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क्या ओडिशा के अंगुल के नींबू का अमेरिका को निर्यात किसानों के लिए लाभकारी होगा?

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क्या ओडिशा के अंगुल के नींबू का अमेरिका को निर्यात किसानों के लिए लाभकारी होगा?

सारांश

ओडिशा के अंगुल जिले से नींबू का निर्यात अमेरिका में शुरू हो गया है। यह कदम किसानों की आय बढ़ाने के लिए है, जिससे उन्हें बेहतर दाम मिल रहे हैं। क्या यह निर्यात किसानों के लिए आर्थिक राहत साबित होगा?

मुख्य बातें

नींबू का निर्यात ओडिशा के किसानों के लिए आर्थिक लाभ ला रहा है।
किसानों को अमेरिका के बाजार में बेहतर मूल्य मिल रहा है।
ओआरएमएएस का समर्थन किसानों के लिए महत्वपूर्ण है।
किसान अब अपनी फसल को सही दाम पर बेच पा रहे हैं।
यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी।

अंगुल, 26 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। किसानों की आय में वृद्धि के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है। इसी दिशा में ओडिशा के अंगुल जिले से इस महीने तीन चरणों में लगभग एक लाख नींबू का निर्यात किया गया है।

यह निर्यात ओडिशा रूरल डेवलपमेंट एंड मार्केटिंग सोसायटी (ओआरएमएएस) के सहयोग से किया गया है, जिसमें स्थानीय बाजार में 20 से 30 पैसे प्रति यूनिट में बिकने वाले नींबू का निर्यात एक रुपए प्रति यूनिट पर किया गया है।

अंगुल के नींबू की मांग अंतरराष्ट्रीय बाजार में, विशेषकर अमेरिका और यूके में तेजी से बढ़ रही है। केवल इसी महीने, छेंदीपाड़ा ब्लॉक के ओगी गांव से लगभग एक लाख नींबू की तीन खेपें अमेरिका भेजी गई हैं। यह निर्यात ओआरएमएएस द्वारा जरापाड़ा स्थित किसान-उत्पादक कंपनी "क्रॉपिफाई" के सहयोग से किया गया।

ओआरएमएएस के अधिकारियों के अनुसार, 26,000 नींबू की पहली खेप 7 अगस्त को भेजी गई थी। इससे पहले, किसानों को उचित मूल्य पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता था, और अक्सर वे व्यापारियों को 100 नींबू केवल 20-30 रुपए में बेचते थे। अब, किसान-उत्पादक कंपनी 100 रुपए प्रति सैकड़ा की दर से नींबू खरीद रही है, जिससे किसानों की कमाई पहले के मुकाबले तीन से चार गुना बढ़ गई है।

सिर्फ नींबू के अलावा, जूस, अचार और स्क्वैश जैसे वैल्यू एडेड उत्पाद भी व्यापक बाजारों के लिए तैयार किए जा रहे हैं। किसानों का कहना है कि इस पहल से उन्हें बड़े पैमाने पर नींबू की खेती जारी रखने के लिए बहुत जरूरी राहत और प्रेरणा मिली है।

नींबू की खेती करने वाले किसान बिपिन साहू ने राष्ट्र प्रेस को बताया, "पहले मैं नींबू बेचकर साल में मुश्किल से 20-30 हजार रुपए कमा पाता था। इस साल तो मैं अपने नींबू के पेड़ काटकर दूसरी फसलें उगाने की सोच रहा था। लेकिन ओआरएमएएस के सहयोग से नींबू बेचने के बाद मुझे अच्छा मुनाफा होने की उम्मीद है। पहले बाजार में कम दाम मिलने के कारण हम अकसर नींबू बिना तोड़े ही छोड़ देते थे। अब ऐसा नहीं होगा।"

एक अन्य किसान, टुनिया साहू ने कहा, "पहले व्यापारी हमें प्रति नींबू केवल 20 पैसे देते थे। चूंकि कटाई की लागत ज्यादा (लगभग 6 रुपए प्रति बोरी) थी, इसलिए हमने नींबू तोड़ना बंद कर दिया था। लेकिन अब, सरकार द्वारा प्रति नींबू 1 रुपए की दर सुनिश्चित करने से हम बहुत खुश हैं। हमने यह भी मांग की है कि भविष्य में नींबू 1.50 रुपए प्रति यूनिट की दर से खरीदे जाएं।"

ओआरएमएएस के उप-मुख्य कार्यकारी अधिकारी बिमन मल ने कहा, "हम नींबू का निर्यात कर रहे हैं और किसानों को काफी फायदा हो रहा है, क्योंकि उन्हें ज्यादा दाम मिल रहे हैं। हाल ही में लगभग 30,000-40,000 नींबू निर्यात किए गए हैं। हम नींबू का रस, खट्टा और कई अन्य उत्पाद भी तैयार कर रहे हैं।"

संपादकीय दृष्टिकोण

जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। यह निर्यात केवल आर्थिक लाभ नहीं, बल्कि किसानों के आत्मविश्वास को भी बढ़ाएगा।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओडिशा के अंगुल से नींबू का निर्यात कब शुरू हुआ?
इस महीने के अगस्त में, ओडिशा के अंगुल जिले से नींबू का निर्यात शुरू हुआ है।
किसान को नींबू के लिए कितना दाम मिल रहा है?
किसान अब प्रति नींबू 1 रुपए का दाम प्राप्त कर रहे हैं, जो पहले से काफी अधिक है।
निर्यात का समर्थन किस संस्था ने किया है?
निर्यात ओडिशा रूरल डेवलपमेंट एंड मार्केटिंग सोसायटी (ओआरएमएएस) के सहयोग से किया जा रहा है।
किसान इस पहल को लेकर क्या सोचते हैं?
किसान इस पहल को सकारात्मक मानते हैं और इससे उनकी आय में वृद्धि की उम्मीद है।
क्या अन्य उत्पादों का भी निर्यात किया जाएगा?
हां, नींबू के साथ-साथ जूस, अचार और स्क्वैश जैसे अन्य उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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