भारत-ओमान सीईपीए लागू: ओमान की 98% टैरिफ लाइनों पर शुल्क-मुक्त पहुँच, निर्यात और निवेश को बड़ा बढ़ावा
सारांश
मुख्य बातें
भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) 2 जून 2025 से आधिकारिक रूप से प्रभावी हो गया है, जिससे भारत को ओमान की 98 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क-मुक्त पहुँच मिल गई है और भारत के 99 प्रतिशत से अधिक निर्यात को सीधा लाभ मिलेगा। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस समझौते को दोनों देशों के बीच सदियों पुराने भरोसे और साझेदारी का नया अध्याय करार दिया।
सीईपीए में क्या शामिल है
समझौते के लागू होते ही भारत के विभिन्न हिस्सों से 10 से अधिक निर्यात खेपें रियायती शुल्क व्यवस्था के तहत ओमान भेजी जा चुकी हैं। गोयल ने बताया कि यह समझौता भारतीय उत्पादों को ओमान के बाज़ार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति देगा। इससे नए बाज़ारों तक पहुँच, निर्यात वृद्धि, निवेश आकर्षण और रोज़गार सृजन को बल मिलेगा।
ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और ओमान का संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं है — यह 5,000 वर्षों पुरानी सभ्यतागत साझेदारी पर टिका है। उन्होंने याद दिलाया कि जब आधुनिक व्यापारिक व्यवस्थाएँ और शुल्क प्रणाली अस्तित्व में नहीं थीं, तब भी गुजरात के व्यापारी मस्कट तक भारतीय वस्तुएँ पहुँचाते थे। अरब सागर दोनों देशों को जोड़ने वाला वह सेतु रहा है जिस पर व्यापार और संस्कृति दोनों प्रवाहित होते रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी की ओमान यात्रा और सम्मान
गोयल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओमान यात्रा के दौरान दोनों देशों के रिश्तों को नई मज़बूती मिली। इस दौरान ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक ने प्रधानमंत्री मोदी को ओमान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'ऑर्डर ऑफ ओमान, फर्स्ट क्लास' से सम्मानित किया। गोयल के अनुसार यह सम्मान केवल प्रधानमंत्री मोदी का नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों का सम्मान है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को अब तक दुनिया के 32 देशों द्वारा सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रदान किया जा चुका है, जो भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव का प्रमाण है।
भारतीय समुदाय और एमएसएमई को लाभ
वर्तमान में लगभग 7 लाख भारतीय मूल के लोग ओमान में निवास करते हैं और वहाँ की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी सीईपीए को प्रधानमंत्री मोदी के उस विज़न का अहम पड़ाव बताया, जिसके तहत भारत के छात्रों, कारीगरों, महिलाओं, किसानों, मछुआरों तथा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए वैश्विक अवसर तैयार किए जा रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत खाड़ी क्षेत्र के साथ अपने आर्थिक संबंधों को व्यापक रूप से पुनर्परिभाषित कर रहा है।
आगे की राह
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने मस्कट में इस समझौते को दोनों देशों के साझा भविष्य का खाका बताया था और अब वह खाका ज़मीन पर उतर रहा है। भारतीय उद्योग जगत को उम्मीद है कि सीईपीए न केवल निर्यात बढ़ाएगा, बल्कि ओमान को भारतीय निवेश के लिए एक नए द्वार के रूप में भी स्थापित करेगा।