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रीवा के जीआई टैग वाले सुंदरजा आम की पहली खेप यूएई पहुँची, अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में ऐतिहासिक कदम

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रीवा के जीआई टैग वाले सुंदरजा आम की पहली खेप यूएई पहुँची, अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में ऐतिहासिक कदम

सारांश

रीवा का सुंदरजा आम अब सिर्फ मध्य प्रदेश की पहचान नहीं — यह अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में दस्तक दे चुका है। जीआई टैग और एपीडा के समन्वित प्रयासों से 1 मीट्रिक टन की पहली खेप यूएई पहुँची, जो भारतीय कृषि निर्यात के लिए एक नई राह खोलती है।

मुख्य बातें

रीवा के जीआई टैग वाले सुंदरजा आम की पहली वाणिज्यिक निर्यात खेप संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) पहुँची।
पहली खेप में 1 मीट्रिक टन आम शामिल थे, जिन्हें हवाई मार्ग से भेजा गया।
निर्यात मेसर्स साल्ट रेंज फूड्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया गया।
आम गोविंदगढ़ के ओन्धा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड और किसान सोनू गुप्ता से प्राप्त किए गए।
एपीडा ने मध्य प्रदेश के बागवानी विभाग, एफपीओ और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ मिलकर यह निर्यात संभव किया।
यह उपलब्धि राज्य के कृषक कल्याण वर्ष के दौरान हासिल की गई है।

मध्य प्रदेश के रीवा जिले के विश्वप्रसिद्ध सुंदरजा आम ने अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में अपनी पहचान दर्ज कराई है — जीआई (भौगोलिक संकेत) टैग से युक्त इस आम की पहली वाणिज्यिक निर्यात खेप संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) पहुँच गई है। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के सहयोग से यह ऐतिहासिक निर्यात संभव हो सका, जो राज्य के कृषक कल्याण वर्ष के दौरान एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

निर्यात खेप का विवरण

पहली वाणिज्यिक खेप में 1 मीट्रिक टन जीआई टैग वाले सुंदरजा आम शामिल थे। यह खेप मेसर्स साल्ट रेंज फूड्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा यूएई को निर्यात की गई। आमों को हवाई मार्ग से संयुक्त अरब अमीरात भेजा गया, जिससे उनकी ताज़गी और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।

निर्यात के लिए उच्च गुणवत्ता वाले आम रीवा जिले के गोविंदगढ़ निवासी ओन्धा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड और प्रगतिशील किसान सोनू गुप्ता से प्राप्त किए गए।

एपीडा और सरकार के समन्वित प्रयास

यह उपलब्धि रातोंरात नहीं मिली। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन एपीडा ने पिछले कई महीनों से मध्य प्रदेश सरकार के बागवानी विभाग, निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), पैकिंग हाउस संचालकों और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ मिलकर काम किया।

इन समन्वित प्रयासों के परिणामस्वरूप यूएई में एक खरीदार की पहचान हुई, जिससे रीवा सुंदरजा आम के अंतरराष्ट्रीय विपणन का रास्ता खुला। गौरतलब है कि यह पहल उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत भारत अपने जीआई टैग वाले कृषि उत्पादों को वैश्विक बाज़ार में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।

सुंदरजा आम की विशेषता और जीआई टैग का महत्व

रीवा का सुंदरजा आम अपनी अनूठी मिठास, सुगंध और रेशारहित गूदे के लिए जाना जाता है। जीआई टैग मिलने के बाद इस किस्म को कानूनी संरक्षण प्राप्त हुआ और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में इसकी विश्वसनीयता बढ़ी। यह टैग यह सुनिश्चित करता है कि केवल रीवा क्षेत्र में उगाए गए आम ही इस नाम से बेचे जा सकते हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने कृषि निर्यात को विविध बाज़ारों तक पहुँचाने पर जोर दे रहा है और खाड़ी देशों में भारतीय आमों की माँग लगातार बढ़ रही है।

आगे की राह

इस पहली खेप को रीवा सुंदरजा आम की अंतरराष्ट्रीय यात्रा की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। संबंधित अधिकारियों और निर्यातकों को उम्मीद है कि आने वाले सीज़न में नियमित निर्यात का मार्ग प्रशस्त होगा। यदि यूएई में माँग बनी रहती है, तो अन्य खाड़ी और यूरोपीय बाज़ारों में भी इस आम को पहुँचाने की योजना बनाई जा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब यह 'पहली खेप' की सुर्खी से आगे बढ़कर नियमित व्यापार बने। भारत में जीआई टैग वाले दर्जनों कृषि उत्पाद हैं जो एकाध बार निर्यात के बाद गुमनाम हो जाते हैं, क्योंकि आपूर्ति श्रृंखला, गुणवत्ता नियंत्रण और मूल्य प्रतिस्पर्धा की चुनौतियाँ बनी रहती हैं। एपीडा और राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि छोटे किसानों और एफपीओ को इस निर्यात का उचित लाभ मिले — अन्यथा यह उपलब्धि केवल कागज़ों तक सीमित रह जाएगी।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रीवा सुंदरजा आम क्या है और इसे जीआई टैग क्यों मिला?
रीवा सुंदरजा आम मध्य प्रदेश के रीवा जिले में उगाई जाने वाली एक विशेष किस्म है, जो अपनी असाधारण मिठास, सुगंध और रेशारहित गूदे के लिए जानी जाती है। जीआई (भौगोलिक संकेत) टैग मिलने से यह कानूनी रूप से संरक्षित हो गई है और केवल रीवा क्षेत्र में उगाए गए आम ही इस नाम से बेचे जा सकते हैं।
यूएई को सुंदरजा आम का निर्यात कैसे संभव हुआ?
एपीडा ने मध्य प्रदेश सरकार के बागवानी विभाग, किसान उत्पादक संगठनों, पैकिंग हाउस संचालकों और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ कई महीनों तक समन्वय किया। इसके परिणामस्वरूप यूएई में एक खरीदार की पहचान हुई और मेसर्स साल्ट रेंज फूड्स प्राइवेट लिमिटेड ने पहली खेप का निर्यात किया।
पहली निर्यात खेप में कितने आम भेजे गए और कहाँ से?
पहली वाणिज्यिक खेप में 1 मीट्रिक टन सुंदरजा आम शामिल थे, जिन्हें हवाई मार्ग से यूएई भेजा गया। ये आम रीवा जिले के गोविंदगढ़ स्थित ओन्धा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड और किसान सोनू गुप्ता से प्राप्त किए गए थे।
इस निर्यात का मध्य प्रदेश के किसानों पर क्या असर होगा?
यह निर्यात रीवा के आम किसानों के लिए नया बाज़ार खोलता है और उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने में मदद कर सकता है। यदि नियमित निर्यात शुरू होता है, तो क्षेत्र के किसान उत्पादक संगठनों और छोटे किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिल सकता है।
क्या आगे भी सुंदरजा आम का निर्यात होगा?
संबंधित अधिकारियों और निर्यातकों को आने वाले सीज़न में नियमित निर्यात की उम्मीद है। यूएई में माँग बनने पर अन्य खाड़ी और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुँचने की भी संभावना जताई जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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