मानसून 2025: सेंट्रल रेलवे ने मुंबई में चिन्हित किए 117 जलभराव पॉइंट, 210 पंप तैनात
सारांश
मुख्य बातें
सेंट्रल रेलवे ने मानसून सीजन से पहले मुंबई मंडल में व्यापक तैयारियाँ पूरी कर ली हैं। मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) स्वप्निल नीला ने 13 जून को जानकारी दी कि पिछले 10 वर्षों के आँकड़ों के आधार पर 117 जलभराव-संभावित स्थान चिन्हित किए गए हैं और उन पर 210 पंप स्थापित किए गए हैं। घाट सेक्शनों की सुरक्षा और सिग्नल प्रणाली को भी विशेष रूप से मज़बूत किया गया है।
दो स्तरों पर तैयारी
सीपीआरओ नीला के अनुसार, मुंबई मंडल में मानसून-तैयारी दो मोर्चों पर की जाती है। पहला मोर्चा शहरी जलभराव-क्षेत्र हैं — मुलुंड, माटुंगा और सायन जैसे इलाके — जहाँ भारी बारिश में पानी ट्रैक तक पहुँचता है। दूसरा मोर्चा घाट सेक्शन हैं, जिनमें करजत से लोनावला और कसारा से इगतपुरी के बीच का मार्ग शामिल है।
इस वर्ष 18 अतिरिक्त संवेदनशील स्थान भी चिन्हित किए गए हैं, जहाँ स्थायी या अस्थायी जलभराव की आशंका अधिक रहती है। इनमें से कुछ स्थानों पर ट्रैक को ऊँचा किया गया है। विशेष रूप से चूनाभट्टी क्षेत्र में पिछले वर्ष जलभराव की गंभीर समस्या सामने आई थी; इस बार वहाँ ट्रैक-उन्नयन कार्य पूरा कर लिया गया है।
घाट सेक्शन: आधुनिक सुरक्षा उपाय
मानसून के दौरान घाट सेक्शनों में बोल्डर गिरने, भूस्खलन, ट्रैक वॉशआउट और भूमि धंसने जैसी चुनौतियाँ सामने आती हैं। रेलवे के अनुसार, पिछले दो वर्षों में अपनाए गए आधुनिक उपायों की बदौलत इन सेक्शनों में रेल संचालन बाधित नहीं हुआ और इस वर्ष भी यही लक्ष्य है।
सिग्नल और पॉइंट मशीनों को वाटरप्रूफ सुरक्षा
पिछले वर्ष रेलवे ने सभी पॉइंट मशीनों पर आईपी-67 मानक की वाटरप्रूफ सुरक्षा लागू की थी। इस मानक के तहत ट्रैक पर आधा मीटर तक पानी भर जाने पर भी सिग्नल और पॉइंट मशीनों का संचालन प्रभावित नहीं होगा। इस वर्ष सिग्नलों पर विशेष प्लास्टिक कोटिंग भी की गई है, जो उन्हें नमी और जलभराव से अतिरिक्त सुरक्षा देती है।
हार्बर लाइन पर ओएचई वायर घटना
शुक्रवार सुबह करीब 9:10 बजे पनवेल से छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) आने वाली हार्बर लाइन की एक लोकल ट्रेन के ट्रेन मैनेजर ने सूचना दी कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने ओवरहेड इलेक्ट्रिक (OHE) वायर पर एक तार फेंक दिया था। इससे पैंटोग्राफ और ओएचई वायर के बीच उलझाव की आशंका उत्पन्न हो गई।
सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कुछ समय के लिए रेल सेवाएँ रोकी गईं। इसके बाद कुर्ला और चेंबूर के बीच ब्लॉक लेकर मरम्मत कार्य किया गया और सेवाएँ बहाल कर दी गईं। रेलवे ने नागरिकों और यात्रियों से अपील की है कि वे ऐसी लापरवाही से बचें, क्योंकि इससे हज़ारों यात्रियों को असुविधा होती है और सुरक्षा जोखिम पैदा होता है।
आगे की राह
मानसून की आधिकारिक दस्तक से पहले ही सेंट्रल रेलवे की यह तैयारी दर्शाती है कि रेलवे प्रशासन पिछले वर्षों की समस्याओं से सबक लेकर प्रणालीगत सुधारों की ओर बढ़ रहा है। यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निगरानी दल तैनात रहेंगे।