भारत-ओमान सीईपीए लागू: 98% टैरिफ लाइनों पर शुल्क-मुक्त पहुँच, किसानों और MSMEs को सीधा फायदा
सारांश
मुख्य बातें
भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) 2 जून 2025 को आधिकारिक रूप से लागू हो गया, जिससे ओमान में भारत के 99.38 प्रतिशत निर्यात को कवर करने वाली 98 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर तत्काल 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त बाजार पहुँच मिल गई है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस समझौते को किसानों, कारीगरों, मछुआरों और लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए एक ऐतिहासिक अवसर बताया है।
सीईपीए से पहले और बाद की स्थिति
सीईपीए लागू होने से पहले ओमान को भारतीय निर्यात में केवल 15.3 प्रतिशत पर शून्य शुल्क पहुँच उपलब्ध थी। अब यह दायरा व्यापक रूप से बढ़कर 99.38 प्रतिशत निर्यात तक पहुँच गया है। इसके अतिरिक्त, ओमान में 5 प्रतिशत आयात शुल्क वाले लगभग 3.64 अरब डॉलर के निर्यात सामान अब अधिक प्रतिस्पर्धी बन जाएँगे, जिससे भारतीय उत्पादों की माँग में वृद्धि अपेक्षित है।
कौन-से क्षेत्रों को मिलेगा सर्वाधिक लाभ
इस समझौते के अंतर्गत रत्न एवं आभूषण, वस्त्र, चमड़ा, जूते, खेल सामग्री, प्लास्टिक, फर्नीचर, कृषि उत्पाद, इंजीनियरिंग उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स, चिकित्सा उपकरण और ऑटोमोबाइल सहित सभी प्रमुख श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर पूर्ण शुल्क छूट दी गई है। लौह और इस्पात, वस्त्र, चमड़ा, ऑटो कंपोनेंट्स और औद्योगिक उपकरण जैसे छोटे व्यवसायों के प्रभुत्व वाले क्षेत्रों में बड़े अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर मिलने की संभावना है।
गोयल ने कहा कि ओमान को वस्त्र निर्यात में वृद्धि से तिरुपुर, सूरत, लुधियाना, पानीपत, कोयंबटूर, करूर, मुरादाबाद, जयपुर और अहमदाबाद जैसे प्रमुख उत्पादन केंद्रों में रोज़गार सृजन होगा। भारत के कारीगरों और बुनकरों को भी अपने उत्पादों की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय माँग से प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
भारत का शुल्क उदारीकरण प्रस्ताव
भारत अपनी कुल शुल्क श्रेणियों में से 77.79 प्रतिशत पर शुल्क उदारीकरण की पेशकश कर रहा है, जो मूल्य के हिसाब से ओमान से भारत के आयात का 94.81 प्रतिशत है। ओमान को निर्यात के लिए महत्वपूर्ण और भारत के लिए संवेदनशील उत्पादों के लिए यह पेशकश मुख्य रूप से शुल्क दर कोटा (TRQ) आधारित है।
संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा
भारत ने अपने हितों की रक्षा के लिए कुछ संवेदनशील उत्पादों को बिना किसी रियायत के इस समझौते से बाहर रखा है। इनमें विशेष रूप से डेयरी, चाय, कॉफी, रबर और तंबाकू उत्पाद जैसे कृषि उत्पाद शामिल हैं। इसके अलावा सोना, चाँदी, आभूषण और कई आधार धातुओं का स्क्रैप भी इस सुरक्षित सूची में है।
आगे की राह
यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसका उद्देश्य नए बाजार खोलकर, निर्यात को बढ़ावा देकर और निवेश आकर्षित करके छात्रों, महिलाओं, किसानों, मछुआरों और MSMEs के लिए समृद्धि के वैश्विक मार्ग तैयार करना है। गौरतलब है कि भारत ने हाल के वर्षों में संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया के साथ भी इसी तरह के व्यापार समझौते किए हैं, और ओमान सीईपीए उसी श्रृंखला की अगली कड़ी है।