमी हो गया है।
एनएच-8 के 130 किमी चुराईबाड़ी-चंपकनगर खंड को फोरलेन बनाने का अलाइनमेंट स्वीकृत; अथारामुरा और लोंगथराई पहाड़ियों में सुरंगें प्रस्तावित।
राज्य सरकार ने अगस्त 2026 तक रानीरबाजार-आईएसबीटी खंड की 90% से अधिक भूमि सौंपने का आश्वासन दिया।
अगरतला के 25 किमी वेस्टर्न बाईपास के लिए नया टेंडर जारी होगा; 148 किमी कमलपुर-शांतिरबाजार सड़क मंत्रालय लेगा।
एनएच-108बी, एनएच-208 और एनएच-208ए के जर्जर खंडों को CRRI की सिफारिशों के अनुसार पुनर्निर्मित किया जाएगा।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने बुधवार, 1 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में एक विस्तृत समीक्षा बैठक की, जिसमें राज्य के नेशनल हाईवे नेटवर्क की मौजूदा प्रगति, लंबित परियोजनाओं की समय-सीमा और भविष्य की कनेक्टिविटी योजनाओं पर गहन चर्चा हुई। बैठक में एनएच-8 के फोरलेन विस्तार, अगरतला के बाईपास और पहाड़ी सुरंग परियोजनाओं सहित कई अहम निर्णय लिए गए।

त्रिपुरा में राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का विस्तार

मुख्यमंत्री माणिक साहा — जिनके पास लोक निर्माण विभाग (PWD) का प्रभार भी है — ने केंद्रीय मंत्री गडकरी का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि त्रिपुरा का नेशनल हाईवे नेटवर्क 2014 में मात्र 198 किमी था, जो 2026 तक बढ़कर 923 किमी हो गया है। यह विस्तार करीब 366 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है और पूर्वोत्तर भारत में बुनियादी ढाँचे के बदलाव का स्पष्ट संकेत है।

गौरतलब है कि त्रिपुरा तीन तरफ से बांग्लादेश से घिरा है और केवल असम तथा मिज़ोरम के रास्ते भारत के शेष हिस्से से जुड़ता है, इसलिए यहाँ सड़क संपर्क की रणनीतिक अहमियत सामान्य राज्यों से कहीं अधिक है।

एनएच-8 फोरलेन: चुराईबाड़ी से चंपकनगर तक सुरंग सहित महत्वाकांक्षी योजना

बैठक में सबसे बड़ी घोषणा एनएच-8 के 130 किमी लंबे चुराईबाड़ी (असम सीमा के निकट) से चंपकनगर हिस्से को फोरलेन बनाने की रही। मंत्रालय ने राज्य सरकार के परामर्श से इस खंड का अलाइनमेंट स्वीकृत कर दिया है।

प्रस्तावित ग्रीनफील्ड फोरलेन हाईवे रेलवे लाइन के समानांतर बनेगा और इसमें अथारामुरा तथा लोंगथराई पहाड़ी श्रृंखलाओं से होकर गुजरने वाली सुरंगें शामिल होंगी। इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शीघ्र आरंभ होने की उम्मीद है।

इसके अतिरिक्त, एनएच-8 के रानीरबाजार-आईएसबीटी (चंद्रपुर) खंड के लिए राज्य सरकार ने अगस्त 2026 तक आवश्यक भूमि का 90 प्रतिशत से अधिक हस्तांतरित करने और यूटिलिटी शिफ्टिंग पूरी करने का आश्वासन दिया। इसके बाद नेशनल हाईवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHIDCL) निर्माण हेतु टेंडर जारी करेगा।

पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा: उदयपुर-अमरपुर और कमलपुर-शांतिरबाजार रोड

अगरतला-उदयपुर खंड को फोरलेन बनाने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) अंतिम चरण में है और अगस्त 2026 तक अलाइनमेंट को अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है। ट्रैफिक, पर्यटन और तीर्थयात्रा गतिविधियों में वृद्धि को देखते हुए यह खंड प्राथमिकता सूची में है।

24 किमी लंबे उदयपुर-अमरपुर रोड को एनएच-8 के स्पर के रूप में नेशनल हाईवे मानकों पर अपग्रेड करने की DPR भी लगभग तैयार है। यह सड़क माता त्रिपुरा सुंदरी मंदिर (उदयपुर) और चाबिमुरा व डंबूर झील जैसे पर्यटन स्थलों (अमरपुर) को जोड़ेगी।

इसी क्रम में, 148 किमी लंबी कमलपुर-अंबासा-गंडाचेरा-शांतिरबाजार सड़क का विकास भी सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा हाथ में लिया जाएगा। यह मार्ग पर्यटन, व्यापार और प्राकृतिक गैस पर आधारित आर्थिक गतिविधियों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताया गया है।

अगरतला बाईपास और मौजूदा हाईवे की मरम्मत

अगरतला शहर के प्रस्तावित 25 किमी लंबे वेस्टर्न बाईपास के लिए नया टेंडर जारी किया जाएगा, जिसमें सर्विस लेन भी शामिल होंगी — क्योंकि प्रस्तावित मार्ग के किनारे घनी आबादी वाले क्षेत्र हैं। लेम्बुचेरा और खैरपुर को जोड़ने वाले 10 किमी लंबे ईस्टर्न बाईपास को फोरलेन बनाने का काम मार्ग निर्धारण और भूमि अधिग्रहण पूरा होने के बाद शुरू होगा।

बैठक में एनएच-108बी के अगरतला-खोवाई खंड, एनएच-208 के कुमारघाट-कैलाशहर और कैलाशहर-खोवाई खंडों तथा एनएच-208ए के कैलाशहर-कुर्ती ब्रिज खंड की जर्जर हालत की भी समीक्षा हुई। तय किया गया कि इन सड़कों को केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CRRI) की सिफारिशों के अनुसार पुनर्निर्मित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने मानसून के दौरान बाढ़ और भूस्खलन की समस्या से निपटने के लिए हाईवे के किनारे उचित ड्रेनेज सिस्टम और रिटेनिंग वॉल निर्मित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। एनएच-208ए स्पर के कुर्ती ब्रिज-चांदखिरा खंड को मौजूदा 7 मीटर से बढ़ाकर 10 मीटर चौड़ा करने के लिए असम सरकार से संपर्क किया गया है।

बैठक में शामिल अधिकारी और आगे की राह

इस महत्वपूर्ण बैठक में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर, NHIDCL के प्रबंध निदेशक कृष्णा कुमार, त्रिपुरा लोक निर्माण विभाग के सचिव किरण गिट्टे, PWD के मुख्य अभियंता (राष्ट्रीय राजमार्ग) सुब्रत बनिक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

त्रिपुरा सरकार ने मंत्रालय को आश्वस्त किया कि सभी स्वीकृत परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण, वन विभाग की अनापत्ति और यूटिलिटी शिफ्टिंग समय पर पूरी की जाएगी। बैठक के अंत में मुख्यमंत्री साहा ने प्रतिष्ठित अगरतला रिंग रोड परियोजना सहित रिकॉर्ड संख्या में परियोजनाओं की स्वीकृति के लिए मंत्री गडकरी का विशेष आभार जताया।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की गति है — पूर्वोत्तर में भूमि अधिग्रहण और वन अनापत्ति परंपरागत रूप से सबसे बड़ी अड़चनें रही हैं। NH-8 की ग्रीनफील्ड सुरंग परियोजना महत्वाकांक्षी है, पर पहाड़ी भूगोल और भूस्खलन-प्रवण क्षेत्रों में ऐसी परियोजनाएँ अक्सर समय और लागत दोनों में बढ़ जाती हैं। अगस्त 2026 की समय-सीमाएँ कागज़ पर सटीक लगती हैं, किंतु बिना स्वतंत्र निगरानी तंत्र के ये महज़ इरादे बनकर रह सकती हैं।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गडकरी और माणिक साहा की बैठक में क्या-क्या तय हुआ?
1 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में हुई इस बैठक में एनएच-8 के फोरलेन विस्तार, अगरतला बाईपास, उदयपुर-अमरपुर रोड अपग्रेड और जर्जर हाईवे खंडों की मरम्मत सहित कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर निर्णय लिए गए। राज्य सरकार ने भूमि अधिग्रहण और यूटिलिटी शिफ्टिंग समय पर पूरी करने का आश्वासन भी दिया।
त्रिपुरा में एनएच-8 फोरलेन परियोजना क्या है?
एनएच-8 के 130 किमी लंबे चुराईबाड़ी (असम सीमा) से चंपकनगर खंड को ग्रीनफील्ड फोरलेन हाईवे के रूप में विकसित किया जाएगा। यह हाईवे रेलवे लाइन के समानांतर चलेगा और अथारामुरा व लोंगथराई पहाड़ी श्रृंखलाओं में सुरंगें शामिल होंगी।
त्रिपुरा का नेशनल हाईवे नेटवर्क कितना बड़ा हो गया है?
2014 में त्रिपुरा का NH नेटवर्क केवल 198 किमी था, जो 2026 तक बढ़कर 923 किमी हो गया है — यानी लगभग 366 प्रतिशत की वृद्धि। मुख्यमंत्री माणिक साहा ने इस विस्तार के लिए केंद्रीय मंत्री गडकरी का आभार जताया।
अगरतला बाईपास परियोजना की वर्तमान स्थिति क्या है?
अगरतला के 25 किमी लंबे वेस्टर्न बाईपास के लिए नया टेंडर जारी किया जाएगा, जिसमें सर्विस लेन भी शामिल होंगी। 10 किमी लंबे ईस्टर्न बाईपास (लेम्बुचेरा-खैरपुर) को फोरलेन बनाने का काम मार्ग निर्धारण और भूमि अधिग्रहण पूरा होने के बाद शुरू होगा।
खराब हाईवे खंडों की मरम्मत कैसे होगी?
एनएच-108बी, एनएच-208 और एनएच-208ए के जर्जर खंडों को केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CRRI) की सिफारिशों के अनुसार पुनर्निर्मित किया जाएगा। साथ ही बाढ़ और भूस्खलन रोकने के लिए उचित ड्रेनेज सिस्टम और रिटेनिंग वॉल भी बनाई जाएंगी।
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