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पंजाब की लीची पहली बार ओमान निर्यात: CEPA से मिला बाज़ार, पीयूष गोयल ने APEDA की सराहना की

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पंजाब की लीची पहली बार ओमान निर्यात: CEPA से मिला बाज़ार, पीयूष गोयल ने APEDA की सराहना की

सारांश

पंजाब के होशियारपुर की लीची पहली बार ओमान पहुँची — भारत-ओमान CEPA का सीधा लाभ। देहरादून से इटली और तेजपुर से दुबई के बाद यह तीसरा बड़ा लीची निर्यात मील का पत्थर है, जो भारतीय कृषि उत्पादों की बढ़ती वैश्विक पहुँच को रेखांकित करता है।

मुख्य बातें

पंजाब के होशियारपुर की उम्मत एग्री एलाइड कोऑपरेटिव सोसायटी की लीची पहली बार ओमान निर्यात की गई।
निर्यात भारत-ओमान CEPA के तहत उपलब्ध बाज़ार अवसरों का उपयोग करके किया गया।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने APEDA के प्रयासों की सराहना की और इसे किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
पिछले महीने उत्तराखंड की देहरादून लीची पहली बार इटली निर्यात हुई थी।
असम की तेजपुर लीची — जिसे 2014 में GI टैग मिला — का पहला निर्यात दुबई को हुआ था।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 3 जुलाई 2025 को जानकारी दी कि पंजाब के होशियारपुर स्थित उम्मत एग्री एलाइड कोऑपरेटिव सोसायटी की ताज़ी लीची पहली बार ओमान को निर्यात की गई है। यह निर्यात भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के तहत उपलब्ध बाज़ार अवसरों का लाभ उठाते हुए संपन्न हुआ।

निर्यात की पृष्ठभूमि और CEPA की भूमिका

गोयल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की गई पोस्ट में बताया कि भारत-ओमान CEPA ने भारतीय कृषि उत्पादों के लिए खाड़ी देशों में नए व्यापारिक रास्ते खोले हैं। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के प्रयासों की विशेष रूप से सराहना की। यह पहली बार है जब होशियारपुर की लीची किसी खाड़ी देश तक पहुँची है।

किसानों की आय और कृषि निर्यात पर असर

मंत्री गोयल के अनुसार, यह पहल तीन मोर्चों पर महत्वपूर्ण है — किसानों की आय में वृद्धि, कृषि निर्यात को गति देना, और भारतीय कृषि उत्पादों की वैश्विक पहचान को मज़बूत करना। गौरतलब है कि पंजाब के होशियारपुर क्षेत्र में लीची उत्पादन स्थानीय किसानों की आजीविका का एक प्रमुख स्रोत है, और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक पहुँच से उन्हें बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है।

भारतीय लीची निर्यात की बढ़ती श्रृंखला

यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब भारत के विभिन्न राज्यों की लीची अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में अपनी जगह बना रही है। पिछले महीने गोयल ने उत्तराखंड की प्रसिद्ध देहरादून लीची के पहली बार इटली निर्यात होने का स्वागत किया था। उन्होंने उस अवसर पर कहा था, "देवभूमि की लीची अब इटली की पसंद बन गई है।" देहरादून की लीची अपनी प्राकृतिक मिठास, आकर्षक लाल रंग, सुगंध और बेहतरीन गूदे के लिए जानी जाती है — यहाँ रोज़ सेंटेड, कलकत्तिया और बेदाना जैसी किस्मों की खेती होती है।

इससे पहले असम के सोनितपुर जिले के तेजपुर क्षेत्र की प्रसिद्ध तेजपुर लीची का पहला निर्यात दुबई भेजा गया था, जिसने पूर्वोत्तर भारत के फल उत्पादकों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाज़ार के नए द्वार खोले। तेजपुर लीची को वर्ष 2014 में भौगोलिक संकेतक (GI) टैग भी प्राप्त हो चुका है, जो इस क्षेत्र की विशेष जलवायु और गुणवत्ता को आधिकारिक मान्यता देता है।

वैश्विक पहचान की दिशा में व्यापक रणनीति

गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक पहचान मिल रही है और किसानों को बेहतर आय के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं। पंजाब से ओमान, उत्तराखंड से इटली और असम से दुबई तक — यह क्रम दर्शाता है कि भारत अपनी विविध कृषि विरासत को व्यापार कूटनीति के औज़ार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। आने वाले महीनों में APEDA द्वारा और अधिक राज्यों की विशेष उपज को अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों से जोड़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उत्तराखंड से इटली और असम से दुबई — लीची निर्यात की यह त्रिकोणीय सफलता भारत की कृषि व्यापार कूटनीति की एक उभरती हुई तस्वीर पेश करती है। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये छोटे सहकारी समितियों और व्यक्तिगत किसानों तक मूल्य-वृद्धि का लाभ पहुँच रहा है, या यह मुख्यतः निर्यातकों और बिचौलियों का खेल बना हुआ है। CEPA जैसे समझौते बाज़ार खोलते हैं, पर आपूर्ति श्रृंखला में किसान की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए ज़मीनी तंत्र की ज़रूरत है — जिसकी चर्चा इन घोषणाओं में अक्सर गायब रहती है।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब की लीची ओमान को क्यों निर्यात की गई और इसमें CEPA की क्या भूमिका है?
भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के तहत मिले तरजीही बाज़ार पहुँच का लाभ उठाते हुए होशियारपुर की उम्मत एग्री एलाइड कोऑपरेटिव सोसायटी की लीची पहली बार ओमान निर्यात की गई। CEPA शुल्क रियायतें और सरलीकृत व्यापार प्रक्रियाएँ प्रदान करता है, जिससे भारतीय कृषि उत्पाद खाड़ी देशों में प्रतिस्पर्धी बन सके हैं।
इस लीची निर्यात से पंजाब के किसानों को क्या फायदा होगा?
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक पहुँच से होशियारपुर के लीची उत्पादकों को घरेलू बाज़ार की तुलना में बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इसे किसानों की आय बढ़ाने और कृषि निर्यात को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
भारत की किन-किन लीची किस्मों का हाल ही में विदेशों को निर्यात हुआ है?
हाल के महीनों में तीन प्रमुख लीची निर्यात हुए हैं — असम की तेजपुर लीची (दुबई), उत्तराखंड की देहरादून लीची (इटली), और अब पंजाब की होशियारपुर लीची (ओमान)। तेजपुर लीची को 2014 में GI टैग भी मिल चुका है।
APEDA का इन कृषि निर्यातों में क्या योगदान है?
कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) गुणवत्ता प्रमाणन, पैकेजिंग मानक, और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से संपर्क स्थापित करने में सहयोग करता है। पीयूष गोयल ने पंजाब और उत्तराखंड दोनों लीची निर्यात में APEDA की भूमिका की विशेष सराहना की है।
देहरादून लीची की क्या विशेषताएँ हैं जिसके कारण यह इटली पहुँची?
देहरादून लीची अपनी प्राकृतिक मिठास, आकर्षक लाल रंग, मनमोहक सुगंध और रसीले गूदे के लिए जानी जाती है। यहाँ रोज़ सेंटेड, कलकत्तिया और बेदाना जैसी विशेष किस्मों की खेती होती है, जो यूरोपीय उपभोक्ताओं के बीच भी लोकप्रिय हो रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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