तमिलनाडु CM विजय ने 10 जिलों में डेंगू नियंत्रण और नॉर्थईस्ट मानसून की तैयारी के आदेश दिए
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को राज्य के 10 जिलों में डेंगू और मौसमी बुखार के बढ़ते मामलों के बीच जिला प्रशासन को रोकथाम के उपाय तेज़ करने और नॉर्थईस्ट मानसून के लिए आपदा-प्रबंधन तैयारी मज़बूत करने के निर्देश दिए। ये आदेश चेन्नई स्थित सेक्रेटेरिएट में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में जारी किए गए।
समीक्षा बैठक और प्रभावित जिले
मुख्यमंत्री विजय ने लगातार दूसरे दिन सेक्रेटेरिएट में समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में कोयंबटूर, डिंडीगुल, इरोड, करूर, मदुरै, नीलगिरी, शिवगंगा, तेनकासी, थेनी और विरुधुनगर जिलों में सावधानी और आपदा-प्रबंधन उपायों का विस्तृत आकलन किया गया। उन्होंने जिला कलेक्टरों को प्रत्येक क्षेत्र की कमज़ोरी के अनुरूप स्थान-विशेष कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया।
पहाड़ी और भूस्खलन-संवेदनशील इलाकों पर विशेष ध्यान
मुख्यमंत्री ने नीलगिरी, कोयंबटूर, डिंडीगुल और थेनी जिलों के पर्वतीय एवं अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों पर खास ध्यान देने को कहा, जहाँ भारी बारिश से भूस्खलन, मिट्टी खिसकने और सड़क-संपर्क बाधित होने का खतरा अधिक रहता है। कलेक्टरों को निर्देश दिया गया कि भूस्खलन-संवेदनशील ढलानों और पहले से ख़तरनाक चिह्नित स्थानों पर निरंतर निगरानी सुनिश्चित की जाए। भारी बारिश से पहले और उसके दौरान निरीक्षण किए जाएँ, और अधिकारी मिट्टी में दरारें, ढलानों के हिलने तथा असामान्य रिसाव जैसे चेतावनी संकेतों पर तत्काल कार्रवाई करें।
विजय ने कोडाईकनाल में जारी मिट्टी की कील (सॉइल नेलिंग) परियोजना पर विशेष ध्यान देने को कहा और अधिकारियों से नियमित रूप से यह सुनिश्चित करने को कहा कि कोई अतिरिक्त बचाव उपाय आवश्यक तो नहीं हैं। कमज़ोर इलाकों में भूस्खलन रोधी और ढलान-स्थिरीकरण परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने का भी आदेश दिया गया।
सड़क संपर्क और आपदा-तैयारी
पहाड़ी जिलों में मुख्य सड़कों और परिवहन मार्गों पर मानसून के दौरान सतत निगरानी रखने के निर्देश दिए गए। गिरे पेड़, मिट्टी, पत्थर और अन्य मलबा हटाने के लिए आवश्यक मशीनरी, प्रशिक्षित दल और सामग्री पूर्व-तैनात करने को कहा गया, ताकि अवरुद्ध सड़कें बिना देरी के खोली जा सकें। यह ऐसे समय में आया है जब हाल के वर्षों में तमिलनाडु के पहाड़ी क्षेत्रों में मानसून-जनित भूस्खलन की घटनाएँ बार-बार सुर्खियाँ बनती रही हैं।
डेंगू नियंत्रण और स्वास्थ्य उपाय
मुख्यमंत्री ने राज्य के कुछ हिस्सों में डेंगू और मौसमी बुखार के बढ़ते मामलों की समीक्षा की। कलेक्टरों को मच्छर-नियंत्रण अभियान तेज़ करने, पनपने के स्रोत समाप्त करने, सफ़ाई-व्यवस्था में सुधार करने और स्वास्थ्य व स्थानीय प्रशासन विभागों के साथ समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। अधिकारियों को बुखार के रुझानों पर नज़र रखने, फील्ड निरीक्षण करने और यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त दवाएँ, निदान सुविधाएँ, बेड और चिकित्सा कर्मी उपलब्ध हों। मच्छरों को पनपने से रोकने और समय पर उपचार के बारे में जन-जागरूकता अभियान भी तेज़ किए जाने के निर्देश दिए गए।
बहु-विभागीय समन्वय पर ज़ोर
विजय ने स्पष्ट किया कि मानसून के दौरान जनता की सुरक्षा और जान-माल की क्षति रोकने के लिए जिला प्रशासन, स्वास्थ्य अधिकारियों, नगर निगमों, पुलिस और आपदा-प्रतिक्रिया एजेंसियों के बीच समन्वित कार्रवाई अनिवार्य है। गौरतलब है कि यह तमिलनाडु में नॉर्थईस्ट मानसून से पहले प्रशासनिक सतर्कता की एक व्यापक कवायद है, जो आमतौर पर अक्टूबर-नवंबर में तट को प्रभावित करती है। आने वाले हफ्तों में इन उपायों के क्रियान्वयन की निगरानी की जाएगी।