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मानसून 2025: सेंट्रल रेलवे ने मुंबई में 117 जलभराव पॉइंट चिन्हित किए, 210 पंप तैनात

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मानसून 2025: सेंट्रल रेलवे ने मुंबई में 117 जलभराव पॉइंट चिन्हित किए, 210 पंप तैनात

सारांश

मानसून से पहले सेंट्रल रेलवे ने मुंबई में 10 साल के जलभराव डेटा के आधार पर 117 पॉइंट चिन्हित कर 210 पंप लगाए, घाट सेक्शन को बोल्डर-प्रूफ किया और सिग्नल को आईपी-67 तकनीक से जलरोधी बनाया — असली परीक्षा पहली भारी बारिश में होगी।

मुख्य बातें

सेंट्रल रेलवे ने मुंबई मंडल में पिछले 10 वर्षों के आँकड़ों के आधार पर 117 जलभराव पॉइंट चिन्हित किए हैं।
सभी चिन्हित स्थानों पर 210 पंप स्थापित किए गए हैं; 18 अति-संवेदनशील स्थानों पर विशेष उपाय किए गए।
चूनाभट्टी में पिछले वर्ष की जलभराव समस्या के मद्देनज़र इस वर्ष ट्रैक ऊँचा किया गया।
सिग्नल और पॉइंट मशीनों को आईपी-67 मानक के तहत जलरोधी बनाया गया; आधा मीटर पानी तक संचालन प्रभावित नहीं होगा।
घाट सेक्शनों — करजत-लोनावला और कसारा-इगतपुरी — में भूस्खलन व बोल्डर गिरने से निपटने के आधुनिक उपाय लागू।
शुक्रवार सुबह 9:10 बजे हार्बर लाइन पर तार फेंकने की घटना के बाद कुर्ला-चेंबूर के बीच अस्थायी रूप से सेवाएँ रोकी गईं, बाद में बहाल।

सेंट्रल रेलवे ने मानसून से पहले मुंबई मंडल में व्यापक तैयारी पूरी कर ली है। मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) स्वप्निल नीला ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में जलभराव की समस्या झेल चुके 117 स्थानों की पहचान की गई है और वहाँ 210 पंप स्थापित किए गए हैं। यह तैयारी मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन सेवाओं को मानसून के दौरान निर्बाध रखने के उद्देश्य से की गई है।

दो स्तरों पर तैयारी

सीपीआरओ स्वप्निल नीला के अनुसार, मानसून की तैयारी दो मोर्चों पर की जाती है। पहला मोर्चा शहरी जलभराव क्षेत्रों — जैसे मुलुंड, माटुंगा और सायन — से जुड़ा है। दूसरा मोर्चा घाट सेक्शनों — करजत से लोनावला और कसारा से इगतपुरी — की सुरक्षा से संबंधित है। इन दोनों क्षेत्रों के लिए अलग-अलग रणनीति तैयार की गई है।

संवेदनशील स्थानों पर विशेष उपाय

कुल 18 अति-संवेदनशील स्थानों पर स्थायी और अस्थायी जलभराव से निपटने के लिए विशेष इंजीनियरिंग कार्य किए गए हैं। इनमें कुछ स्थानों पर ट्रैक को ऊँचा उठाना भी शामिल है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष चूनाभट्टी क्षेत्र में गंभीर जलभराव की स्थिति बनी थी — इस वर्ष वहाँ ट्रैक उठाने का काम पूरा कर लिया गया है।

घाट सेक्शन: बोल्डर और भूस्खलन से बचाव

मानसून के दौरान घाट सेक्शनों में बोल्डर गिरने, भूस्खलन, ट्रैक वॉशआउट और भूमि धंसने जैसी चुनौतियाँ सामने आती हैं। नीला ने बताया कि पिछले दो वर्षों में किए गए आधुनिक उपायों के चलते घाट सेक्शनों में रेल संचालन बाधित नहीं हुआ और इस वर्ष भी इसी तरह के परिणाम की उम्मीद है।

सिग्नल सिस्टम को जलरोधी बनाया

पिछले वर्ष रेलवे ने सभी पॉइंट मशीनों पर आईपी-67 मानक के अनुरूप जलरोधी सुरक्षा उपाय लागू किए थे। इस तकनीक के तहत ट्रैक पर आधा मीटर तक पानी भरने पर भी सिग्नल और पॉइंट मशीनों का संचालन प्रभावित नहीं होगा। इस वर्ष सिग्नलों पर विशेष प्लास्टिक कोटिंग भी की गई है, जो अतिरिक्त सुरक्षा परत का काम करेगी।

हार्बर लाइन पर तार फेंकने की घटना

इस बीच, शुक्रवार सुबह करीब 9:10 बजे पनवेल से छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) आने वाली हार्बर लाइन की एक लोकल ट्रेन के ट्रेन मैनेजर ने सूचना दी कि किसी व्यक्ति ने ओवरहेड इलेक्ट्रिक वायर पर एक तार फेंक दिया था। इससे पैंटोग्राफ और ओवरहेड वायर के बीच उलझाव की आशंका पैदा हो गई। सुरक्षा के मद्देनज़र कुछ समय के लिए सेवाएँ रोकी गईं और कुर्ला-चेंबूर के बीच ब्लॉक लेकर मरम्मत के बाद सेवाएँ बहाल की गईं। रेलवे ने नागरिकों से अपील की है कि ऐसी लापरवाही से बचें, क्योंकि इससे हज़ारों यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ती है।

मानसून के पहले की यह व्यापक तैयारी दर्शाती है कि रेलवे ने पिछले वर्षों की खामियों से सबक लेते हुए इस बार अधिक व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाया है — अब असली परीक्षा मानसून की पहली भारी बारिश में होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मुंबईकर हर साल ऐसी घोषणाएँ सुनते आए हैं — और हर जुलाई में लोकल ट्रेनें घंटों ठप होती हैं। असली सवाल यह है कि 117 में से कितने पॉइंट पर पंप वास्तव में काम करते हैं जब एक ही रात में 200 मिमी से अधिक बारिश होती है। आईपी-67 सिग्नल तकनीक और ट्रैक उठाने के उपाय सही दिशा में हैं, लेकिन इनकी सफलता का पैमाना केवल मानसून के बाद की 'बाधित घंटों' की रिपोर्ट होगी — जो रेलवे आमतौर पर सार्वजनिक नहीं करता। पारदर्शी प्रदर्शन डेटा के बिना, यह घोषणा भी पिछले वर्षों की 'तैयारी पूरी' की कतार में जुड़ने का जोखिम रखती है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेंट्रल रेलवे ने मानसून 2025 के लिए मुंबई में क्या तैयारी की है?
सेंट्रल रेलवे ने पिछले 10 वर्षों के जलभराव डेटा के आधार पर मुंबई मंडल में 117 संवेदनशील स्थानों की पहचान की है और वहाँ 210 पंप तैनात किए हैं। इसके अलावा घाट सेक्शनों में भूस्खलन-रोधी उपाय और सिग्नल सिस्टम को जलरोधी बनाने का काम भी पूरा किया गया है।
117 जलभराव पॉइंट कहाँ-कहाँ हैं?
ये 117 स्थान मुख्य रूप से मुलुंड, माटुंगा और सायन जैसे शहरी क्षेत्रों में हैं, जहाँ पिछले एक दशक में कभी न कभी जलभराव की समस्या दर्ज हुई है। इनमें से 18 स्थानों को अति-संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है जहाँ विशेष इंजीनियरिंग उपाय किए गए हैं।
घाट सेक्शन में रेलवे ने क्या उपाय किए हैं?
करजत से लोनावला और कसारा से इगतपुरी के घाट सेक्शनों में बोल्डर गिरने, भूस्खलन, ट्रैक वॉशआउट और भूमि धंसने से निपटने के लिए आधुनिक उपाय किए गए हैं। रेलवे के अनुसार पिछले दो वर्षों में इन उपायों की वजह से घाट सेक्शन में रेल संचालन बाधित नहीं हुआ।
आईपी-67 सिग्नल तकनीक क्या है और यह कैसे काम करती है?
आईपी-67 एक अंतरराष्ट्रीय जलरोधी मानक है जिसके तहत सेंट्रल रेलवे ने सभी पॉइंट मशीनों को सुरक्षित किया है। इस तकनीक के अनुसार ट्रैक पर आधा मीटर तक पानी भरने पर भी सिग्नल और पॉइंट मशीनें सामान्य रूप से काम करती रहेंगी।
शुक्रवार को हार्बर लाइन पर क्या हुआ था?
शुक्रवार सुबह करीब 9:10 बजे पनवेल से CSMT आने वाली हार्बर लाइन ट्रेन के ट्रेन मैनेजर ने सूचना दी कि किसी ने ओवरहेड इलेक्ट्रिक वायर पर तार फेंक दिया था, जिससे पैंटोग्राफ उलझने की आशंका बनी। सुरक्षा के कारण कुछ समय सेवाएँ रोकी गईं और कुर्ला-चेंबूर के बीच ब्लॉक लेकर मरम्मत के बाद सेवाएँ बहाल की गईं।
राष्ट्र प्रेस
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