17 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

भारत-ओमान सीईपीए लागू: अगले 3 वर्षों में वस्तु निर्यात 50% बढ़कर $6 अरब तक पहुँचने की उम्मीद

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भारत-ओमान सीईपीए लागू: अगले 3 वर्षों में वस्तु निर्यात 50% बढ़कर $6 अरब तक पहुँचने की उम्मीद

सारांश

भारत-ओमान सीईपीए लागू होने के साथ भारत का ओमान को निर्यात तीन वर्षों में 50% बढ़कर $6 अरब तक पहुँचने की उम्मीद है। ओमान ने 98.08% टैरिफ लाइनों पर जीरो ड्यूटी दी है। यह समझौता भारत की बढ़ती वैश्विक व्यापार कूटनीति का हिस्सा है।

मुख्य बातें

भारत-ओमान सीईपीए 1 जून 2026 को लागू हुआ; निर्यात 50% बढ़कर $6 अरब तक पहुँचने का लक्ष्य।
ओमान ने 98.08% टैरिफ लाइनों पर जीरो ड्यूटी दी, जिसमें भारत का 99.38% निर्यात कवर।
टेक्सटाइल, फार्मा, इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल सहित श्रम-प्रधान क्षेत्रों को सीधा लाभ।
डेयरी, चाय, कॉफी, सोना-चाँदी आभूषण जैसे संवेदनशील उत्पाद रियायत से बाहर रखे गए।
ओमान का सर्विसेज आयात $12.52 अरब ; भारतीय सेवा कंपनियों के लिए बड़ा अवसर।
भारत ने ब्रिटेन (जुलाई 2025), न्यूजीलैंड (अप्रैल 2026) और EU (जनवरी 2026) के साथ भी व्यापार समझौते किए।

भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) सोमवार, 1 जून 2026 को औपचारिक रूप से लागू हो गया, जिसके बाद भारत का ओमान को वस्तु निर्यात अगले तीन वर्षों में 50 प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। इस समझौते का लक्ष्य निर्यात को पिछले वर्ष के 4.06 अरब डॉलर से बढ़ाकर 6 अरब डॉलर तक ले जाना है, जबकि मध्यम अवधि में यह आँकड़ा 10 अरब डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य है।

समझौते की मुख्य शर्तें

ओमान ने भारत को अपनी 98.08 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शून्य शुल्क (जीरो ड्यूटी) की पेशकश की है, जिसमें भारत का 99.38 प्रतिशत निर्यात कवर होता है। इससे जेम एंड ज्वेलरी, टेक्सटाइल, चमड़ा, जूता, स्पोर्ट्स गुड्स, प्लास्टिक, फर्नीचर, इंजीनियरिंग, फार्मा, मेडिकल डिवाइस और ऑटोमोबाइल जैसे अधिक श्रम-उपयोग वाले क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा।

भारत ने अपनी ओर से कुल टैरिफ लाइनों में से 77.79 प्रतिशत पर उदारीकरण की पेशकश की है, जो मूल्य के हिसाब से ओमान से भारत के आयात का 94.81 प्रतिशत है। ओमान के लिए महत्वपूर्ण किंतु भारत के लिए संवेदनशील उत्पादों पर यह पेशकश मुख्यतः शुल्क दर कोटा (टीआरक्यू) के आधार पर की गई है।

संवेदनशील क्षेत्र समझौते से बाहर

भारत ने अपने घरेलू हितों की रक्षा के लिए कई संवेदनशील उत्पादों को बिना किसी रियायत के समझौते के दायरे से बाहर रखा है। इनमें डेयरी, चाय, कॉफी, रबर और तंबाकू जैसे कृषि उत्पाद शामिल हैं। इसके अलावा सोना-चाँदी के आभूषण, जूते, खेल सामग्री और विभिन्न आधार धातुओं का स्क्रैप भी इस छूट से बाहर है।

गौरतलब है कि यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिसंबर 2025 में मस्कट यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित हुआ था और अब छह महीने बाद लागू हुआ है।

सेवा क्षेत्र को भी मिलेगा फायदा

वस्तु व्यापार के अलावा, भारत के सर्विस सेक्टर के लिए भी यह समझौता नई संभावनाएँ खोलता है। ओमान का सर्विसेज क्षेत्र का आयात 12.52 अरब डॉलर है, जो भारतीय आईटी, परामर्श और वित्तीय सेवा कंपनियों के लिए एक बड़ा बाज़ार है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने सेवा निर्यात को वैश्विक स्तर पर विस्तार देने की रणनीति पर काम कर रहा है।

भारत की व्यापक व्यापार कूटनीति

ओमान के साथ यह समझौता भारत की व्यापक मुक्त व्यापार रणनीति का हिस्सा है। भारत ने जुलाई 2025 में ब्रिटेन और अप्रैल 2026 में न्यूजीलैंड के साथ इसी तरह के समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके अलावा, 27 जनवरी 2026 को यूरोपीय संघ (27 देशों के समूह) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की बातचीत पूरी की गई है। अमेरिका के साथ भी द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है।

आने वाले महीनों में सीईपीए के क्रियान्वयन की निगरानी और व्यापार आँकड़ों में बदलाव यह तय करेंगे कि यह समझौता अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को हासिल कर पाता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में है। $4.06 अरब से $6 अरब का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, विशेषकर तब जब खाड़ी क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा तेज़ है और चीन पहले से ही ओमान के बाज़ार में गहरी पैठ बना चुका है। संवेदनशील कृषि उत्पादों को बाहर रखना घरेलू राजनीति की मजबूरी थी, लेकिन इससे किसानों को इस समझौते का कोई प्रत्यक्ष लाभ नहीं मिलेगा। सर्विस सेक्टर की $12.52 अरब की संभावना तभी साकार होगी जब ओमान में वीज़ा और पेशेवर मान्यता की बाधाएँ दूर हों — जो अभी तक अनसुलझी हैं।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-ओमान सीईपीए क्या है और यह कब लागू हुआ?
भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) एक द्विपक्षीय व्यापार समझौता है जो 1 जून 2026 को लागू हुआ। इस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिसंबर 2025 की मस्कट यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए गए थे।
इस समझौते से भारत के निर्यात पर क्या असर पड़ेगा?
इस समझौते से भारत का ओमान को वस्तु निर्यात अगले तीन वर्षों में 50% बढ़कर $4.06 अरब से $6 अरब तक पहुँचने की उम्मीद है। मध्यम अवधि में यह लक्ष्य $10 अरब तक ले जाने का है।
ओमान ने भारत को कितनी टैरिफ रियायत दी है?
ओमान ने भारत की 98.08% टैरिफ लाइनों पर जीरो ड्यूटी की पेशकश की है, जिसमें भारत का 99.38% निर्यात कवर होता है। इसमें टेक्सटाइल, फार्मा, इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल और मेडिकल डिवाइस जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं।
कौन-से उत्पाद इस समझौते की रियायतों से बाहर हैं?
भारत ने डेयरी, चाय, कॉफी, रबर, तंबाकू जैसे कृषि उत्पादों के साथ-साथ सोना-चाँदी के आभूषण, जूते, खेल सामग्री और आधार धातुओं के स्क्रैप को बिना किसी रियायत के समझौते से बाहर रखा है।
भारत और किन देशों के साथ इसी तरह के व्यापार समझौते कर रहा है?
भारत ने जुलाई 2025 में ब्रिटेन और अप्रैल 2026 में न्यूजीलैंड के साथ समझौते किए हैं। 27 जनवरी 2026 को यूरोपीय संघ के साथ एफटीए वार्ता पूरी हुई और अमेरिका के साथ भी द्विपक्षीय समझौते पर बातचीत जारी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले