नितिन गडकरी ने महाराष्ट्र के नए हाईवे प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की, 527 किमी BOT कॉरिडोर पर चर्चा

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नितिन गडकरी ने महाराष्ट्र के नए हाईवे प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की, 527 किमी BOT कॉरिडोर पर चर्चा

सारांश

नितिन गडकरी ने नई दिल्ली में महाराष्ट्र के दर्जनों हाईवे प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की — 527 किमी के नौ BOT कॉरिडोर से लेकर नागपुर-हैदराबाद और पुणे-सातारा जैसे बड़े रूट तक। यह बैठक उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत भारत का राजमार्ग नेटवर्क 2014 से अब तक 61% बढ़ चुका है।

मुख्य बातें

नितिन गडकरी ने 4 मई 2026 को नई दिल्ली में महाराष्ट्र के हाई-स्पीड और हाई-डेंसिटी कॉरिडोर परियोजनाओं की समीक्षा की।
महाराष्ट्र में कुल 527 किलोमीटर लंबाई के 9 BOT प्रोजेक्ट्स पर विचार-विमर्श हुआ।
प्रमुख परियोजनाओं में नागपुर-हैदराबाद , ग्वालियर-नागपुर , पुणे-सातारा (छह लेन) और नागपुर-भंडारा (छह लेन) कॉरिडोर शामिल हैं।
भारत का राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क 2014 के 91,287 किमी से बढ़कर 2025 में 1,46,560 किमी हो गया — 61% की वृद्धि।
पिछले पाँच वर्षों में सड़क निर्माण से प्रतिवर्ष करीब 33 करोड़ व्यक्ति-दिवस रोज़गार सृजित हुआ।
एक्सप्रेसवे नेटवर्क 2014 के 93 किमी से बढ़कर 2025 में 3,052 किमी हो गया।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार, 4 मई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में महाराष्ट्र के प्रस्तावित हाई-स्पीड कॉरिडोर, हाई-डेंसिटी कॉरिडोर और अन्य राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, बैठक का मुख्य उद्देश्य परियोजनाओं की योजना और क्रियान्वयन में तेज़ी लाना था, ताकि क्षेत्र में सड़क संपर्क सुदृढ़ हो और आर्थिक विकास को गति मिले।

मुख्य राजमार्ग परियोजनाएँ

बैठक में कई प्रमुख हाईवे विकास परियोजनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। इनमें नागपुर-भंडारा सेक्शन को छह लेन का बनाना, तलोदा-बुरहानपुर सेक्शन को चार लेन करना, दुर्ग-गडचिरोली-मंचेरियल कॉरिडोर, गडचिरोली-कांकेर (रायपुर-विशाखापट्टनम) कॉरिडोर, ग्वालियर-नागपुर कॉरिडोर और नागपुर-हैदराबाद कॉरिडोर शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, भंडारा-रायपुर सेक्शन को छह लेन करने, लखनादौन-दुर्ग-रायपुर कॉरिडोर, नागपुर-अमरावती सेक्शन को छह लेन बनाने, राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर मध्य प्रदेश-महाराष्ट्र सीमा-नागपुर बायपास-बोरखेड़ी खंड, और पुणे-सातारा सेक्शन को छह लेन बनाने के प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई।

527 किमी के BOT प्रोजेक्ट्स पर विचार

बैठक में महाराष्ट्र के राष्ट्रीय राजमार्गों पर कुल 527 किलोमीटर लंबाई के नौ राज्य-स्तरीय बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) प्रोजेक्ट्स पर भी विचार किया गया। इन परियोजनाओं में शिरूर-अहिल्यानगर (चार लेन), अहिल्यानगर-वडाला (चार लेन), वडाला-छत्रपति संभाजीनगर (चार लेन), छत्रपति संभाजीनगर-जालना (चार लेन), जालना-वातुर (चार लेन), नांदेड़-नरसी-देगलूर (चार और दो लेन), जाम-वरोरा (चार लेन), वरोरा-चंद्रपुर-बामनी (चार लेन) और मल्कापुर-चिखली (दो लेन) कॉरिडोर शामिल हैं।

भारत का सड़क नेटवर्क: एक दशक में ऐतिहासिक विस्तार

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 11 वर्षों में भारत का सड़क नेटवर्क तेज़ी से विस्तारित हुआ है और अब यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा नेटवर्क बन चुका है। राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई 2014 में 91,287 किलोमीटर से बढ़कर 2025 में 1,46,560 किलोमीटर हो गई है — यह करीब 61 प्रतिशत की वृद्धि है।

पिछले पाँच वर्षों में केंद्र सरकार ने 57,125 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया है, जिसमें प्रतिवर्ष औसतन 34,215 लेन-किलोमीटर का निर्माण हुआ है। गौरतलब है कि एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर और एक्सप्रेसवे की लंबाई 2014 में मात्र 93 किलोमीटर थी, जो 2025 के अंत तक बढ़कर 3,052 किलोमीटर हो गई है।

रोज़गार और आर्थिक प्रभाव

संसद में हाल ही में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, सड़क निर्माण की इस रफ़्तार से प्रतिवर्ष करीब 33 करोड़ व्यक्ति-दिवस का रोज़गार सृजन हुआ है, जिसमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह के रोज़गार शामिल हैं। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार बुनियादी ढाँचे को आर्थिक विकास के प्रमुख चालक के रूप में स्थापित कर रही है।

महाराष्ट्र की ये परियोजनाएँ न केवल राज्य के भीतर कनेक्टिविटी सुधारेंगी, बल्कि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों के साथ सड़क संपर्क को भी मज़बूत करेंगी। आने वाले महीनों में परियोजनाओं के क्रियान्वयन की प्रगति पर नज़र रखी जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर BOT मॉडल की सफलता निजी निवेशकों की भागीदारी पर निर्भर करती है, जो टोल राजस्व की अनिश्चितता के चलते अक्सर सतर्क रहते हैं। 527 किमी के नौ BOT कॉरिडोर महत्वाकांक्षी हैं, लेकिन जब तक वित्तीय बंद और भूमि अधिग्रहण की स्थिति स्पष्ट नहीं होती, ये परियोजनाएँ कागज़ पर ही रह सकती हैं।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नितिन गडकरी ने महाराष्ट्र के किन हाईवे प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की?
4 मई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित बैठक में गडकरी ने नागपुर-हैदराबाद, ग्वालियर-नागपुर, पुणे-सातारा (छह लेन), नागपुर-भंडारा (छह लेन) सहित कई हाई-स्पीड और हाई-डेंसिटी कॉरिडोर परियोजनाओं की समीक्षा की। इसके अलावा 527 किमी के नौ BOT प्रोजेक्ट्स पर भी चर्चा हुई।
महाराष्ट्र में BOT हाईवे प्रोजेक्ट्स क्या हैं?
BOT यानी बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर मॉडल के तहत निजी कंपनियाँ सड़क बनाती हैं, संचालन करती हैं और एक निश्चित अवधि बाद सरकार को सौंप देती हैं। महाराष्ट्र में 527 किमी के नौ ऐसे प्रोजेक्ट्स प्रस्तावित हैं, जिनमें शिरूर-अहिल्यानगर से लेकर वरोरा-चंद्रपुर-बामनी तक के कॉरिडोर शामिल हैं।
भारत का राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क 2014 से 2025 के बीच कितना बढ़ा?
सड़क परिवहन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क 2014 के 91,287 किमी से बढ़कर 2025 में 1,46,560 किमी हो गया — यह करीब 61% की वृद्धि है। एक्सप्रेसवे नेटवर्क इसी अवधि में 93 किमी से बढ़कर 3,052 किमी हो गया।
इन हाईवे परियोजनाओं से रोज़गार पर क्या असर पड़ेगा?
संसद में पेश आंकड़ों के अनुसार, सड़क निर्माण की मौजूदा गति से प्रतिवर्ष करीब 33 करोड़ व्यक्ति-दिवस का रोज़गार सृजन हो रहा है, जिसमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह के रोज़गार शामिल हैं। महाराष्ट्र की नई परियोजनाओं से इस आंकड़े में और वृद्धि अपेक्षित है।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य क्या है?
आधिकारिक बयान के अनुसार, इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य महाराष्ट्र में सड़क संपर्क को मज़बूत करना और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। ये परियोजनाएँ महाराष्ट्र को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से बेहतर तरीके से जोड़ेंगी।
राष्ट्र प्रेस
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