नितिन गडकरी ने महाराष्ट्र के नए हाईवे प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की, 527 किमी BOT कॉरिडोर पर चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार, 4 मई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में महाराष्ट्र के प्रस्तावित हाई-स्पीड कॉरिडोर, हाई-डेंसिटी कॉरिडोर और अन्य राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, बैठक का मुख्य उद्देश्य परियोजनाओं की योजना और क्रियान्वयन में तेज़ी लाना था, ताकि क्षेत्र में सड़क संपर्क सुदृढ़ हो और आर्थिक विकास को गति मिले।
मुख्य राजमार्ग परियोजनाएँ
बैठक में कई प्रमुख हाईवे विकास परियोजनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। इनमें नागपुर-भंडारा सेक्शन को छह लेन का बनाना, तलोदा-बुरहानपुर सेक्शन को चार लेन करना, दुर्ग-गडचिरोली-मंचेरियल कॉरिडोर, गडचिरोली-कांकेर (रायपुर-विशाखापट्टनम) कॉरिडोर, ग्वालियर-नागपुर कॉरिडोर और नागपुर-हैदराबाद कॉरिडोर शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, भंडारा-रायपुर सेक्शन को छह लेन करने, लखनादौन-दुर्ग-रायपुर कॉरिडोर, नागपुर-अमरावती सेक्शन को छह लेन बनाने, राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर मध्य प्रदेश-महाराष्ट्र सीमा-नागपुर बायपास-बोरखेड़ी खंड, और पुणे-सातारा सेक्शन को छह लेन बनाने के प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई।
527 किमी के BOT प्रोजेक्ट्स पर विचार
बैठक में महाराष्ट्र के राष्ट्रीय राजमार्गों पर कुल 527 किलोमीटर लंबाई के नौ राज्य-स्तरीय बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) प्रोजेक्ट्स पर भी विचार किया गया। इन परियोजनाओं में शिरूर-अहिल्यानगर (चार लेन), अहिल्यानगर-वडाला (चार लेन), वडाला-छत्रपति संभाजीनगर (चार लेन), छत्रपति संभाजीनगर-जालना (चार लेन), जालना-वातुर (चार लेन), नांदेड़-नरसी-देगलूर (चार और दो लेन), जाम-वरोरा (चार लेन), वरोरा-चंद्रपुर-बामनी (चार लेन) और मल्कापुर-चिखली (दो लेन) कॉरिडोर शामिल हैं।
भारत का सड़क नेटवर्क: एक दशक में ऐतिहासिक विस्तार
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 11 वर्षों में भारत का सड़क नेटवर्क तेज़ी से विस्तारित हुआ है और अब यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा नेटवर्क बन चुका है। राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई 2014 में 91,287 किलोमीटर से बढ़कर 2025 में 1,46,560 किलोमीटर हो गई है — यह करीब 61 प्रतिशत की वृद्धि है।
पिछले पाँच वर्षों में केंद्र सरकार ने 57,125 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया है, जिसमें प्रतिवर्ष औसतन 34,215 लेन-किलोमीटर का निर्माण हुआ है। गौरतलब है कि एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर और एक्सप्रेसवे की लंबाई 2014 में मात्र 93 किलोमीटर थी, जो 2025 के अंत तक बढ़कर 3,052 किलोमीटर हो गई है।
रोज़गार और आर्थिक प्रभाव
संसद में हाल ही में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, सड़क निर्माण की इस रफ़्तार से प्रतिवर्ष करीब 33 करोड़ व्यक्ति-दिवस का रोज़गार सृजन हुआ है, जिसमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह के रोज़गार शामिल हैं। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार बुनियादी ढाँचे को आर्थिक विकास के प्रमुख चालक के रूप में स्थापित कर रही है।
महाराष्ट्र की ये परियोजनाएँ न केवल राज्य के भीतर कनेक्टिविटी सुधारेंगी, बल्कि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों के साथ सड़क संपर्क को भी मज़बूत करेंगी। आने वाले महीनों में परियोजनाओं के क्रियान्वयन की प्रगति पर नज़र रखी जाएगी।