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गडकरी का राष्ट्रीय राजमार्गों पर मानसून तैयारी का निर्देश: तेलंगाना, J&K और लद्दाख के 7,770 किमी नेटवर्क पर फोकस

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गडकरी का राष्ट्रीय राजमार्गों पर मानसून तैयारी का निर्देश: तेलंगाना, J&K और लद्दाख के 7,770 किमी नेटवर्क पर फोकस

सारांश

गडकरी ने तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के कुल 7,770 किमी राष्ट्रीय राजमार्गों पर मानसून तैयारी के सख्त निर्देश दिए। ड्रेनेज, ढलान स्थिरता और रैपिड रिस्पॉन्स सिस्टम पर फोकस — पहाड़ी और संवेदनशील क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने की बड़ी पहल।

मुख्य बातें

नितिन गडकरी ने 25 जून 2025 को राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं पर मानसून तैयारी मजबूत करने के निर्देश दिए।
समीक्षा में तेलंगाना (4,931 किमी) , जम्मू-कश्मीर (2,035 किमी) और लद्दाख (804 किमी) — कुल 7,770 किमी राजमार्ग शामिल।
NHAI और NHIDCL को ड्रेनेज प्रबंधन, स्लोप स्टेबिलाइजेशन और रैपिड रिस्पॉन्स सिस्टम तैनात करने के निर्देश।
गुणवत्ता, जवाबदेही और आधुनिक निर्माण तकनीकों को अपनाने पर विशेष जोर।
समीक्षा मीडिया रिपोर्टों, सोशल मीडिया फीडबैक और एजेंसियों की जानकारी के आधार पर की गई।

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 25 जून 2025 को अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं पर मानसून से जुड़ी तैयारियाँ तत्काल प्रभाव से मजबूत की जाएँ और खराब मौसम के कारण उत्पन्न होने वाली बाधाओं को न्यूनतम किया जाए। यह निर्देश तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में चल रही परियोजनाओं की समीक्षा बैठकों के दौरान दिए गए, जिनमें कुल 7,770 किलोमीटर के राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का आकलन किया गया।

समीक्षा का दायरा और परियोजनाएँ

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के अनुसार, इन समीक्षा बैठकों में तेलंगाना के 4,931 किलोमीटर, जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के 2,035 किलोमीटर और लद्दाख के 804 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों की गुणवत्ता, रखरखाव और निर्माण प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। यह समीक्षा मीडिया रिपोर्टों, सोशल मीडिया पर मिली जनप्रतिक्रियाओं तथा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), नेशनल हाईवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHIDCL) और परियोजना ठेकेदारों से प्राप्त जानकारी पर आधारित थी।

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में मानसून के दौरान भूस्खलन, बाढ़ और सड़क क्षति की घटनाएँ राजमार्ग परियोजनाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनती हैं। ऐसे में यह समीक्षा ऐसे समय में आई है जब देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून दस्तक दे चुका है।

मुख्य निर्देश और प्राथमिकताएँ

गडकरी ने बैठकों में अधिकारियों और कार्यान्वयन एजेंसियों को कई स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने प्रभावी ड्रेनेज प्रबंधन, ढलानों की स्थिरता (स्लोप स्टेबिलाइजेशन) और सुरक्षा कार्यों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। मौसम से जुड़ी आपात स्थितियों से निपटने के लिए रैपिड रिस्पॉन्स सिस्टम तैनात करने के भी निर्देश दिए गए।

मंत्री ने निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने, परियोजनाओं को समय पर पूरा करने और आधुनिक निर्माण तकनीकों तथा बेहतर कार्य पद्धतियों को अपनाने पर विशेष बल दिया। उनके अनुसार इन कदमों से सड़कों की मजबूती, यात्रा सुविधा और राजमार्गों का दीर्घकालिक प्रदर्शन बेहतर होगा।

गुणवत्ता और जवाबदेही पर जोर

गडकरी ने परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने की आवश्यकता रेखांकित करते हुए कहा कि गुणवत्ता और जवाबदेही के उच्चतम मानकों को बनाए रखना अनिवार्य है। उन्होंने यह भी कहा कि समय पर परियोजनाओं का पूरा होना, गुणवत्ता सुनिश्चित करना और आधुनिक इंजीनियरिंग समाधानों को अपनाना सड़क क्षेत्र की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।

आम जनता और अर्थव्यवस्था पर असर

मंत्री ने स्पष्ट किया कि अच्छी तरह से विकसित और रखरखाव वाली सड़कें क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने, आर्थिक विकास को गति देने, पर्यटन को प्रोत्साहित करने और यात्रियों की सुविधा में सुधार के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क पर निर्बाध यातायात और सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना इन निर्देशों का मूल उद्देश्य है।

आने वाले हफ्तों में MoRTH की ओर से इन तीनों क्षेत्रों में मानसून-पूर्व तैयारियों की अनुपालन रिपोर्ट अपेक्षित है, और संबंधित एजेंसियों से जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया जारी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि निर्देशों का ज़मीनी अनुपालन कितना होता है — हर साल मानसून में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के राजमार्गों पर भूस्खलन और बाढ़ से होने वाली क्षति यह बताती है कि तैयारी और क्रियान्वयन के बीच की खाई अभी पाटी नहीं गई। रैपिड रिस्पॉन्स सिस्टम की घोषणा नई नहीं है — NHAI पिछले कई वर्षों से इसे लागू करने का दावा करता आया है। बिना जवाबदेही के स्पष्ट मापदंडों और सार्वजनिक रिपोर्टिंग के, ये निर्देश हर मानसून से पहले दोहराई जाने वाली औपचारिकता बनकर रह जाते हैं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गडकरी ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर मानसून तैयारी के लिए क्या निर्देश दिए?
गडकरी ने अधिकारियों को प्रभावी ड्रेनेज प्रबंधन, ढलानों की स्थिरता (स्लोप स्टेबिलाइजेशन), सुरक्षा कार्यों को प्राथमिकता देने और मौसम आपात स्थितियों के लिए रैपिड रिस्पॉन्स सिस्टम तैनात करने के निर्देश दिए। साथ ही निगरानी व्यवस्था मजबूत करने और आधुनिक निर्माण तकनीकें अपनाने पर भी जोर दिया गया।
इस समीक्षा में कौन-से राज्य और क्षेत्र शामिल थे?
समीक्षा में तेलंगाना (4,931 किमी), जम्मू-कश्मीर (2,035 किमी) और लद्दाख (804 किमी) के राष्ट्रीय राजमार्ग शामिल थे — कुल मिलाकर 7,770 किलोमीटर का नेटवर्क। ये तीनों क्षेत्र मानसून के दौरान राजमार्ग क्षति के लिहाज से संवेदनशील माने जाते हैं।
यह समीक्षा किस आधार पर की गई?
MoRTH के अनुसार, यह समीक्षा मीडिया रिपोर्टों, सोशल मीडिया पर मिली जनप्रतिक्रियाओं तथा NHAI, NHIDCL और परियोजना ठेकेदारों से प्राप्त जानकारी के आधार पर की गई। इसका उद्देश्य परियोजनाओं की गुणवत्ता, रखरखाव और प्रगति का व्यापक आकलन करना था।
मानसून में राष्ट्रीय राजमार्गों पर क्या चुनौतियाँ होती हैं?
मानसून के दौरान भूस्खलन, बाढ़, जलजमाव और ढलान अस्थिरता राष्ट्रीय राजमार्गों — विशेषकर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में — के लिए सबसे बड़ी चुनौतियाँ हैं। इनसे यातायात बाधित होता है और बुनियादी ढाँचे को नुकसान पहुँचता है।
इन निर्देशों का आम यात्रियों पर क्या असर होगा?
यदि इन निर्देशों का सही क्रियान्वयन हो, तो मानसून के दौरान राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात अधिक सुरक्षित और निर्बाध रहेगा। इससे तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में यात्रियों, पर्यटकों और माल परिवहन को सीधा लाभ मिलेगा।
राष्ट्र प्रेस
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