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मुंबई में 250 मिमी बारिश के बावजूद पश्चिम रेलवे की लोकल सेवाएं अबाधित, सीपीआरओ ने बताई तैयारी की कहानी

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मुंबई में 250 मिमी बारिश के बावजूद पश्चिम रेलवे की लोकल सेवाएं अबाधित, सीपीआरओ ने बताई तैयारी की कहानी

सारांश

मुंबई में 250 मिमी तक बारिश, फिर भी पश्चिम रेलवे की लोकल सेवाएं नहीं रुकीं — माइक्रो टनलिंग, हाई कैपेसिटी पंप और मानसून-पूर्व तैयारी ने इस बार फर्क डाला। सीपीआरओ विनीत अभिषेक ने बताया कि सतर्क निगरानी और समर्पित स्टाफ की तैनाती ने हर संभावित व्यवधान को वक्त रहते रोका।

मुख्य बातें

4 जुलाई को मुंबई में बोरीवली–विरार के बीच 200–250 मिमी और अन्य क्षेत्रों में 150–200 मिमी बारिश दर्ज हुई।
पश्चिम रेलवे की उपनगरीय और लंबी दूरी की सभी ट्रेन सेवाएं बिना किसी बड़े व्यवधान के चलती रहीं।
मानसून-पूर्व माइक्रो टनलिंग , नए ड्रेनेज सिस्टम , नालों की सफाई और हाई कैपेसिटी पंप लगाए गए थे।
संवेदनशील स्थानों पर इंजीनियरिंग, सिग्नलिंग व ट्रैक मेंटेनेंस स्टाफ लगातार तैनात रहा।
सीपीआरओ विनीत अभिषेक ने कहा कि यात्री सुरक्षा और निर्बाध सेवा पूरे मानसून में सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।

मुंबई में 4 जुलाई को हुई मूसलाधार बारिश के बीच पश्चिम रेलवे की उपनगरीय और लंबी दूरी की ट्रेन सेवाएं बिना किसी बड़े व्यवधान के सामान्य रूप से संचालित होती रहीं। पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) विनीत अभिषेक ने बताया कि मानसून पूर्व की गई व्यापक तैयारियों और संवेदनशील स्थानों पर तैनात समर्पित कर्मचारियों की बदौलत भारी वर्षा का रेल परिचालन पर कोई उल्लेखनीय असर नहीं पड़ा।

कितनी हुई बारिश

विनीत अभिषेक ने बताया कि शनिवार को सुबह से ही लगातार भारी बारिश दर्ज की गई। बोरीवली से विरार के बीच के क्षेत्र में 200 से 250 मिमी तक वर्षा रिकॉर्ड की गई, जबकि पश्चिम रेलवे के अन्य हिस्सों में 150 से 200 मिमी बारिश हुई। इतनी अधिक वर्षा के बावजूद लोकल ट्रेनें निर्बाध चलती रहीं, जो रेलवे की पूर्व-तैयारी का प्रत्यक्ष परिणाम बताया जा रहा है।

मानसून-पूर्व तैयारी: क्या-क्या किया गया

सीपीआरओ के अनुसार, रेलवे ने पूरे वर्ष मानसून की तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया। इसके तहत माइक्रो टनलिंग, नए ड्रेनेज सिस्टम का निर्माण, नालों की नियमित सफाई और कीचड़ हटाने जैसे महत्वपूर्ण कार्य मानसून से पहले ही पूरे कर लिए गए थे। जलभराव की आशंका वाले स्थानों पर हाई कैपेसिटी पंप भी लगाए गए थे, जिनकी मदद से शनिवार को कुछ जगहों पर बने मामूली जलभराव को तेजी से निकाला गया।

मैदान पर तैनात रहा पूरा अमला

भारी बारिश के दौरान रेलवे ने सभी संवेदनशील और जलभराव की आशंका वाले स्थानों पर विशेष स्टाफ तैनात किया था। स्टेशन स्टाफ, इंजीनियरिंग विभाग, सिग्नलिंग विभाग और ट्रैक मेंटेनेंस से जुड़े कर्मचारी लगातार मौके पर मौजूद रहे। महत्वपूर्ण पुलों, ट्रैक और अन्य संवेदनशील स्थानों की निरंतर निगरानी की गई ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल निर्णय लिया जा सके।

यात्री सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन

विनीत अभिषेक ने बताया कि भारी बारिश के दौरान स्टेशनों पर अतिरिक्त भीड़ जमा होने की संभावना को देखते हुए प्रमुख और भीड़भाड़ वाले स्टेशनों पर विभिन्न विभागों के इमरजेंसी स्टाफ को पहले से तैनात किया गया था। ये कर्मचारी यात्रियों को समय पर जानकारी देने, भीड़ नियंत्रित करने और व्यवस्था बनाए रखने के लिए सक्रिय रहे।

आगे की योजना

रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मानसून के पूरे मौसम में यात्रियों की सुरक्षा और निर्बाध रेल सेवा सुनिश्चित करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी। गौरतलब है कि मुंबई में मानसून के दौरान रेल सेवाओं का बाधित होना एक पुरानी समस्या रही है, और इस वर्ष की तैयारी उस परंपरागत चुनौती से निपटने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसलिए इस बार की निर्बाध सेवा को महज़ सामान्य उपलब्धि नहीं माना जाना चाहिए। माइक्रो टनलिंग और हाई कैपेसिटी पंप जैसे उपाय तभी टिकाऊ साबित होंगे जब इनका रखरखाव साल-दर-साल जारी रहे, न कि केवल मानसून-पूर्व अभियान के रूप में। असली कसौटी यह है कि क्या यही तैयारी अगस्त-सितंबर की और भी तीव्र वर्षा में कायम रहती है, जब ऐतिहासिक रूप से सबसे ज़्यादा व्यवधान आते हैं। यात्रियों के लिए राहत की बात है, लेकिन एक सफल शनिवार पूरे मानसून सीज़न की गारंटी नहीं है।
RashtraPress
5 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

4 जुलाई को मुंबई में कितनी बारिश हुई और रेलवे सेवाओं पर क्या असर पड़ा?
4 जुलाई को बोरीवली से विरार के बीच 200 से 250 मिमी और अन्य क्षेत्रों में 150 से 200 मिमी बारिश दर्ज हुई। इसके बावजूद पश्चिम रेलवे की उपनगरीय और लंबी दूरी की ट्रेन सेवाएं बिना किसी बड़े व्यवधान के चलती रहीं।
पश्चिम रेलवे ने मानसून से पहले कौन-सी तैयारियाँ की थीं?
रेलवे ने माइक्रो टनलिंग, नए ड्रेनेज सिस्टम का निर्माण, नालों की नियमित सफाई, कीचड़ हटाने का काम और हाई कैपेसिटी पंपों की स्थापना मानसून से पहले ही पूरी कर ली थी। इन उपायों की वजह से शनिवार को मामूली जलभराव को तेजी से निकाला जा सका।
भारी बारिश के दौरान स्टेशनों पर भीड़ प्रबंधन कैसे किया गया?
प्रमुख और भीड़भाड़ वाले स्टेशनों पर विभिन्न विभागों के इमरजेंसी स्टाफ को पहले से तैनात किया गया था। ये कर्मचारी यात्रियों को जानकारी देने, भीड़ नियंत्रित करने और व्यवस्था बनाए रखने के लिए सक्रिय रहे।
पश्चिम रेलवे के सीपीआरओ विनीत अभिषेक ने क्या कहा?
सीपीआरओ विनीत अभिषेक ने बताया कि मानसून-पूर्व व्यापक तैयारियों और संवेदनशील स्थानों पर समर्पित कर्मचारियों की तैनाती के चलते भारी बारिश का ट्रेन परिचालन पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा। उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा और निर्बाध रेल सेवा पूरे मानसून सीज़न में सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी।
क्या मुंबई में मानसून के दौरान रेल सेवाएं हमेशा बाधित होती हैं?
मुंबई में मानसून के दौरान रेल सेवाओं का बाधित होना ऐतिहासिक रूप से एक बड़ी चुनौती रही है। इस वर्ष माइक्रो टनलिंग और बेहतर ड्रेनेज व्यवस्था की बदौलत 4 जुलाई को 250 मिमी तक बारिश के बावजूद सेवाएं सामान्य रहीं, जिसे रेलवे की तैयारी में सुधार का संकेत माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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