भारत-ओमान सीईपीए 1 जून से लागू: कपड़ा, फार्मा, जेम्स-ज्वैलरी निर्यात को शून्य शुल्क का लाभ
सारांश
मुख्य बातें
भारत और ओमान के बीच हस्ताक्षरित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) 1 जून 2026 से प्रभावी हो गया है, जिसके तहत भारत के श्रम-प्रधान क्षेत्रों — कपड़ा, चमड़ा, जेम्स एंड ज्वैलरी और फार्मा — के निर्यात को ओमान में शून्य शुल्क पर प्रवेश मिलेगा। वित्त मंत्रालय ने 31 मई 2026 को ओमान से आने वाले उत्पादों पर शुल्क रियायतों की आधिकारिक अधिसूचना जारी की।
समझौते की पृष्ठभूमि
इस सीईपीए पर पिछले साल दिसंबर 2025 में हस्ताक्षर हुए थे, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मस्कट का आधिकारिक दौरा किया था। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि शुल्क छूट का लाभ उठाने के लिए आयातक को यह प्रमाणित करना होगा कि संबंधित वस्तुएँ ओमान में ही निर्मित हैं — यानी उत्पत्ति के नियम (Rules of Origin) का अनुपालन अनिवार्य है।
मुख्य व्यापार प्रावधान
ओमान ने अपनी 98.08 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शून्य शुल्क पहुँच देने की पेशकश की है, जिससे भारत के 99.38 प्रतिशत निर्यात को सीधा लाभ मिलेगा। इसमें जेम्स एंड ज्वैलरी, कपड़ा, चमड़ा और फुटवियर, खेल सामान, प्लास्टिक, फर्नीचर, कृषि उत्पाद, इंजीनियरिंग उत्पाद, दवाइयाँ, मेडिकल उपकरण और ऑटोमोबाइल जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं।
भारत की ओर से 77.79 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क रियायत दी गई है, जो ओमान के 94.81 प्रतिशत आयात को कवर करती है। हालाँकि कुछ संवेदनशील उत्पादों को छूट से बाहर रखा गया है — जिनमें डेयरी, चाय, कॉफी, रबर, तंबाकू जैसे कृषि उत्पाद; सोना-चाँदी और आभूषण; फुटवियर और खेल सामान; तथा कई बेस मेटल्स का स्क्रैप शामिल हैं।
सेवा क्षेत्र और पेशेवरों को लाभ
वस्तुओं के अलावा सेवा क्षेत्र को भी इस समझौते से उल्लेखनीय लाभ मिलने की संभावना है। कंप्यूटर सेवाएँ, बिज़नेस, शिक्षा, स्वास्थ्य, शोध और प्रोफेशनल सेवाओं में नए अवसर खुलेंगे। अकाउंटेंसी, टैक्सेशन, आर्किटेक्चर, मेडिकल और संबद्ध सेवाओं में कुशल पेशेवरों के लिए ओमान में प्रवेश और ठहरने की शर्तें भी अधिक सरल की गई हैं।
भारतीय पेशेवरों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए ओमान ने इन्ट्रा-कॉरपोरेट ट्रांसफरी का कोटा 20 से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया है। साथ ही, कॉन्ट्रैक्चुअल सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए अनुमत अवधि 90 दिन से बढ़ाकर 2 वर्ष (और 2 वर्ष के विस्तार के साथ) कर दी गई है।
व्यापक वैश्विक रणनीति का हिस्सा
यह समझौता भारत की उस व्यापक कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है जो अमेरिकी टैरिफ में उथल-पुथल के बीच वैश्विक व्यापार में विविधीकरण की कोशिश कर रही है। भारत ने जुलाई 2025 में यूके, अप्रैल 2026 में न्यूजीलैंड और 27 जनवरी 2026 को यूरोपीय संघ (27 देशों के समूह) के साथ भी इसी तरह के मुक्त व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में पुनर्गठन तेज हो रहा है और भारत नए निर्यात बाज़ारों की तलाश में है।