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क्या गढ़वाल से यूएई भेजी गई सेब की पहली खेप ने किसानों को नई उम्मीद दी?

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क्या गढ़वाल से यूएई भेजी गई सेब की पहली खेप ने किसानों को नई उम्मीद दी?

सारांश

गढ़वाल से पहली बार यूएई भेजे गए सेब ने किसानों को नई उम्मीद दी है। भाजपा सांसद अनिल बलूनी ने इस उपलब्धि पर किसानों को बधाई दी और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का आभार व्यक्त किया। यह कदम उत्तराखंड के कृषि निर्यात को नई दिशा दे सकता है।

मुख्य बातें

गढ़वाल से सेब का निर्यात यूएई के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
किसानों को सही मूल्य उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
यह पहल कृषि निर्यात को बढ़ावा देने में मदद करेगी।
शीत श्रृंखला प्रबंधन में सुधार की संभावना है।
आने वाले वर्षों में निर्यात गंतव्य का विस्तार हो सकता है।

गढ़वाल, 22 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा सांसद अनिल बलूनी ने उनके लोकसभा क्षेत्र गढ़वाल से यूएई भेजे गए सेब के लिए किसानों को बधाई दी। इसके लिए उन्होंने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल का आभार व्यक्त किया।

अनिल बलूनी ने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए कहा कि मेरे लोकसभा क्षेत्र गढ़वाल के किसानों द्वारा उत्पादित सेब का यूएई के लिए निर्यात होना गढ़वाल सहित पूरे उत्तराखंड के लिए गर्व का पल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार किसान के उत्पादों को सही मूल्य उपलब्ध कराने के साथ-साथ विश्व के बाजारों के दरवाजे भी खोल रही है, जिससे उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो रही है।

उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि के लिए मैं गढ़वाल के किसानों को हार्दिक बधाई देता हूं और केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के प्रति आभार प्रकट करता हूं।

इससे पहले, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि देहरादून से दुबई, पौड़ी से हमारे 1.2 मीट्रिक टन स्वदेशी गढ़वाली सेब की पहली परीक्षण खेप यूएई के बाजार में भेजी गई। मांग बढ़ने पर उत्तराखंड के किसानों को अपनी मेहनत का ज्यादा मुनाफा मिलेगा।

बता दें कि वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग के सचिव सुनील बर्थवाल ने गुरुवार को देहरादून से दुबई के लिए 1.2 मीट्रिक टन गढ़वाली सेब (किंग रोट किस्म) की पहली परीक्षण खेप को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। यह परीक्षण खेप कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के सहयोग से संभव हो पाई, जो भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत है। यह पहल उत्तराखंड से कृषि निर्यात को बढ़ावा देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।

दुबई के लिए गढ़वाली सेब की यह पहली खेप एक आशाजनक यात्रा की शुरुआत है। इस परीक्षण से प्राप्त अनुभव शीत श्रृंखला प्रबंधन, फसल-उपरांत संचालन तथा लॉजिस्टिक ढांचे को और बेहतर बनाने में मदद करेंगे। एपीडा और उत्तराखंड सरकार के संयुक्त प्रयासों से अधिक किसानों के समूह लाभान्वित होंगे तथा आने वाले वर्षों में निर्यात गंतव्य दक्षिण-पूर्व एशिया और यूरोप तक भी विस्तारित किए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए यह कदम सराहनीय है और इसे आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गढ़वाल से सेब का यूएई में निर्यात कब शुरू हुआ?
गढ़वाल से सेब का यूएई में निर्यात 22 अगस्त को शुरू हुआ।
इस पहल का उद्देश्य क्या है?
इस पहल का उद्देश्य उत्तराखंड के कृषि निर्यात को बढ़ावा देना और किसानों की आय में वृद्धि करना है।
किस किस्म के सेब का निर्यात किया गया?
किंग रोट किस्म के गढ़वाली सेब का निर्यात किया गया।
किसके सहयोग से यह परीक्षण खेप भेजी गई?
यह परीक्षण खेप कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के सहयोग से भेजी गई।
क्या इस निर्यात से किसानों को लाभ होगा?
हाँ, मांग बढ़ने पर किसानों को अपनी मेहनत का ज्यादा मुनाफा मिलेगा।
राष्ट्र प्रेस
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