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भारत का सीफूड निर्यात एक दशक में 70% बढ़ा, पीयूष गोयल ने रखा 30 अरब डॉलर का लक्ष्य

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भारत का सीफूड निर्यात एक दशक में 70% बढ़ा, पीयूष गोयल ने रखा 30 अरब डॉलर का लक्ष्य

सारांश

भारत का सीफूड निर्यात एक दशक में 70% बढ़ चुका है — और अब सरकार की नज़र 30 अरब डॉलर के लक्ष्य पर है। विशाखापट्टनम कार्यशाला में पीयूष गोयल, चंद्रबाबू नायडू और तीन केंद्रीय मंत्रियों ने मिलकर वैल्यू एडिशन, FTA बाज़ारों और PLI विस्तार को भारत की अगली बड़ी निर्यात छलाँग का आधार बताया।

मुख्य बातें

भारत का सीफूड निर्यात पिछले दस वर्षों में करीब 70% बढ़ा है।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने अगले 5 वर्षों में निर्यात को 30 अरब डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा।
वर्तमान में भारत का समुद्री उत्पाद निर्यात ₹73,890 करोड़ (8.46 अरब डॉलर) है; वैश्विक हिस्सेदारी लगभग 4% ।
मछली उत्पादन 2012-13 के 95.8 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 198 लाख टन हुआ।
फ्रोजन झींगा भारत का सबसे बड़ा समुद्री निर्यात उत्पाद बना हुआ है।
PMMSY और PMKSSSY 2.0 के ज़रिए टिकाऊ एक्वाकल्चर और निर्यात बुनियादी ढाँचे को बढ़ावा दिया जा रहा है।

भारत के समुद्री उत्पाद (सीफूड) निर्यात ने पिछले दस वर्षों में करीब 70 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है और केंद्र सरकार अब अगले पाँच वर्षों में इसे 30 अरब डॉलर तक पहुँचाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने यह घोषणा विशाखापट्टनम में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय समुद्री उत्पाद निर्यात कार्यशाला के दौरान की।

कार्यशाला का आयोजन और उद्देश्य

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग ने मत्स्य पालन विभाग और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सहयोग से 5-6 जून 2026 को यह राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की। इसका मुख्य उद्देश्य मूल्य संवर्धन, टिकाऊ उत्पादन, बेहतर बाज़ार पहुँच, नवाचार और आधुनिक बुनियादी ढाँचे के माध्यम से भारत के सीफूड निर्यात को नई ऊँचाइयों तक ले जाना था।

कार्यशाला में समुद्री उत्पाद उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ, निर्यातक, स्टार्टअप, शोधकर्ता और किसान शामिल हुए। बीमारी प्रबंधन, उत्पादन लागत, गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता, कोल्ड चेन नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स, प्रमाणन, ट्रेसबिलिटी और अंतरराष्ट्रीय मानकों जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

पीयूष गोयल की मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत वर्तमान में वैश्विक सीफूड व्यापार में लगभग 4 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है। उन्होंने उद्योग जगत, निर्यातकों और किसानों से मिलकर काम करने का आह्वान किया ताकि यह हिस्सेदारी और बढ़ाई जा सके।

गोयल ने रेडी-टू-ईट और रेडी-टू-कुक जैसे वैल्यू एडेड उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ाने पर ज़ोर दिया। साथ ही हाल के वर्षों में भारत द्वारा किए गए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) से खुले नए बाज़ारों का लाभ उठाने की बात भी कही।

राज्य और केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि उनका राज्य मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर में देश का अग्रणी केंद्र है और भारत के कुल समुद्री उत्पाद निर्यात में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने नवाचार, ब्रांडिंग, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और उद्योगों के सहयोग से आंध्र प्रदेश को वैश्विक समुद्री उत्पाद निर्यात हब बनाने की प्रतिबद्धता जताई।

केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्री राजीव रंजन सिंह ने बताया कि देश में मछली उत्पादन 2012-13 के 95.8 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में लगभग 198 लाख टन तक पहुँच गया है। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत का समुद्री उत्पाद निर्यात करीब ₹73,890 करोड़ (8.46 अरब डॉलर) तक पहुँच चुका है। उन्होंने बताया कि फ्रोजन झींगा अभी भी भारत का सबसे बड़ा समुद्री निर्यात उत्पाद बना हुआ है।

केंद्रीय नागर विमानन मंत्री किंजारापु राममोहन नायडू ने उच्च मूल्य वाले समुद्री उत्पादों के निर्यात के लिए मज़बूत एयर कार्गो और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि सरकार कार्गो इंफ्रास्ट्रक्चर और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को मज़बूत करने पर काम कर रही है।

सरकारी योजनाएँ और नीतिगत दिशा

सरकार प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) और PMKSSSY 2.0 जैसी योजनाओं के माध्यम से निर्यातोन्मुखी बुनियादी ढाँचे, ट्रेसबिलिटी और टिकाऊ एक्वाकल्चर को बढ़ावा दे रही है। कार्यशाला के दूसरे दिन ट्रेसबिलिटी सिस्टम, टिकाऊ प्रमाणन, निर्यात प्रोत्साहन, गहरे समुद्र में मत्स्य पालन, वैल्यू एडिशन और संभावित PLI योजना जैसे विषयों पर तकनीकी सत्र भी आयोजित किए गए।

प्रतिभागियों ने स्टार्टअप और MSME को प्रोत्साहन देने, नए निर्यात बाज़ार तलाशने और टिकाऊ मत्स्य पालन पद्धतियों को अपनाने पर ज़ोर दिया। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक सीफूड बाज़ार में प्रतिस्पर्धा तेज़ हो रही है और भारत अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए नीतिगत और ढाँचागत सुधारों पर एक साथ काम कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन वैश्विक सीफूड बाज़ार में भारत की मात्र 4% हिस्सेदारी यह बताती है कि अभी कितनी ज़मीन बाकी है। 30 अरब डॉलर का लक्ष्य मौजूदा 8.46 अरब डॉलर से लगभग साढ़े तीन गुना छलाँग माँगता है — जो FTA बाज़ारों और PLI विस्तार की सद्इच्छाओं से कहीं अधिक की माँग करता है। असली परीक्षा कोल्ड चेन, ट्रेसबिलिटी और बीमारी प्रबंधन जैसी बुनियादी चुनौतियों को हल करने में है, जिन पर कार्यशाला में चर्चा तो हुई, पर ठोस समयसीमा नदारद रही। बिना मापने योग्य मील के पत्थरों के, यह लक्ष्य भी पिछली महत्वाकांक्षी घोषणाओं की कतार में खड़ा होने का जोखिम उठाता है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का समुद्री उत्पाद निर्यात अभी कितना है और लक्ष्य क्या है?
वर्तमान में भारत का समुद्री उत्पाद निर्यात करीब ₹73,890 करोड़ (8.46 अरब डॉलर) है। सरकार का लक्ष्य अगले पाँच वर्षों में इसे 30 अरब डॉलर तक पहुँचाना है, जो मौजूदा स्तर से लगभग साढ़े तीन गुना अधिक है।
विशाखापट्टनम में आयोजित सीफूड निर्यात कार्यशाला का उद्देश्य क्या था?
5-6 जून 2026 को आयोजित इस दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्देश्य मूल्य संवर्धन, टिकाऊ उत्पादन, बेहतर बाज़ार पहुँच, नवाचार और आधुनिक बुनियादी ढाँचे के ज़रिए भारत के सीफूड निर्यात को बढ़ावा देना था। इसमें निर्यातकों, स्टार्टअप, शोधकर्ताओं और किसानों ने भाग लिया।
भारत में मछली उत्पादन कितना बढ़ा है?
देश में मछली उत्पादन 2012-13 के 95.8 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में लगभग 198 लाख टन हो गया है। यह करीब दोगुनी वृद्धि है, जो भारत को विश्व के प्रमुख मत्स्य उत्पादक देशों में शामिल करती है।
आंध्र प्रदेश सीफूड निर्यात में क्या भूमिका निभाता है?
आंध्र प्रदेश मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर में देश का अग्रणी राज्य है और भारत के कुल समुद्री उत्पाद निर्यात में उसकी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने राज्य को वैश्विक सीफूड निर्यात हब बनाने की प्रतिबद्धता जताई है।
सरकार सीफूड निर्यात बढ़ाने के लिए कौन-सी योजनाएँ चला रही है?
सरकार प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) और PMKSSSY 2.0 के ज़रिए निर्यातोन्मुखी बुनियादी ढाँचे, ट्रेसबिलिटी और टिकाऊ एक्वाकल्चर को बढ़ावा दे रही है। इसके अलावा FTA बाज़ारों का लाभ उठाने और संभावित PLI योजना के विस्तार पर भी विचार किया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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