पंजाब की लीची पहली बार ओमान निर्यात: CEPA से मिला बाज़ार, पीयूष गोयल ने APEDA की सराहना की
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 3 जुलाई 2025 को जानकारी दी कि पंजाब के होशियारपुर स्थित उम्मत एग्री एलाइड कोऑपरेटिव सोसायटी की ताज़ी लीची पहली बार ओमान को निर्यात की गई है। यह निर्यात भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के तहत उपलब्ध बाज़ार अवसरों का लाभ उठाते हुए संपन्न हुआ।
निर्यात की पृष्ठभूमि और CEPA की भूमिका
गोयल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की गई पोस्ट में बताया कि भारत-ओमान CEPA ने भारतीय कृषि उत्पादों के लिए खाड़ी देशों में नए व्यापारिक रास्ते खोले हैं। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के प्रयासों की विशेष रूप से सराहना की। यह पहली बार है जब होशियारपुर की लीची किसी खाड़ी देश तक पहुँची है।
किसानों की आय और कृषि निर्यात पर असर
मंत्री गोयल के अनुसार, यह पहल तीन मोर्चों पर महत्वपूर्ण है — किसानों की आय में वृद्धि, कृषि निर्यात को गति देना, और भारतीय कृषि उत्पादों की वैश्विक पहचान को मज़बूत करना। गौरतलब है कि पंजाब के होशियारपुर क्षेत्र में लीची उत्पादन स्थानीय किसानों की आजीविका का एक प्रमुख स्रोत है, और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक पहुँच से उन्हें बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है।
भारतीय लीची निर्यात की बढ़ती श्रृंखला
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब भारत के विभिन्न राज्यों की लीची अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में अपनी जगह बना रही है। पिछले महीने गोयल ने उत्तराखंड की प्रसिद्ध देहरादून लीची के पहली बार इटली निर्यात होने का स्वागत किया था। उन्होंने उस अवसर पर कहा था, "देवभूमि की लीची अब इटली की पसंद बन गई है।" देहरादून की लीची अपनी प्राकृतिक मिठास, आकर्षक लाल रंग, सुगंध और बेहतरीन गूदे के लिए जानी जाती है — यहाँ रोज़ सेंटेड, कलकत्तिया और बेदाना जैसी किस्मों की खेती होती है।
इससे पहले असम के सोनितपुर जिले के तेजपुर क्षेत्र की प्रसिद्ध तेजपुर लीची का पहला निर्यात दुबई भेजा गया था, जिसने पूर्वोत्तर भारत के फल उत्पादकों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाज़ार के नए द्वार खोले। तेजपुर लीची को वर्ष 2014 में भौगोलिक संकेतक (GI) टैग भी प्राप्त हो चुका है, जो इस क्षेत्र की विशेष जलवायु और गुणवत्ता को आधिकारिक मान्यता देता है।
वैश्विक पहचान की दिशा में व्यापक रणनीति
गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक पहचान मिल रही है और किसानों को बेहतर आय के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं। पंजाब से ओमान, उत्तराखंड से इटली और असम से दुबई तक — यह क्रम दर्शाता है कि भारत अपनी विविध कृषि विरासत को व्यापार कूटनीति के औज़ार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। आने वाले महीनों में APEDA द्वारा और अधिक राज्यों की विशेष उपज को अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों से जोड़ने की संभावना है।