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भारत की ब्लू इकोनॉमी बनी विकास इंजन: सीफूड निर्यात ₹73,890 करोड़ के रिकॉर्ड पर, गोयल का दावा

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भारत की ब्लू इकोनॉमी बनी विकास इंजन: सीफूड निर्यात ₹73,890 करोड़ के रिकॉर्ड पर, गोयल का दावा

सारांश

भारत की ब्लू इकोनॉमी अब सिर्फ़ नारा नहीं, आँकड़ों में दिख रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में सीफूड निर्यात ₹73,890 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा, फ्रोजन झींगा ने अकेले 66.5% योगदान दिया और अमेरिका सबसे बड़ा खरीदार बना रहा। पीयूष गोयल ने इसे विकास का शक्तिशाली इंजन बताया, हालाँकि अमेरिकी बाज़ार में हल्की गिरावट चिंता का संकेत भी है।

मुख्य बातें

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का सीफूड निर्यात ₹73,890 करोड़ ( 8.46 अरब डॉलर ) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा।
कुल निर्यात मात्रा 19.72 लाख मीट्रिक टन — अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन (MPEDA आँकड़े)।
2013-14 की तुलना में सीफूड निर्यात में लगभग 145% वृद्धि।
फ्रोजन झींगा से ₹49,038 करोड़ की आय — कुल विदेशी मुद्रा का 66.5% ; निर्यात 7.93 लाख मीट्रिक टन ।
अमेरिका सबसे बड़ा बाज़ार ( 2.33 अरब डॉलर ), लेकिन पिछले वर्ष की तुलना में मात्रा और मूल्य दोनों में गिरावट।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार, 3 जून को कहा कि भारत की ब्लू इकोनॉमी (समुद्री अर्थव्यवस्था) तेजी से विकास के एक शक्तिशाली इंजन के रूप में उभर रही है, क्योंकि वित्त वर्ष 2025-26 में देश का समुद्री खाद्य (सीफूड) निर्यात ₹73,890 करोड़ (8.46 अरब डॉलर) के अब तक के सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँच गया है। मंत्री के अनुसार, वित्त वर्ष 2013-14 की तुलना में सीफूड निर्यात में लगभग 145 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसका सीधा लाभ देश के मछुआरों और तटीय अर्थव्यवस्था को मिल रहा है।

रिकॉर्ड निर्यात के आँकड़े

समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (MPEDA) के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत ने 19.72 लाख मीट्रिक टन समुद्री उत्पादों का निर्यात किया, जिसकी कुल कीमत ₹73,890 करोड़ रही। यह इस क्षेत्र का अब तक का सबसे बड़ा निर्यात प्रदर्शन है, और मात्रा एवं मूल्य दोनों लिहाज़ से एक नया कीर्तिमान है।

MPEDA के चेयरमैन पी. जवाहर ने आँकड़ों की घोषणा करते हुए कहा कि यह उपलब्धि वैश्विक बाज़ार में माँग के उतार-चढ़ाव और व्यापारिक अनिश्चितताओं जैसी कई चुनौतियों के बावजूद हासिल की गई है।

गोयल का बयान

गोयल ने कहा, “हमारे मछुआरों को नए बाज़ारों और बढ़ते निर्यात का लाभ मिल रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में समुद्री खाद्य निर्यात ने नया रिकॉर्ड बनाया है। वित्त वर्ष 2013-14 से निर्यात में लगभग 145 प्रतिशत की वृद्धि के साथ भारत की ब्लू इकोनॉमी विकास के एक शक्तिशाली इंजन के रूप में उभर रही है।”

फ्रोजन झींगा का दबदबा

भारत के समुद्री खाद्य निर्यात में फ्रोजन झींगा का दबदबा बना रहा और कुल निर्यात आय का दो-तिहाई से अधिक हिस्सा इसी उत्पाद से आया। फ्रोजन झींगा के निर्यात से ₹49,038 करोड़ (5.62 अरब डॉलर) की आय हुई, जो कुल सीफूड निर्यात से होने वाली विदेशी मुद्रा आय का 66.5 प्रतिशत है।

फ्रोजन झींगा का निर्यात बढ़कर 7.93 लाख मीट्रिक टन तक पहुँच गया। इस उत्पाद का सबसे बड़ा खरीदार अमेरिका रहा, जबकि चीन और यूरोपीय संघ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे।

अमेरिकी बाज़ार और चुनौतियाँ

मूल्य के लिहाज़ से अमेरिका भारत का सबसे बड़ा समुद्री खाद्य बाज़ार बना रहा और उसने 2.33 अरब डॉलर मूल्य के भारतीय समुद्री उत्पादों का आयात किया। हालाँकि, पिछले वित्त वर्ष की तुलना में अमेरिका को होने वाले निर्यात की मात्रा और मूल्य दोनों में कुछ गिरावट दर्ज की गई, जो बदलती बाज़ार परिस्थितियों और कीमतों पर दबाव को दर्शाती है।

आगे क्या

यह आँकड़े ऐसे समय में आए हैं जब वैश्विक व्यापार टैरिफ अनिश्चितताओं और मुद्रा उतार-चढ़ाव से जूझ रहा है। गौरतलब है कि सीफूड क्षेत्र का प्रदर्शन तटीय राज्यों — विशेषकर आंध्र प्रदेश, ओडिशा, केरल और गुजरात — के मछुआरों के रोज़गार और आय से सीधे जुड़ा है, जिससे आने वाले वर्षों में इसके विविधीकरण पर सरकार का ज़ोर और बढ़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

890 करोड़ का रिकॉर्ड प्रभावशाली है, लेकिन ब्लू इकोनॉमी की असली परीक्षा विविधीकरण में है — जब दो-तिहाई कमाई अकेले फ्रोजन झींगा से और एक-तिहाई बाज़ार सिर्फ़ अमेरिका से आती है, तो यह 'मज़बूती' से अधिक 'एकाग्रता जोखिम' है। अमेरिकी निर्यात में गिरावट इसी कमज़ोरी का पहला संकेत है — टैरिफ बदलाव या एंटी-डंपिंग जाँच पूरे क्षेत्र को हिला सकती है। सरकार को अब झींगा-केंद्रित नीति से आगे बढ़कर टूना, स्क्विड और मूल्य-वर्धित प्रसंस्करण पर निवेश करना होगा, वरना अगले रिकॉर्ड की बुनियाद उतनी ही नाज़ुक रहेगी।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का सीफूड निर्यात कितना रहा?
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 19.72 लाख मीट्रिक टन समुद्री उत्पादों का निर्यात किया, जिसकी कुल कीमत ₹73,890 करोड़ (8.46 अरब डॉलर) रही। यह मात्रा और मूल्य दोनों लिहाज़ से अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन है।
पीयूष गोयल ने ब्लू इकोनॉमी पर क्या कहा?
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 3 जून को कहा कि भारत की ब्लू इकोनॉमी विकास के एक शक्तिशाली इंजन के रूप में उभर रही है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2013-14 की तुलना में सीफूड निर्यात में लगभग 145 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
भारत के सीफूड निर्यात में फ्रोजन झींगा की हिस्सेदारी कितनी है?
फ्रोजन झींगा के निर्यात से ₹49,038 करोड़ (5.62 अरब डॉलर) की आय हुई, जो कुल सीफूड निर्यात से होने वाली विदेशी मुद्रा आय का 66.5 प्रतिशत है। इसका निर्यात बढ़कर 7.93 लाख मीट्रिक टन तक पहुँच गया है।
भारतीय समुद्री उत्पादों का सबसे बड़ा खरीदार कौन-सा देश है?
मूल्य के लिहाज़ से अमेरिका भारत का सबसे बड़ा सीफूड बाज़ार बना रहा, जिसने 2.33 अरब डॉलर मूल्य के उत्पाद आयात किए। हालाँकि पिछले वित्त वर्ष की तुलना में अमेरिका को निर्यात की मात्रा और मूल्य दोनों में कुछ गिरावट दर्ज की गई।
फ्रोजन झींगा के बाद भारत के अन्य बड़े सीफूड बाज़ार कौन-से हैं?
फ्रोजन झींगा के मामले में अमेरिका सबसे बड़ा खरीदार है, जबकि चीन दूसरे और यूरोपीय संघ तीसरे स्थान पर है। ये तीन बाज़ार मिलकर भारत के झींगा निर्यात का बड़ा हिस्सा अवशोषित करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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