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मध्य रेलवे की मानसून तैयारी 2026: 117 संवेदनशील स्थानों पर 210 पंप, घाट सेक्शन में विशेष इंतज़ाम

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मध्य रेलवे की मानसून तैयारी 2026: 117 संवेदनशील स्थानों पर 210 पंप, घाट सेक्शन में विशेष इंतज़ाम

सारांश

मानसून 2026 से पहले मध्य रेलवे ने मुंबई के 117 संवेदनशील स्थानों पर 210 पंप, घाट सेक्शन में 88,000 वर्ग मीटर बोल्डर नेटिंग और ₹5.5 करोड़ का ड्रेनेज नेटवर्क तैयार किया है। चुनाभट्टी में ट्रैक 75 मिमी तक ऊँचा उठाया गया, ताकि बीते वर्ष की 272 मिमी बारिश जैसी स्थिति में भी लोकल सेवाएँ बाधित न हों।

मुख्य बातें

मध्य रेलवे ने मुंबई और उपनगरों में 117 जलभराव-संवेदनशील स्थानों की पहचान कर 210 से अधिक पंप लगाए।
सबसे संवेदनशील 18 स्थानों पर विशेष इंजीनियरिंग; चुनाभट्टी स्टेशन पर ट्रैक 70-75 मिमी तक ऊँचा।
ड्रेनेज व पाइपलाइन नेटवर्क पर लगभग ₹5.5 करोड़ खर्च; एक मीटर व्यास की पाइपलाइनें बिछाई गईं।
घाट सेक्शन में 88,000 वर्ग मीटर बोल्डर नेटिंग, 890 मीटर रॉक फॉल बैरियर, 514 रूट किमी बोल्डर फेंसिंग।
नेरल-अमन लॉज टॉय ट्रेन सेवा मानसून में बंद; अमन लॉज-माथेरान सीमित सेवा जारी रहेगी।
बीते वर्ष 26 मई को मुंबई में 272 मिमी बारिश के बावजूद केवल हार्बर लाइन पर 8-9 घंटे असर पड़ा था।

मध्य रेलवे ने मानसून 2026 से निपटने के लिए व्यापक तैयारियाँ पूरी कर ली हैं, जिसके तहत मुंबई और उपनगरीय क्षेत्रों के 117 संवेदनशील स्थानों पर 210 से अधिक उच्च क्षमता वाले पंप लगाए गए हैं और घाट सेक्शन में भूस्खलन रोकथाम के लिए विशेष इंजीनियरिंग कार्य कराए गए हैं। मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) स्वप्निल नीला ने बताया कि इस साल भी यात्रियों को सुरक्षित और सुचारू रेल सेवा उपलब्ध कराने के लिए हर मोर्चे पर इंतज़ाम किए गए हैं।

तीन प्रमुख चुनौतियाँ

नीला के अनुसार, मानसून के दौरान रेलवे को मुख्यतः तीन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है — मुंबई और उपनगरीय इलाकों में जलभराव, घाट सेक्शन में भूस्खलन व पत्थर गिरने की घटनाएँ, और महाराष्ट्र के अन्य रेल खंडों में भारी बारिश से उत्पन्न व्यवधान। उन्होंने याद दिलाया कि बीते वर्ष 26 मई को मुंबई में लगभग 272 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई थी, जब केवल चुनाभट्टी स्टेशन के पास परिचालन प्रभावित हुआ और हार्बर लाइन की सेवाओं में करीब आठ से नौ घंटे तक बदलाव करना पड़ा।

जलभराव रोकथाम के इंतज़ाम

मुंबई मंडल ने 117 संवेदनशील स्थानों की पहचान कर वहाँ अतिरिक्त कर्मचारी तैनात किए हैं और 210 से अधिक पंप लगाए हैं — कई जगहों पर दो या उससे अधिक पंप ताकि भारी बारिश के दौरान भी पानी तेज़ी से निकाला जा सके। सबसे संवेदनशील 18 स्थानों पर विशेष इंजीनियरिंग कार्य किया गया है; चुनाभट्टी स्टेशन पर ट्रैक को 70 से 75 मिलीमीटर तक ऊँचा उठाया गया है ताकि पानी ट्रैक पर जमा न हो।

ड्रेनेज और माइक्रोटनलिंग पर ₹5.5 करोड़ का निवेश

रेलवे ने लगभग ₹5.5 करोड़ की लागत से बड़े पैमाने पर पाइपलाइन और ड्रेनेज नेटवर्क विकसित किया है, जिसमें कई स्थानों पर एक मीटर व्यास की पाइपलाइनें बिछाई गई हैं। ठाणे और छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के बीच महत्वपूर्ण स्थानों पर माइक्रोटनलिंग व ड्रेनेज सुधार किया गया है, जबकि सायन, विक्रोली, कांजुरमार्ग, कुरला और तिलक नगर जैसे इलाकों में ट्रैक लिफ्टिंग व रियलाइनमेंट का काम पूरा हो चुका है।

घाट सेक्शन: रॉक फॉल बैरियर और बोल्डर नेटिंग

नीला ने बताया कि पिछले तीन वर्षों से रेलवे ने घाट सेक्शन में लगातार सुरक्षा उपाय मज़बूत किए हैं। 88,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में बोल्डर नेटिंग की गई है, 890 मीटर लंबाई में रॉक फॉल बैरियर लगाए गए हैं और 514 रूट किलोमीटर क्षेत्र में बोल्डर फेंसिंग की गई है। टनल पोर्टल्स को मज़बूत बनाया गया है, कई स्थानों पर रिटेनिंग वॉल बनाई गई हैं और कुछ जगह बोल्डर कैचिंग पिट भी तैयार किए गए हैं ताकि पत्थर ट्रैक तक न पहुँच सकें।

माथेरान टॉय ट्रेन और आगे की राह

नेरल-माथेरान रेलखंड के तीखे मोड़ और खड़ी ढलानों को देखते हुए हर साल की तरह इस बार भी मानसून के दौरान नेरल से अमन लॉज तक सेवाएँ अस्थायी रूप से बंद रहेंगी, जबकि अमन लॉज से माथेरान तक सीमित सेवा जारी रहेगी। नीला के अनुसार, भारी बारिश का दौर शुरू होते ही आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाएगी और मौसम की स्थिति के अनुसार ही परिचालन तय होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि मध्य रेलवे इस बार भी मानसून की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

और हर साल मानसून उनकी असली परीक्षा होती है। मध्य रेलवे के आँकड़े — 210 पंप, 88,000 वर्ग मीटर बोल्डर नेटिंग, ₹5.5 करोड़ का ड्रेनेज — कागज़ पर प्रभावशाली दिखते हैं, लेकिन असली कसौटी जुलाई-अगस्त की वो रातें होती हैं जब 200 मिमी से अधिक बारिश एक झटके में बरस जाती है। चुनाभट्टी जैसे स्थानों पर ट्रैक लिफ्टिंग सही दिशा में कदम है, परन्तु जलवायु परिवर्तन के दौर में 'सामान्य' मानसून का पैमाना ही बदल चुका है — ढाँचागत निवेश को इस नई वास्तविकता से मेल खाना होगा, वर्ना हर साल के 'व्यापक इंतज़ाम' सालाना अनुष्ठान बनकर रह जाएँगे।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य रेलवे ने मानसून 2026 के लिए कितने पंप और कहाँ लगाए हैं?
मध्य रेलवे के मुंबई मंडल ने 117 जलभराव-संवेदनशील स्थानों की पहचान कर वहाँ 210 से अधिक उच्च क्षमता वाले पंप लगाए हैं। कई स्थानों पर एक से अधिक पंप तैनात किए गए हैं ताकि भारी बारिश में भी पानी तेज़ी से निकाला जा सके।
चुनाभट्टी स्टेशन पर क्या विशेष कार्य किया गया है?
चुनाभट्टी स्टेशन पर ट्रैक को 70 से 75 मिलीमीटर तक ऊँचा उठाया गया है ताकि बारिश का पानी ट्रैक पर जमा न हो। बीते वर्ष 26 मई की 272 मिमी बारिश के दौरान इसी स्टेशन के पास परिचालन प्रभावित होने से हार्बर लाइन सेवाओं में 8-9 घंटे का बदलाव करना पड़ा था।
घाट सेक्शन में भूस्खलन रोकने के लिए क्या इंतज़ाम हैं?
रेलवे ने घाट सेक्शन में 88,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में बोल्डर नेटिंग, 890 मीटर लंबाई में रॉक फॉल बैरियर और 514 रूट किलोमीटर में बोल्डर फेंसिंग का काम पूरा किया है। साथ ही टनल पोर्टल्स को मज़बूत किया गया है और कई जगह बोल्डर कैचिंग पिट भी बनाए गए हैं।
क्या माथेरान टॉय ट्रेन मानसून में चलेगी?
नेरल से अमन लॉज तक टॉय ट्रेन सेवा हर साल की तरह मानसून में अस्थायी रूप से बंद रहेगी, क्योंकि यह क्षेत्र तीखे मोड़ और खड़ी ढलानों वाला है। हालाँकि अमन लॉज से माथेरान तक सीमित सेवा जारी रहेगी, और भारी बारिश शुरू होते ही आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाएगी।
ड्रेनेज नेटवर्क पर रेलवे ने कितना खर्च किया है?
मध्य रेलवे ने लगभग ₹5.5 करोड़ की लागत से बड़े पैमाने पर पाइपलाइन और ड्रेनेज नेटवर्क विकसित किया है। कई स्थानों पर एक मीटर व्यास की पाइपलाइनें बिछाई गई हैं, और ठाणे से छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के बीच माइक्रोटनलिंग व ड्रेनेज सुधार का काम भी कराया गया है।
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